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प्रिगोझिन की मौत के बाद 'भाड़े के सैनिकों' का क्या होगा, जानें- क्यों रूसी सेना से भी ज्यादा ताकतवर है ये आर्मी?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बगावत करने वाले वैगनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोझिन की मौत हो गई. प्रिगोझिन का कथित तौर पर विमान हादसे का शिकार होना किसी को चौंकाता नहीं. इससे पहले भी क्रेमलिन का तख्तापलट करने वालों का यही अंजाम हुआ. लेकिन अब सवाल ये है कि नेता की मौत के बाद उसकी सेना यानी वैगनर समूह का क्या होगा.

वैगनर ग्रुप चीफ येवगेनी प्रिगोजिन की मौत के बाद उनकी सेना के बारे में कई कयास लग रहे हैं. वैगनर ग्रुप चीफ येवगेनी प्रिगोजिन की मौत के बाद उनकी सेना के बारे में कई कयास लग रहे हैं.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 6:21 PM IST

प्रिगोझिन की मौत पर आखिरकार पुतिन ने चुप्पी तोड़ ही दी. गुरुवार को श्रद्धांजलि देते हुए पुतिन ने उनकी कई अच्छी-बुरी बातें याद कीं. साथ ही प्लेन क्रैश की जांच की भी बात कही. जांच कब होगी और इसके नतीजे क्या होंगे, क्या वाकई प्रिगोझिन हादसे नहीं, बल्कि किसी प्लानिंग का शिकार हुए, ये सारी बातें बाद की हैं, फिलहाल सबसे तेज तलवार सैन्य ग्रुप पर लटक रही है. क्या उसे भी विद्रोह की कोई सजा मिलेगी, ये सवाल सबके मन में है. 

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क्या है वैगनर ग्रुप 
यह रशियन प्राइवेट मिलिट्री कंपनी है, जिसका काम है दुनियाभर में फैलकर सीधे या अपरोक्ष तरीके से रूस के फेवर में काम करना है. कहा जाता है कि इस कम्युनिस्ट देश से चूंकि बहुत से देश बचते हैं लिहाजा ये रूसी समूह परदे की ओट लेकर अपने हित साध रहा है.

कौन काम करता है इसमें

साल 2013 में ये ग्रुप तैयार हुआ. यूएस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अंदाजे के मुताबिक, इसमें 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग वे हैं, जो कभी न कभी अपराध कर चुके. इनमें भी ज्यादातर अनुभवी सैनिक हैं. ऊपरी तौर पर भाड़े के सैनिकों वाले कंसेप्ट को रूस नकारता है, लेकिन पिछले साल ही इसे कंपनी की तरह रजिस्टर किया गया और सेंट पीटर्सबर्ग में हेडक्वार्टर बनाया गया. वैगनर ग्रुप खुद को देशभक्त संगठन की तरह पेश करने लगा है. यहां तक कि रूस में इसके बैनर-पोस्टर तक लगे हुए हैं.

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वैगनर समूह के लीडर प्रिगोजिन (दाएं) लंबे समय तक पुतिन के करीबी रहे. (Photo- AFP)

कैसे अलग हैं रूसी सशस्त्र बल से

- ये सरकार के सैनिक नहीं, बल्कि प्राइवेट सैनिक हैं, जिनकी तैनाती वैगनर ग्रुप के बैनर तले होती रही. 

- प्राइवेट आर्मी कहलाते इस सैन्य दल में आम लोग भी होते हैं, जिन्हें हथियार चलाना आता हो. 

- इनपर सैन्य प्रोटोकॉल को मानने की बाध्यता नहीं. यही वजह है कि यूक्रेन युद्ध में वैगनर्स पर नागरिकों का खून बहाने का आरोप लगा. 

- अक्सर इस ग्रुप के भीतर पैसों की तंगी की खबरें भी आती रहीं. रशियन मिलिट्री ऑफ डिफेंस के साथ ये समस्या नहीं है. 

- ये रूस की छिपी हुई विदेश नीति को साधने वाला ग्रुप है. जैसे दूसरे अशांत देशों में जाकर एक ग्रुप की मदद करना ताकि उस देश में पैठ बना सके. 

क्या होगा अब वैगनर्स के साथ

इसपर लगातार बात हो रही है. जून में प्रिगोझिन की लीडरशिप में ये समूह लगभग तख्तापलट करने ही वाला था कि अचानक पासा पलट गया. बीच में बेलारूस आया और सब शांत हो गया. ग्रुप के लीडर ने माफी मांगते हुए पैर खींच लिए. क्या और क्यों हुआ, ये किसी की भी समझ में नहीं आया, लेकिन ग्रुप टूटने लगा. बहुत से सैनिक, जो विद्रोह में शामिल नहीं थे, उन्हें रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया. 

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तो क्या ग्रुप खत्म कर दिया जाएगा

फिलहाल जैसे हालात हैं, उसमें ऐसा नहीं लगता. वैगनर ग्रुप सीधी लड़ाई लड़ने के अलावा मॉस्को के कई सारे ऐसे हित साधता रहा, जो सेना नहीं कर सकती. जैसे नाइजर या सूडान का मामला लें तो ये प्राइवेट आर्मी वहां की सरकार को सपोर्ट करते हुए विद्रोहियों को कुचलने की कोशिश कर रही है. इसके बदले में उसे अफ्रीकी सोने की खदानों पर बड़ा कब्जा मिल सकता है. साथ ही साथ अमेरिका की वजह से अलग-थलग पड़ जाने का डर भी नहीं रहेगा.

रूस अपने वैगनर ग्रुप के जरिए दुनिया के कई अस्थिर देशों में फैला हुआ है. माली, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, लीबिया, सीरिया जैसे कुछ देशों में ये सैनिक तैनात हैं. 

क्या विकल्प हो सकते हैं

हो सकता है कि बचे हुए वैगनर्स जो कथित तौर पर बगावत का हिस्सा रहे, उन्हें ज्यादा से ज्यादा अशांत देशों में भेज दिया जाए. जैसे यूक्रेन बॉर्डर पर चल रहे युद्ध में, या फिर नाइजर में. युद्ध के दौरान अगर वैगनर मारे जाएं तो भी पुतिन को खास नुकसान नहीं होगा, और अगर वे जीत जाएं तो भी पुतिन की ही जमीन मजबूत होगी. दोनों ही तरह से विन-विन सिचुएशन रहेगी. 

एक स्थिति और भी हो सकती है

हो सकता है कि लीडर की मौत से डरे वैगनर्स आपस में ही लड़ने लगें. इसके ग्रुप कई टुकड़ों में टूट जाएगा. कयास लगाए जा रहे हैं कि इसके कुछ लोग रशियन प्राइवेट मिलिट्री कंपनी (PMC) का हिस्सा बन सकते हैं. PMC के बारे में बता दें कि इसे रूसी कानून वैध नहीं मानता. ये भी वैगनर समूह की तरह ही प्राइवेट सैनिक हैं जो कथित तौर पर देशहित में काम करते हैं, लेकिन वैगनर्स जितने लोकप्रिय नहीं. 

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किसी भी देश के पास इतनी ताकतवर प्राइवेट आर्मी नहीं

ये तो तय है कि वैगनर जितनी मजबूत प्राइवेट सेना फिलहाल किसी भी देश के पास नहीं. ये संगठन रूस की अपनी उपज है. दूसरे वर्ल्ड वॉर के बाद अमेरिका और बाकी पूंजीवादियों देशों से छिटकने के बाद रूस अकेला पड़ चुका था. कई देश चाहकर भी उससे जुड़ नहीं पा रहे थे. ऐसे में उसने सेना से इतर कई सारी प्राइवेट आर्मीज खड़ी करनी शुरू कीं.

सरकार मदद के लगते रहे कयास

कहा ये जाता था कि इसमें रूस की सरकार का कोई हाथ नहीं, लेकिन अक्सर इसपर बात होती रही कि तब कहां से उनके पास मॉडर्न हथियार और बाकी चीजें आ रही हैं. कोई भी स्वप्रेरणा से लड़ने के लिए क्यों जाएगा, जब तक कि खुद सरकार उसमें मदद न कर रही हो. बात काफी हद तक सही भी लगती है क्योंकि वैगनर चीफ समेत कई प्राइवेट सेनाओं के लीडर क्रेमलिन के करीबी रहे. ऐसे में ये भी हो सकता है कि वैगनर ग्रुप की री-ब्राडिंग हो जाए ताकि पुतिन की छवि भी सही रहे और काम भी चलता रहे. 

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