
पूजा खेडकर अब आईएएस अफसर नहीं रहीं. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने उनका ट्रेनी IAS का पद रद्द कर दिया है. इसके साथ ही पूजा पर हमेशा के लिए UPSC के किसी भी एग्जाम देने पर रोक लगा दी गई है.
पूजा खेडकर पिछले कुछ महीनों से चर्चा में बनी हुई हैं. उन पर कई सारे इल्जाम लगे हैं. इसके बाद UPSC ने उनके खिलाफ ये एक्शन लिया है.
UPSC ने बयान जारी कर बताया कि सारे रिकॉर्ड की अच्छी तरह से जांच की गई. इसमें पूजा को 2022 के सिविल सर्विसेस एग्जाम रूल्स (CSE-Rules) के उल्लंघन का दोषी पाया गया.
बयान में बताया गया है कि 2023 बैच की प्रोबेशनरी IAS अफसर की प्रोविजनल कैंडिडेचर को रद्द कर दिया गया है. साथ ही उनपर भविष्य में होने वाले UPSC के एग्जाम और सिलेक्शन पर भी रोक लगा दी है.
पूजा खेडकर की अफसरी रद्द क्यों?
UPSC ने बताया कि 2009 से 2023 के बीच 15 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों के रिकॉर्ड चेक किए गए. इसमें पाया गया कि पूजा के अलावा और किसी भी उम्मीदवार ने तय से ज्यादा अटेम्प्ट नहीं दिए थे.
बयान में बताया गया है कि पूजा को इसलिए नहीं पकड़ा जा सका, क्योंकि कई बार उन्होंने न सिर्फ अपना बल्कि अपने माता-पिता का नाम भी बदलकर एग्जाम दिया था. UPSC ने बताया कि SOP को और मजबूत किया जाएगा, ताकि इस तरह के मामले दोबारा न हों.
UPSC ने पूजा खेडकर को 18 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. उन्हें 25 जुलाई तक जवाब देना था. हालांकि, पूजा ने 4 अगस्त तक मोहलत मांगी थी, जिसके बाद UPSC ने उन्हें 30 जुलाई तक का वक्त दिया. साथ ही उन्हें हिदायत भी दी गई थी कि ये आखिरी मौका है, लेकिन इसके बावजूद पूजा अपनी सफाई देने में नाकाम रहीं.
एग्जाम पास करने के बाद कैसे चली गई अफसरी?
पूजा खेडकर ने 2022 में UPSC की परीक्षा पास की थी. उन्हें 841वीं रैंक मिली थी. पूजा 2023 बैच की IAS अफसर हैं. जून 2024 में ही उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई थी.
ऐसे में सवाल मन में आता है कि एग्जाम पास करने के बाद पूजा की अफसरी रद्द कैसे हो गई? दरअसल, पूजा अभी प्रोविजनल कैंडिडेट थीं.
एग्जाम और इंटरव्यू क्लियर करने के बाद UPSC उम्मीदवार की पोस्टिंग कर देता है. लेकिन कुछ महीनों तक ये पोस्टिंग प्रोविजनल यानी अस्थायी होती है. इस दौरान उम्मीदवार की पात्रता और दस्तावेजों का वेरिफिकेशन किया जाता है. अगर वेरिफिकेशन में पाया जाता है कि उम्मीदवार किसी शर्त को पूरा नहीं करता है या उसने फर्जी दस्तावेज दिए थे, तो UPSC उसकी उम्मीदवारी को रद्द कर देता है.
अगर किसी उम्मीदवार के दस्तावेज गलत पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ CSE रूल्स के तहत कार्रवाई की जाती है. इसके तहत, UPSC उस उम्मीदवार की उम्मीदवारी तो रद्द करता ही है, साथ ही कुछ समय या हमेशा के लिए सिविल सर्विसेस एग्जाम देने पर भी रोक लगा देता है.
पूजा खेडकर के साथ यही हुआ. उन्होंने एग्जाम तो पास कर लिया था. लेकिन जब जांच की गई तो इसमें गड़बड़ पाई गई. इसलिए UPSC ने उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी और एग्जाम देने पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया.
कब रद्द हो सकती है उम्मीदवारी?
सिविल सर्विसेस एग्जाम रूल्स में कई सारी ऐसी बातें बताई गई हैं, जिनका दोषी पाए जाने पर किसी उम्मीदवार की उम्मीदवारी को रद्द कर दिया जाता है.
अगर कोई उम्मीदवार घूस देने, धमकाने, ब्लैकमेल करने, फर्जी या मनगढ़ंत दस्तावेज जमा करने, झूठे दावे करने, जरूरी जानकारी छिपाने, एग्जामिनर को प्रभावित करने या उसे डराने-धमकाने, क्वेश्चन पेपर को फाड़ने, एग्जाम कॉपी में अश्लील कंटेंट लिखने, एग्जाम हॉल में बदसलूकी करने, एग्जाम हॉल में मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, कैमरा, ब्लूटूथ डिवाइस या पेन ड्राइव ले जाने जैसे मामलों का दोषी पाए जाने पर उम्मीदवारी रद्द हो जाती है.
क्या है इसकी प्रक्रिया?
जब भी कोई उम्मीदवार UPSC की परीक्षा देता है तो उस वक्त उससे दस्तावेज मांगे जाते हैं. उस वक्त भी दस्तावेजों की जांच होती है. लेकिन एग्जाम और इंटरव्यू क्लियर कर लेने के बाद जब उम्मीदवार की पोस्टिंग की जाती है तो उसके बाद उन दस्तावेजों का वेरिफिकेशन होता है.
मसलन, अगर कोई उम्मीदवार दिव्यांग है तो इसकी जांच की जाती है. एम्स के डॉक्टर उसकी मेडिकल जांच करते हैं. अगर कुछ गड़बड़ी पाई जाती है तो UPSC उम्मीदवारी कैंसिल कर देता है. उस पर कुछ वक्त के लिए या हमेशा के लिए एग्जाम देने पर पाबंदी भी लगा दी जाती है.
हालांकि, ये सब करने से पहले उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने का भी मौका दिया जाता है. अगर उम्मीदवार अपना पक्ष नहीं रखता है या फिर उसके जवाब से UPSC संतुष्ट नहीं होता, तो फिर उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है.
पूजा खेडकर कैसे पकड़ी गई?
इसी साल जून में पूजा खेडकर को पुणे में प्रोबेशनरी असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया था. यहां उनकी ट्रेनिंग हो रही थी. लेकिन उन्होंने अनुचित मांगें करनी शुरू कर दी. उन्होंने अपनी ऑडी कार में लाल-नीली बत्ती लगा ली. उन्होंने वो सुविधाएं देने की मांग की जो सीनियर अफसरों को मिलती थीं.
आखिरकार, पुणे के कलेक्टर सुहास दिवसे ने शिकायत की, जिसके बाद पूजा का ट्रांसफर वाशिम में कर दिया गया. इसके बाद जब जांच हुई तो पता चला कि उन्होंने UPSC में सिलेक्शन पाने के लिए कई फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया.
जांच में सामने आया कि पूजा ने UPSC के सामने मानसिक रूप से बीमार होने का दावा भी किया था. उन्होंने फर्जी तरीके से विकलांगता सर्टिफिकेट भी बनवाया था. उन्होंने अपने विकलांगता सर्टिफिकेट में जो एड्रेस दिया था, वो भी गलत निकला.
इतना ही नहीं, पूजा ने 2020 में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) को दिए आवेदन में अपनी उम्र 30 साल बताई थी. लेकिन 2023 में दिए आवेदन में 31 साल उम्र बताई. पूजा ने अपना और माता-पिता का नाम बदलकर तय अटेम्प्ट से ज्यादा बार परीक्षा दी. ओबीसी उम्मीदवार सिर्फ 9 अटेम्प्ट दे सकता है, लेकिन पूजा ने इससे ज्यादा बार एग्जाम दिया.
पूजा पर सबसे बड़ा आरोप ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर कोटे का फायदा उठाने का लगा है. उनके पिता के पास 40 करोड़ की संपत्ति है, जबकि पूजा भी खुद 17 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति की मालकिन हैं. ओबीसी कोटे का फायदा तब मिलता है, जब माता-पिता की सालाना कमाई 8 लाख से कम हो. उन्होंने अपने ओबीसी सर्टिफिकेट में संपत्ति छिपाई और कोटे का फायदा लिया.