
जी20 समिट में भाग लेने के लिए दुनियाभर से विदेशी मेहमान पहुंच रहे हैं. सभी VVIP गेस्ट हैं, जिनके लिए खास फोर्स तैनात है. इसका काम यही होगा कि लीडर्स को किसी तरह की दिक्कत न हो. एक तरफ तो इतने इंतजाम हैं, दूसरी ओर एक रूल से हरेक गेस्ट, यहां तक कि राष्ट्राध्यक्षों तक को गुजरना होगा. ये है पासपोर्ट चेक करवाना. भले ही सबके पास डिप्लोमेटिक पासपोर्ट है, जिसकी कीमत कुछ और ही है, लेकिन पासपोर्ट जांच बड़े लीडरों के लिए भी जरूरी है.
क्या है डिप्लोमेटिक पासपोर्ट
कुछ महीनों पहले राहुल गांधी को अपना डिप्लोमेटिक पासपोर्ट सरेंडर करना पड़ा था. इसके बाद वे सामान्य पासपोर्ट के साथ अमेरिका यात्रा पर गए. डिप्लोमेटिक यानी राजनयिक पासपोर्ट नेताओं और कुछ अधिकारियों को जारी होते हैं, जो देश के प्रतिनिधि के तौर पर बाहर जाते हैं. इसका रंग कत्थई होता है, और एक्सपायर होने का समय 5 साल होता है. नॉर्मल पासपोर्ट में ये 10 साल होता है.
क्या फायदे हैं इसके
इस पासपोर्टधारी को कई इंटरनेशनल सुविधाएं मिलती हैं, जैसे होस्ट देश में उनकी गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती. कोई भी खतरा आने पर उन्हें सबसे पहले सुरक्षित देश से निकाला जाता है. इसमें उन्हें विदेशों में एम्बेंसी से लेकर यात्रा के दौरान कई सुविधाएं मिलती हैं. वीजा की जरूरत नहीं होती. इसके अलावा इमिग्रेशन या किसी भी औपचारिकता के लिए लाइन में खड़ा नहीं होना होता.
कितना अलग है बाइडेन का पासपोर्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति, उनके परिवार और हाई रैंकिंग अधिकारियों को काले रंग का पासपोर्ट इश्यू होता है. इसके लिए उन्हें कोई फीस नहीं देनी पड़ती है. वहीं सामान्य पासपोर्ट नीले रंग का होता है. इसके अलावा भी यूएस में 3 अलग रंगों के पासपोर्ट होते हैं, जिनका मकसद अलग-अलग होता है.
क्या राष्ट्रपति खुद अपना पासपोर्ट और कागजात संभालेंगे
ये आम लोगों की तरह नहीं है कि हम एक बैग में अपना पासपोर्ट और जरूरी कागज लेकर चलें. इसके लिए राष्ट्रपति के पास अलग पर्सनल होते हैं, जिनका काम जरूरी दस्तावेजों को प्रेसिडेंट के साथ लेकर जाना है. जैसे ही बाइडेन फ्लाइट से उतरेंगे, यही लोग उनका पासपोर्ट चेक करवाएंगे, जबकि बाइडन खुद सुरक्षा इंतजामों में चले जाएंगे. वापसी के दौरान भी यही प्रोसेस होगी. भले ही ये महज औपचारिकता है, लेकिन जांच पूरी होती है.
तीन ही लोगों को मिली है खास सुविधा
पहले वर्ल्ड वॉर के बाद पासपोर्ट सिस्टम शुरू हुआ. यानी अब इसे 100 से ज्यादा साल बीते. इसका मकसद देशों में अवैध घुसपैठ को रोकना है. काफी हद तक इसमें कामयाबी भी मिली. अब एक से दूसरे देश जाने के लिए बड़े से बड़ा लीडर भी अपने साथ ये कागजात रखता है. वहीं दुनिया में 3 ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें पासपोर्ट या किसी भी तरह के पहचान पत्र की जरूरत नहीं. बिना पासपोर्ट के ये लोग न केवल दूसरे देशों में एंट्री पाते हैं, बल्कि खूब मेहमान-नवाजी भी होती है.
इनमें एक नाम है ब्रिटिश किंग चार्ल्स का
किंग से पहले ये अधिकार ब्रिटिश क्वीन एलिजाबेथ के पास रहा. क्वीन के निधन के तुरंत बाद ब्रिटेन की फॉरेन मिनिस्ट्री ने सभी देशों को संदेश भेजा कि अब चार्ल्स राजा हैं, लिहाजा उन्हें डिप्लोमेटिक इम्युनिटी मिले. ये एक तरह का संदेश था कि जैसे क्वीन को पासपोर्ट दिखाने की जरूरत नहीं थी, वैसा ही किंग के साथ भी हो.
किंग चार्ल्स के अलावा शाही परिवार के पास राजनयिक पासपोर्ट है. किसी भी विदेश यात्रा के दौरान उन्हें ये अपने साथ ले जाना भी होता है. हालांकि डिप्लोमेटिक इम्युनिटी इन सबको मिली हुई है, यानी जांच नहीं होती, बल्कि सुविधाएं मिलती हैं.
क्यों जरूरत नहीं पासपोर्ट की
ब्रिटेन में सारे ही पासपोर्ट, चाहे वो रेगुलर हों, या डिप्लोमेटिक, सब सम्राट के नाम पर जारी होते हैं. यानी पूरे देश की पहचान यही किंग या क्वीन हैं. यही वजह है कि खुद किंग को पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती. दूसरा, जब पासपोर्ट सिस्टम शुरू हुआ, इस देश ने कई देशों पर कब्जा किया हुआ था. तो मान सकते हैं कि ये लिहाज अब तक चला आ रहा है.
जापान के राजा-रानी को भी विशेषाधिकार
जापान में भी राजशाही है, यानी इस देश की पहचान उसके राजा-रानी से है. जापान के सम्राट नारोहितो और क्वीन मसाको ओवादा हैं. साल 2019 में उन्हें ये पद मिला. जापान के साथ भी लगभग ब्रिटेन जैसा नियम है. सत्तर के दशक में वहां की संसद ने तय किया कि वो अपने राजा-रानी को जांच की प्रक्रिया से नहीं गुजरने देंगे. तब से ही नियम चला आ रहा है. हर बार गद्दी पर नए सम्राट के आने के साथ जापान की फॉरेन मिनिस्ट्री बाकी देशों को औपचारिक चिट्ठी भेजती है, जिसमें ये बात होती है.
इसके अलावा दोनों ही देशों के सचिवालय अपने राजाओं की विदेश यात्रा से पहले संबंधित देश की पहले से सूचित कर देता है. इससे आसानी हो जाती है. वैसे कई और भी छोटे-मोटे देश हैं, जो रॉयल सिस्टम मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि उनके यहां के राजा दूसरे देश की यात्रा करें तो उन्हें पासपोर्ट न रखने की छूट मिलेगी.