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साउथ चाइना सी में चीन से बार-बार क्यों भिड़ रहा फिलीपींस? अमेरिका ने दी ये चेतावनी

साउथ चाइना सी में फिलीपींस और चीन एक बार फिर भिड़ गए हैं. फिलीपींस ने चीन पर उसके जहाजों को जानबूझकर टक्कर मारने का आरोप लगाया है. इस बीच अमेरिका ने भी चीन को लेकर चेतावनी जारी की है. ये पूरा मामला क्या है? चीन-फिलीपींस का क्या है कहना? दक्षिण चीन सागर पर विवाद क्या है? समझिए...

दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस भिड़ गए हैं. दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस भिड़ गए हैं.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 24 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 3:36 PM IST

साउथ चाइना सी यानी दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस फिर भिड़ गए हैं. फिलीपींस ने आरोप लगाया है कि चीन के कोस्टगार्ड के जहाज ने उसकी एक सप्लाई बोट पर 'जानबूझकर' टक्कर मारी. 

ये घटना दक्षिण चीन सागर में सेकंड थॉमस शोल में हुई, जिसे लेकर विवाद है. फिलीपींस इस जगह को आयुंगिन शोल कहता है. इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें फिलीपींस और चीन के जहाज में टक्कर देखी जा सकती है.

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फिलीपींस के रक्षा सचिव गिलबर्तो टीयोडोरो ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि चीनी कोस्ट गार्ड और मैरिटाइम मिलिशिया जहाज ने अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ते हुए जानबूझकर हमारी सप्लाई बोट और कोस्टगार्ड शिप को टक्कर मारी.

उन्होंने बताया कि फिलीपींस की सरकार ने चीन के राजदूत हुआंग जिलियान को चीनी सरकार की लापरवाह और अवैध कृत्य की निंदा करने के लिए तलब किया गया था.

हुआ क्या था?

फिलीपींस के कोस्ट गार्ड के कोमोडोर जे तारिएला ने बताया कि करीब 5 चीनी कोस्टगार्ड शिप, 8 जहाज और 2 नौसेना जहाजों ने फिलीपींस की दो कोस्टगार्ड शिप और दो सप्लाई बोट को रोक दिया था.

उन्होंने बताया कि सप्लाई बोट थॉमस शोल में तैनात फिलीपींस के सैनिकों को खाना और दूसरे सामान देनी जा रही थी, तभी चीनी जहाजों ने उन्हें रोक दिया. 

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तारिएला ने दावा किया कि इस दौरान फिलीपींस की एक कोस्ट गार्ड शिप और सप्लाई बोट को चीनी जहाजों ने टक्कर मार दी. उन्होंने बताया कि इस कारण दो में से एक ही सप्लाई बोट फिर वहां तक पहुंच सकी.

चीनी जहाज ने कथित तौर पर फिलीपींस के जहाज को टक्कर मारी.

चीन ने क्या कहा?

चीन ने फिलीपींस के दावों को खारिज किया है. चीन का कहना है कि फिलीपींस के जहाज वहां मछली पकड़ रहे चीनी जहाजों से टकराए. 

सोमवार को चीन के दूतावास ने कहा कि उसने अपने जहाजों के अतिक्रमण पर फिलीपींस के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. साथ ही फिलीपींस की सरकार में समंदगर में उकसावे वाली कार्रवाई बंद करने का आह्वान किया है.

चीनी कोस्टगार्ड ने ये भी दावा किया है कि फिलीपींस के जहाज अपनी पोस्ट को मजबूत करने के लिए कंस्ट्रक्शन मटैरियल ले जा रहे थे.

चीन-फिलीपींस में बढ़ता तनाव

साल 2022 में फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर के फिलीपींस की सत्ता में आने के बाद से दक्षिण चीन सागर में चीन से तनाव ज्यादा ही बढ़ गया है.

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मार्कोस की सरकार आने के बाद से अब तक फिलीपींस कम से कम 122 बार दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता को लेकर राजनियक विरोध दर्ज करा चुका है.

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इसी साल 5 अगस्त को फिलीपींस ने चीन पर दक्षिण चीन सागर में उसकी मिलिट्री सप्लाई बोट पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था.

सेकंड थॉमस शोल को फिलीपींस में आयुंगिन और चीन में रेनाई रीफ के नाम से जाना जाता है. 200 समुद्री मील का ये इलाका दुनिया के सबसे व्यस्ततम कारोबारी रास्तों में से एक है.

अमेरिका बोला- हम फिलीपींस के साथ

फिलीपींस और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर में तनातनी को लेकर अमेरिका ने भी बयान दिया है. अमेरिका ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वो फिलीपींस का साथ देने के लिए बाध्य है.

अमेरिका ने बयान जारी कर कहा, 'दक्षिण चीन सागर में कहीं भी अगर फिलीपींस की सेना, जहाज और एयरक्राफ्ट पर सशस्त्र हमला होता है तो 1951 की संधि के तहत वो फिलीपींस का साथ देने के लिए बाध्य है.'

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, 'अमेरिका चीन की खतरनाक और गैरकानूनी कार्रवाइयों के खिलाफ फिलीपींस के साथ खड़ा है.'

अमेरिका ने इस टकराव के लिए चीन के जहाजों को जिम्मेदार को ठहराया और कहा कि उन्होंने फिलीपीनी जहाजों को रोककर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया.

अमेरिकी विदेश विभाग ने 2016 के फैसले का हवाला भी दिया, जिसने ऐतिहासिक आधार पर दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावों को अमान्य कर दिया, जिसमें सेकंड थॉमस शोल भी शामिल था.

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अमेरिका दक्षिण चीन सागर पर कोई दावा नहीं करता है लेकिन यहां अपने सहयोगियों की मदद के लिए पेट्रोलिंग करने के लिए सेना को तैनात कर रखा है. 

चीन इससे नाराज रहता है और उसने अमेरिका को इस विवाद में दखल न देने की चेतावनी दी है.

साउथ चाइना सी में क्या है विवाद?

- चीन दक्षिण चीन सागर को अपना बताता है. इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच पड़ने वाला ये समुद्री इलाका 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है. ये सागर इंडोनेशिया, चीन, फिलीपींस, ताइवान, वियतनाम, मलेशिया और ब्रूनेई से घिरा है. 

- कुछ साल पहले तक दक्षिणी चीन सागर को लेकर इतनी तनातनी नहीं थी. लेकिन सालों पहले चीन के समंदर में खुदाई करने वाले जहाज, ईंट और पत्थर लेकर दक्षिणी चीन सागर पहुंचे. 

- पहले चीन ने यहां एक बंदरगाह बनाया. फिर हवाई पट्टी. और फिर देखते ही देखते एक आर्टफिशियल द्वीप तैयार कर यहां सैन्य अड्डा बना दिया. 

- चीन की इस गतिविधि को लेकर जब सवाल उठे तो उसने दावा किया कि दक्षिणी चीन सागर से उसका दो हजार साल पुराना ताल्लुक है. अब हालात ये हैं कि दक्षिणी चीन सागर को लेकर कई देश आमने-सामने आ गए हैं.

दक्षिण चीन सागर में कई द्वीपों पर चीन अपना दावा करता है. (फोटो- रॉयटर्स)

साउथ चाइना सी पर किससे-क्या विवाद?

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- फिलीपींसः चीन और फिलिपींस में स्कारबोरो और स्प्रेटली आइलैंड को लेकर विवाद है. चीन इन्हें अपना हिस्सा मानता है. जबकि, फिलिपींस का कहना है कि ये दोनों उसके हिस्से हैं.

- वियतनामः चीन दावा करता है कि वियतनाम के कुछ हिस्से, खासकर पैरासल आइलैंड, स्प्रैटली आइलैंड और दक्षिणी चीन सागर के कुछ हिस्से उसके हैं. अप्रैल 2020 में चीन की सेना ने वियतनाम के एक जहाज को डूबा दिया था. ये जहाज मछली पकड़ने वालों का था. 

- इंडोनेशियाः चीन और इंडोनेशिया के बीच नातुना आइलैंड और दक्षिणी चीन सागर के कुछ हिस्सों को लेकर विवाद है. इंडोनेशिया अपने इलाके में एक ऑयल एंड नैचुरल गैस की सप्लाई के लिए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. चीन इस पर आपत्ति जताता है.  

- मलेशियाः चीन यहां भी स्प्रैटली आइलैंड को लेकर लड़ता है. अप्रैल 2020 में चीन की नौसेना ने एक मलेशियाई जहाज को घेर लिया था. इस पर मलेशिया ने आपत्ति जताई थी. बाद में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के जंगी जहाज भी विवादित इलाके में घुस गए थे, जिसके बाद चीनी जहाज को वहां से लौटना पड़ा था. 

- ब्रूनेईः ये एक छोटा इस्लामिक देश है. चीन और ब्रूनेई के बीच भी दक्षिणी चीन सागर के कुछ हिस्सों और स्प्रैटली आइलैंड को लेकर विवाद है. ब्रूनेई को अक्सर दक्षिणी चीन सागर में 'साइलेंट दावेदार' कहा जाता है.

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भारत का क्या है रोल?

- साउथ चाइना सी वैसे तो भारत के दखल का क्षेत्र नहीं है. लेकिन यहां ग्लोबल पावर बैलेंस बनाए रखने के लिए भारत का बड़ा रोल है. 

- दरअसल, चीन यहां तेजी से बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है. चीन की देखा-देखी अमेरिका ने भी अपनी गतिविधि बढ़ा दी. दक्षिण चीन सागर के नजदीक बसे देशों में अमेरिकी सेना ने युद्धाभ्यास कर चीन को सीधी चुनौती दी. मगर, दक्षिण चीन सागर में खुद को सही साबित करने के लिए अमेरिका को भारत जैसे मजबूत देश की जरूरत है.  

- दरअसल, भारत दक्षिण चीन सागर को एक न्यूट्रल जगह मानता है. भारत का मानना है कि ये किसी एक देश का समुद्र नहीं है. अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी इस बात पर डटा रहे क्योंकि इस बात पर डटा रहना भी एक तरह से समर्थन ही होगा.

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