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क्या 'प्यारीमोहन' की राह चल रहे पांडियन! जानें- ओडिशा के 'चाणक्य' को नवीन पटनायक ने क्यों किया था BJD से बेदखल

ओडिशा की सियासत में कुछ महीनों से एक नया नाम चर्चा में बना हुआ है और वो है वीके पांडियन का. आईएएस से वॉलेटिंयरी रिटायरमेंट के बाद एक्टिव पॉलिटिक्स में आए पांडियन को मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जा रहा है. ऐसे में समझते हैं पांडियन कैसे पटनायक के खास बने? और कौन थे वो पूर्व आईएएस जो कभी पटनायक के खास हुआ करते थे, लेकिन बाद में उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया.

वीके पांडियन. वीके पांडियन.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2024,
  • अपडेटेड 10:55 AM IST

कुछ महीनों पहले तक ओडिशा में वीके पांडियन एक आईएएस अफसर हुआ करते थे. लेकिन अब सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल (बीजेडी) के बड़े नेता हैं. उन्हें मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का सबसे भरोसेमंद भी माना जाता है. पांडियन के ही सीएम पटनायक के उत्तराधिकारी होने की चर्चाएं भी अक्सर होती रहती हैं.

इन सबके बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पटनायक भाषण दे रहे हैं और उनके बगल में पांडियन खड़े हैं. इसी दौरान कथित तौर पर पटनायक का हाथ कांप रहा है, जिसे पांडियन छिपाते दिख रहे हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद बीजेपी हमलावर हो गई है और पांडियन पर पटनायक की सत्ता हथियाने का आरोप लगा रही है.

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बीजेपी नेता और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दावा किया कि पांडियन मुख्यमंत्री पटनायक को कंट्रोल कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मैं ये कल्पना करके कांप उठता हूं कि तमिलनाडु का एक रिटायर्ड अफसर ओडिशा के भविष्य को किस स्तर तक कंट्रोल कर रहा है.'

कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली में कहा था, 'कुछ मुट्ठी भर भ्रष्ट लोगों ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के घर और दफ्तर पर कब्जा कर लिया है.' गृहमंत्री अमित शाह ने भी एक रैली में कहा था, 'नवीन बाबू की तबियत सही नहीं है. वो सरकार नहीं चला रहे हैं, बल्कि तमिल बाबू इसे चला रहे हैं.'

इन सबके बीच वीके पांडियन ने दावा किया कि 9 जून को 'भूमिपुत्र' शपथ लेने वाले हैं. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि 9 जून को भूमिपुत्र सत्ता संभालेंगे. वो शख्स जो न सिर्फ उड़िया बोलता है, बल्कि ओडिसा के लोगों के दिलों में भी बसा है. वो मुख्यमंत्री बनेगा. 9 जून को 11.30 से 1 बजे के बीच भूमिपुत्र मुख्यमंत्री पद संभालेंगे.' पांडियन का इशारा सीएम नवीन पटनायक की तरफ था. 

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पांडियन कैसे बने पटनायक के खासमखास?

2000 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अफसर वी. कार्तिकेयन पांडियन ने पिछले साल वीआरएस ले लिया था. इसके अगले ही दिन उन्हें मॉडर्न ओडिशा एंड ट्रांसफोर्मेशनल इनिशिएटिव यानी 5T का चेयरमैन बनाया गया. ये पद कैबिनेट मंत्री के स्तर का है.

इससे पहले वीके पांडियन 12 साल तक मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पर्सनल सेक्रेटरी रहे थे. पिछले साल 27 नवंबर वो बीजेडी में शामिल हो गए थे. वीके पांडियन की गिनती ओडिशा के सबसे शक्तिशाली लोगों में होती है.

साल 2000 में आईएएस बनने के बाद उनकी पहली नियुक्ति कालाहांडी जिले में हुई. यहां वो धरमगढ़ के डिप्टी कलेक्टर नियुक्त हुए. इसके बाद उनकी पोस्टिंग 2005 से 2007 तक मयूरभंज और 2007 से 2011 तक गंजाम जिले में रही.

पांडियन जब गंजाम जिले के कलेक्टर थे, तब उन्होंने यहां मनरेगा लागू करवाया. उन्होंने मजदूरों की मजदूरी सीधे उनके खाते में भेजने की व्यवस्था भी शुरू की. सीएम नवीन पटनायक की हिंचली विधानसभा सीट भी गंजाम में ही पड़ती है.

उनके काम पर पटनायक का ध्यान गया और उन्होंने उन्हें अपना पीएस बना लिया. उनकी देखरेख में ओडिशा में कई योजनाओं और परियोजनाओं को शुरू किया गया. ओडिशा का कायाकल्प करने के लिए 2018 में 5T प्रोग्राम शुरू किया गया. 5T यानी टीम वर्क, टेक्नोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइम.

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इस प्रोग्राम के जरिए ओडिशा के सभी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल में बदला गया. बुजुर्गों को हर महीने एक हजार रुपये की पेंशन देने की व्यवस्था की गई. युवाओं को हर साल 10 हजार रुपये की स्कॉलरशिप दी जाती है. महिलाओं को 0% ब्याज पर 5 लाख रुपये तक का लोन मिलता है. 

सीएम सेक्रेटरिएट में रहने के दौरान ओडिशा सरकार में उनका प्रभाव काफी तेजी से बढ़ा. वो जल्द ही सीएम पटनायक के भरोसेमंद बन गए. 

नवीन पटनायक के उत्तराधिकारी होंगे पांडियन?

5 मार्च 2000 को नवीन पटनायक पहली बार ओडिशा के मुख्यमंत्री बने थे. तब से लगातार मुख्यमंत्री हैं. ओडिशा में लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं. अगर इस बार भी ओडिशा में बीजेडी की सरकार बनती है तो नवीन पटनायक छठी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

हालांकि, नवीन पटनायक अब 77 साल के हो गए हैं. बढ़ती उम्र के कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी होने लगी हैं. उनकी शादी नहीं हुई है और बीजेडी में कोई भी नेता उनके जितना ताकतवर नहीं है. 

इसलिए सवाल उठ रहा है कि पटनायक के बाद कौन? ज्यादातर लोग पांडियन को ही नवीन पटनायक का उत्तराधिकारी मान रहे हैं. ऐसी भी चर्चाएं हैं कि पांडियन को इसके लिए तैयार भी किया जा रहा है. 

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दो साल पहले जून में उन्होंने राज्य के सभी जिलों का दौरा किया था. कहा जाता है कि इस दौरान उन्हें एक मंत्री से भी ज्यादा सम्मान दिया गया. जगह-जगह लोगों ने उनके पैर छुए, मालाएं पहनाई गईं. 

पिछले साल वॉलेंटियर रिटायरमेंट लेने के एक महीने बाद जैसे ही पांडियन आधिकारिक रूप से बीजेडी में शामिल हुए, तब से ही उन्हें नवीन पटनायक के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है.

वीके पांडियन सीएम पटनायक के सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं. (फाइल फोटो-PTI)

प्यारीमोहन मोहपात्रा जैसा तो नहीं होगा हाल?

वीके पांडियन का जन्म 1974 में तमिलनाडु के मदुरै के पास कूथप्पनपट्टी में हुआ था. पास के ही सरकारी स्कूल से उन्होंने पढ़ाई की. बाद में मदुरै जिले के कृषि महाविद्यालय से ग्रेजुएशन और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से पोस्ट ग्रेजुएशन किया.

साल 2000 में आईएएस बने और उसके बाद ओडिशा कैडर की ही आईएएस सुजाता राउत से शादी की. पांडियन की चर्चा उस समय खूब हुई जब उन्होंने ओडिशा के सभी 30 जिलों का दौरा किया. इस दौरान वो हेलिकॉप्टर से हर जिले में जा-जाकर राज्य सरकार की परियोजनाओं से जुड़ी जानकारियां लीं.

हालांकि, जानकार मानते हैं कि पांडियन के नजरों में आने की वजह नवीन पटनायक की काम करने की स्टाइल है. दरअसल, नवीन पटनायक नौकरशाहों पर एक तरह से निर्भर रहे हैं. 

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एक समय था जब आईएएस से नेता बने प्यारीमोहन मोहपात्रा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के खास बन गए थे. प्यारीमोहन मोहपात्रा लंबे समय से बीजू जनता दल से जुड़े हुए थे. जब वो आईएएस थे, तब वो तत्कालीन सीएम बीजू पटनायक के पीएस हुआ करते थे. इसके बाद जब नवीन पटनायक मुख्यमंत्री बने तो मोहपात्रा उनके राजनीतिक सलाहकार बन गए.

एक ऐसा दौर आया जब ओडिशा का पावर सेंटर प्यारीमोहन मोहपात्रा को ही समझा जाने लगा था. बीजेडी ने उन्हें राज्यसभा भी भेजा. उन्हें ओडिशा की सियासत का चाणक्य भी कहा जाता था. लेकिन बाद में पटनायक से उनके रिश्ते बिगड़ने लगे.

बीजेडी ने पार्टी से निकाला

2012 में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक लंदन दौरे पर गए थे. उस समय प्यारीमोहन मोहपात्रा बीजेडी में एक तरह से दूसरे नंबर पर थे. माना जाता है कि पटनायक के लंदन जाने के बाद मोहपात्रा ने उनका तख्तापलट करने की कोशिश की थी. उन्होंने बीजेडी के कई विधायकों के साथ मिलकर नवीन पटनायक को पद से हटाने की साजिश रची.

हालांकि, तब भी मोहपात्रा इतने बड़े नेता नहीं बन सके थे कि पटनायक को सत्ता से हटा दें. पार्टी को जब इस बारे में पता चला तो उन्हें निलंबित कर दिया. बाद में मोहपात्रा ने न सिर्फ बीजेडी छोड़ी, बल्कि राज्यसभा सांसद के पद से भी इस्तीफा दे दिया.

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बीजेडी से अलग होने के बाद मोहपात्रा ने ओडिशा जन मोर्चा नाम से अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाई. 2014 के विधानसभा चुनाव में ओडिशा जन मोर्चा ने नवीन पटनायक की बीजेडी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन कुछ कमाल नहीं कर सकी. 

19 मार्च 2017 को मोहपात्रा का निधन हो गया. उनके बाद उनकी बेटी सिकता पाटी ने पार्टी की कमान संभाली. बाद में सिकता पाटी बीजेडी में शामिल हो गईं. पिछले साल ही उन्होंने कांग्रेस ज्वॉइन की है.

वीके पांडियन. (फाइल फोटो-PTI)

पांडियन का भविष्य क्या?

बीजेपी समेत विपक्षी पार्टियां पांडियन पर इसलिए सवाल उठाती हैं, क्योंकि वो ओडिशा के नहीं है. विपक्षी पार्टियां आरोप लगाती हैं कि असली सीएम तो पांडियन हैं. नवीन पटनायक तो सिर्फ मुखौटा हैं. 

पहले माना जा रहा था कि पांडियन विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. हालांकि, उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला लिया. लेकिन उनकी ही पार्टी के कई विधायक और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर गंजाम जिले की किसी भी सीट से पांडियन चुनाव लड़ते हैं तो वो जीत जाएंगे, क्योंकि उनकी लोकप्रियता भी नवीन पटनायक के बराबर नहीं, तो उनसे कम भी नहीं है.

दूसरी ओर, नवीन पटनायक का कहना है कि उनका उत्तराधिकारी जनता तय करेगी. लेकिन जिस तरह से पांडियन को जनता का समर्थन मिला है और मिल रहा है, उससे लगता है कि नवीन पटनायक ने उनकी सियासी जमीन तैयार कर दी है. अब ये तो वक्त ही बताएगा कि नवीन पटनायक खुद पांडियन को या फिर किसी और को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हैं या नहीं?

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