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समंदर में चीन से क्यों भिड़ गया फिलीपींस... साउथ चाइना सी में इन देशों की भी ड्रैगन से दुश्मनी

साउथ चाइना सी में फिलीपींस और चीन में भिड़ंत हो गई है. फिलीपींस ने चीन पर अपने जहाजों को रोकने और उनपर वाटर कैनन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. ऐसे में जानते हैं कि दक्षिण चीन सागर को लेकर आखिर विवाद क्या है? और भारत की इसमें क्या भूमिका है?

साउथ चाइना सी पर चीन अपना दावा करता है. (फाइल फोटो) साउथ चाइना सी पर चीन अपना दावा करता है. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

साउथ चाइना सी यानी दक्षिण चीन सागर को लेकर एक बार फिर चीन और फिलीपींस आमने-सामने आ गए हैं. फिलीपींस ने चीन पर दक्षिण चीन सागर में अपने जहाज रोकने का आरोप लगाया है. 

फिलीपींस ने चीन कोस्ट गार्ड पर अपने जहाज रोकने का आरोप लगाया. साथ ही चीन पर मिलिट्री सप्लाई बोट पर वाटर कैनन का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया है. फिलीपींस ने इसे 'आक्रामक कार्रवाई' बताया है.

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दरअसल, चीनी कोस्ट गार्ड ने शनिवार को फिलीपींस के जहाजों को रोक दिया था और उनपर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था. 

चीन का दावा है कि उसने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि ऐसा करना जरूरी था. चीन ने फिलीपींस पर अतिक्रमण करने और अवैध सामग्री ले जाने का आरोप लगाया है.

किसने क्या कहा?

- ये घटना साउथ चाइना सी में सेकंड थॉमस शोल के पास हुई. फिलीपींस इसे आयुंगिन शोल कहता है. 

- ये एक पानी में डूबी चट्टान है. यहां पर फिलीपींस के सैनिक एक अमेरिकी जहाज पर रहते हैं, जो 1999 से यहां खड़ा हुआ है.

- फिलीपींस ने चीनी कोस्ट गार्ड की इस कार्रवाई को उकसावे वाली बताया है. साथ ही फिलीपींस ने इसके लिए चीन के राजदूत को तलब भी किया है.

- वहीं, चीनी कोस्ट गार्ड के प्रवक्ता गेन यू ने इस पर जवाब देते हुए साउथ चाइना सी पर एक बार फिर दावा ठोका. साथ ही फिलीपींस को यहां पर अपनी गतिविधियां रोकने की सलाह दी.

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- इस घटना पर अमेरिका ने भी बयान दिया. अमेरिका ने कहा, दक्षिण चीन सागर पर चीन की लगातार धमकियां क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा हैं. ऐसे समय में अमेरिका अपने सहयोग फिलीपींस के साथ खड़ा है.

पर साउथ चाइना सी में क्या है विवाद?

- चीन दक्षिण चीन सागर को अपना बताता है. इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच पड़ने वाला ये समुद्री इलाका 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है. ये सागर इंडोनेशिया, चीन, फिलीपींस, ताइवान, वियतनाम, मलेशिया और ब्रूनेई से घिरा है. 

- कुछ साल पहले तक दक्षिणी चीन सागर को लेकर इतनी तनातनी नहीं थी. लेकिन सालों पहले चीन के समंदर में खुदाई करने वाले जहाज, ईंट और पत्थर लेकर दक्षिणी चीन सागर पहुंचे. 

- पहले चीन ने यहां एक बंदरगाह बनाया. फिर हवाई पट्टी. और फिर देखते ही देखते एक आर्टफिशियल द्वीप तैयार कर यहां सैन्य अड्डा बना दिया. 

- चीन की इस गतिविधि को लेकर जब सवाल उठे तो उसने दावा किया कि दक्षिणी चीन सागर से उसका दो हजार साल पुराना ताल्लुक है. अब हालात ये हैं कि दक्षिणी चीन सागर को लेकर कई देश आमने-सामने आ गए हैं.

साउथ चाइना सी पर किससे-क्या विवाद?

- फिलीपींसः चीन और फिलिपींस में स्कारबोरो और स्प्रेटली आइलैंड को लेकर विवाद है. चीन इन्हें अपना हिस्सा मानता है. जबकि, फिलिपींस का कहना है कि ये दोनों उसके हिस्से हैं.

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- वियतनामः चीन दावा करता है कि वियतनाम के कुछ हिस्से, खासकर पैरासल आइलैंड, स्प्रैटली आइलैंड और दक्षिणी चीन सागर के कुछ हिस्से उसके हैं. अप्रैल 2020 में चीन की सेना ने वियतनाम के एक जहाज को डूबा दिया था. ये जहाज मछली पकड़ने वालों का था. 

- इंडोनेशियाः चीन और इंडोनेशिया के बीच नातुना आइलैंड और दक्षिणी चीन सागर के कुछ हिस्सों को लेकर विवाद है. इंडोनेशिया अपने इलाके में एक ऑयल एंड नैचुरल गैस की सप्लाई के लिए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. चीन इस पर आपत्ति जताता है.  

- मलेशियाः चीन यहां भी स्प्रैटली आइलैंड को लेकर लड़ता है. अप्रैल 2020 में चीन की नौसेना ने एक मलेशियाई जहाज को घेर लिया था. इस पर मलेशिया ने आपत्ति जताई थी. बाद में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के जंगी जहाज भी विवादित इलाके में घुस गए थे, जिसके बाद चीनी जहाज को वहां से लौटना पड़ा था. 

- ब्रूनेईः ये एक छोटा इस्लामिक देश है. चीन और ब्रूनेई के बीच भी दक्षिणी चीन सागर के कुछ हिस्सों और स्प्रैटली आइलैंड को लेकर विवाद है. ब्रूनेई को अक्सर दक्षिणी चीन सागर में 'साइलेंट दावेदार' कहा जाता है.

दक्षिण चीन सागर में कई द्वीपों पर चीन अपना दावा करता है. (फोटो- रॉयटर्स)

भारत का क्या है रोल?

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- साउथ चाइना सी वैसे तो भारत के दखल का क्षेत्र नहीं है. लेकिन यहां ग्लोबल पावर बैलेंस बनाए रखने के लिए भारत का बड़ा रोल है. 

- दरअसल, चीन यहां तेजी से बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है. चीन की देखा-देखी अमेरिका ने भी अपनी गतिविधि बढ़ा दी. दक्षिण चीन सागर के नजदीक बसे देशों में अमेरिकी सेना ने युद्धाभ्यास कर चीन को सीधी चुनौती दी. लेकिन दक्षिण चीन सागर में खुद को सही साबित करने के लिए अमेरिका को भारत जैसे मजबूत देश की जरूरत है.  

- दरअसल, भारत दक्षिण चीन सागर को एक न्यूट्रल जगह मानता है. भारत का मानना है कि ये किसी एक देश का समुद्र नहीं है. अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी इस बात पर डटा रहे. क्योंकि इस बात पर डटा रहना भी एक तरह से समर्थन ही होगा.

 

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