
कोरोना के दौर में चीन पर आरोप लगा कि वहां के लोगों की चमगादड़ खाने की आदत के चलते इंसानों तक कोरोना वायरस पहुंचा. हालांकि इसका सच-झूठ पता नहीं लग सका लेकिन चीन ने आनन-फानन एग्जॉटिक पशुओं वाले सारे बाजारों पर सख्ती करनी शुरू कर दी. इसी बीच स्नेक फार्म्स की बात निकली. जैसे दुनिया के बहुत से देशों में चिकन के फार्म्स होते हैं, उसी तर्ज पर चीन में स्नेक फार्मिंग हो रही है. कई गांव हैं, जहां सांपों को पैदा किया और पाला-पोसा जाता है.
इस गांव को कहते हैं स्नेक विलेज
शेजियांग प्रांत के जिसिकियाओ गांव में यही काम होता है. वहां लगभग हर परिवार स्नेक फार्मिंग करता है. यही वजह है कि इसे स्नेक विलेज भी कहा जाने लगा. लगभग 7 दशक पहले इस गांव ने स्नेक फार्मिंग की जिम्मेदारी ली. एक अनुमान के मुताबिक, यहां हर साल से 3 से 5 मिलियन सांपों का जन्म होता है. वयस्क होने पर या डिमांड के मुताबिक उनकी चीन या बाहर सप्लाई होती है.
इलाज के काम आता रहा
ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन (TCM) में सांपों की स्किन से लेकर उनके तेल और जहर का भी उपयोग होता रहा. अगर आसान तरीके से समझना चाहें तो जैसे आयुर्वेद में हम जड़ी-बूटियों से दवा बनाते हैं, उसी तरह चीन में सांपों या कई पशुओं से दवाएं बनाई जाती रहीं.
ये सांप हैं डिमांड में
इसके लिए 4 तरह के सांपों की ज्यादा फार्मिंग होती है- करैत, पिट वाइपर, रैट स्नेक, रैटल स्नेक. कुछ दशकों से कोबरा भी इस श्रेणी में आ चुका है. इन सबको मिलाकर बी-हुआ-शी कहा जाता है. ये जहरीले सांपों के मेल से बनी मेडिसिन है, जिसे बहुत सावधानी से इस्तेमाल किया जाता है. मेडिसिन बनाने के अलावा चीन पर ये आरोप भी लगता रहा कि वहां ऊंचे दामों पर सांपों की डिश बनाकर बेची जाती है.
हर साल कितने सांपों का चीन के भीतर उपयोग होता है, और कितने बाहर भेज दिए जाते हैं, इसका कोई डेटा नहीं मिलता. अलग-अलग वेबसाइट्स पर इसपर अलग बातें कहती हैं, लेकिन माना जा रहा है कि दवा बनाने के लिए ही अकेले चीन 50 लाख से ज्यादा सांपों को खत्म कर देता है. ये डेटा भी कई साल पुराना है.
कब मिलता है परमिट
चीन की सरकार इसकी ब्रीडिंग के लिए परमिट देती रही. इसमें बताना होता है कि किस तरीके से फार्मिंग होगी, सांपों का कितना ध्यान रखा जाएगा. और क्या उनके जन्म में किसी आर्टिफिशियल तरीके का भी इस्तेमाल होगा. इसमें सबसे जरूरी है सांपों का प्राकृतिक या उसकी तरह लगने वाला वातावरण देना. साथ ही ये 20 से कम और 25 डिग्री से ज्यादा तापमान पर न रहें, इसका भी ध्यान रखना होता है.
किन देशों को होती रही सप्लाई
वैसे तो बहुत से देश चीन से एग्जॉटिक एनिमल्स मंगवा रहे हैं, लेकिन सांपों को खरीदने में अमेरिका, जर्मनी, जापान, साउथ कोरिया और हांगकांग आगे हैं. इसमें भी ज्यादातर तस्करी होती है क्योंकि अधिकतर जगहों पर एनिमल वेलफेयर के तहत इसपर बैन लगा हुआ है.
कितना महंगा होता है सांप का जहर
ये इसपर तय करता है कि सांप कौन सी किस्म का है. आमतौर पर सांपों के एक ग्राम जहर की कीमत साढ़े 4 सौ डॉलर से लेकर साढ़े 7 सौ डॉलर तक होती है. देश के मुताबिक भी ये कीमत कम-ज्यादा होती रहती है.
किस तरह होती है फार्मिंग
सबसे पहले सांपों के रहने लायक माहौल बनाना होता है. आमतौर पर ये आबादी वाले इलाकों से दूर होता है ताकि सांप किसी को नुकसान न पहुंचा सकें. इसके बाद सांपों को पकड़ने वाले एक्सपर्ट स्नेक्स की अलग-अलग किस्मों को वहां लाकर छोड़ते हैं. उनके खाने के लिए मेंढ़क, चूहे, चिड़िया, टोड, छिपकली जैसे जीव भी जुटाने होते हैं. कांच या लकड़ी के बक्सों में सांप के अंडे इनक्यूबेट किए जाते हैं. फिर बच्चों को उनके साइज के अनुसार दूसरी जगहों पर रखा जाता है. बड़ा होने पर इन्हें उतनी ही सावधानी से बूचड़खानों में भेजा जाता है.
हमेशा साथ रखनी होती है दवा
सांपों को पालना बेहद खतरनाक है. इसलिए स्नेक फार्मर्स को हमेशा अपने साथ एंटी-वेनम रखना होता है. हर किस्म के स्नेक का एंटी-वेनम अलग होता है. इसकी जानकारी डॉक्टर देता है. समय-समय पर देखना होता है कि एंटी-वेनम एक्सपायर तो नहीं हो गया. चीन में स्नेक फार्म्स में अक्सर हादसे होते रहते हैं. इसे कम करने के लिए फार्मर हाई बूट और ग्लव्स पहनते हैं, साथ ही सारे समय एंटी-वेनम लेकर चलते हैं.
कहां-कहां इस्तेमाल
जहरीले सांपों का सबसे पहले जहर निकालकर लैब में संरक्षित किया जाता है और फिर शरीर के दूसरे हिस्सों का इस्तेमाल होता है. मांस के लिए अलग तरह के सांप पाले जाते हैं. कॉस्मेटिक्स और कपड़ों के लिए भी सांपों की स्किन और दूसरे हिस्सों का उपयोग होता रहा. हालांकि इसपर पाबंदी है लेकिन तब भी ऐसा हो रहा है. कई देश स्नेक टूरिज्म भी करने लगे हैं, इसमें टूरिस्ट जहरीले सांपों को करीब से देखने के लिए आते हैं.