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क्यों सीरिया की राजधानी को रहने के लिए दुनिया का सबसे खराब शहर माना जाता है, एक दशक की लड़ाई ने यहां क्या बदल डाला?

दमिश्क रहने के लिहाज से दुनिया का सबसे खराब शहर है. बीते एक दशक से सीरिया की राजधानी लगातार इसी पॉजिशन पर है. ये बात ग्लोबल लिवेबलिटी इंडेक्स का है, जो बताता है कि दुनिया के कौन शहर में रहना सबसे शानदार अनुभव हो सकता है, और कहां रहना सबसे ज्यादा अखरेगा. इसी में दमिश्क का नाम नीचे से टॉप पर है.

साल 2011 से शुरू हुई अस्थिरता सीरिया में अब भी बनी है. सांकेतिक फोटो (Reuters) साल 2011 से शुरू हुई अस्थिरता सीरिया में अब भी बनी है. सांकेतिक फोटो (Reuters)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 8:24 AM IST

ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2023 ने कुछ समय पहले एक लिस्ट निकाली, जिसके मुताबिक ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना रहने के लिए दुनिया का सबसे बढ़िया शहर है. इसके बाद डेनिश कैपिटल कोपेनहेगन का नाम है. इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट हर साल ऐसे शहरों का जिक्र करता है, जहां रहना अलग-अलग तजुर्बे देता है.

173 शहरों की लिस्ट में दमिश्क का भी नाम है. ये सीरियाई शहर बीते 10 सालों से लिस्ट में बना हुआ है, लेकिन तमाम खराब वजहों से. इंडेक्स की मानें तो यहां रहने वाले लोग लगातार नरक झेल रहे हैं. लगभग 21 लाख लोग देश की राजधानी में हैं. ये वो लोग हैं, जो गरीबी या संपर्कों की कमी के चलते दूसरे देशों में शरण नहीं ले सके. 

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दमिश्क की बदहाली में सीरियाई क्रांति का बड़ा हाथ रहा, जो वैसे तो देश की तरक्की के लिए हुई थी, लेकिन जिसने सबकुछ तहस-नहस कर दिया. साल 2011 में देश में महंगाई, बेरोजगारी काफी बढ़ चुकी थी. उस समय वहां के राष्ट्रपति बशर अल-असद थे. उनके खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे हिंसक हो गया. असद ने बागियों को कुचलने के लिए सेना का सहारा लिया. इस तरह से सरकार और जनता एक-दूसरे का खून बहाने लगे. 

राष्ट्रपति बशर अल-असद. फोटो (AFP)

ये सीरिया की अस्थिरता का दौर था, जो चरमपंथी ताकतों के लिए फलने-फूलने का मौका था. जिहादी ग्रुप आए इस्लामिक स्टेट के तौर पर दमिश्क से लेकर पूरे देश में फैल गए. कथित तौर पर इसे कुचलने के लिए अमेरिका ने अपनी सेना भेजी. हवाई हमले होने लगे जो मिलिटेंट के इलाकों तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि चारों तरफ गोलबारी हो रही थी. सीरियाई राष्ट्रपति के मददगार के तौर पर रूस की सेना भी वहां थी. वो भी सरकार की सहायता के नाम पर आम लोगों में तबाही मचाने लगी. कुल मिलाकर शांति के नाम पर जो अफरातफरी मची, वो अब तक कायम है. 

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साल 2022 में यूनाइटेड नेशन्स ह्यूमन राइट्स ऑफिस का डेटा कहता है कि 10 सालों के भीतर 3 लाख से ज्यादा सिविलियन मारे गए. वहीं अलग-अलग थिंक टैंक दावा करते हैं कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा होगी. सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक मार्च 2023 तक 5 लाख से ज्यादा आम नागरिक हवाई हमलों या बंदूकों से मारे गए. इसका यह भी कहना है कि सीरिया के संघर्ष में करीब 21 लाख लोग स्थाई तौर पर अपंग हो चुके.

देश की आधी से ज्यादा आबादी शरणार्थियों की तरह यूरोप या दूसरे देशों में शरण लिए हुए है, जहां वे दूसरे दर्जे के नागरिक बने हुए हैं. वहीं जो लोग देश में बाकी हैं, उनकी स्थिति भी कहीं अच्छी नहीं. 

सीरियाई नागरिक अपने ही यहां शिविरों में रहने को मजबूर हैं. सांकेतिक फोटो (Unsplash)

सीरियाई राजधानी दमिश्क के हालात देश से अलग नहीं, बल्कि बदतर ही हैं. दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक ये शहर किसी समय पर अपने कल्चर और खानपान के लिए जाना जाता था. लेकिन गृह युद्ध और रूस-अमेरिका के प्रॉक्सी युद्ध ने सब बदल दिया. अब बीते 10 सालों से इंडेक्स में ये जगह सबसे खतरनाक और बदतर हालातों वाली कहला रही है. 

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इकनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट हर साल दो बार वर्ल्डवाइड कॉस्ट ऑफ लिविंग नाम से रिपोर्ट निकालता है. इसमें दमिश्क को सबसे सस्ती राजधानी माना गया, जहां रहना-खाना और पढ़ाई भी सस्ती है, लेकिन लोगों के पास स्थाई नौकरियां ही नहीं. औसत सैलरी 70 हजार सीरियाई पाउंड है, यानी 20 डॉलर प्रति महीना. ऐसे में शहर बाहरी लोगों के लिए भले ही सस्ता हो चुका, लेकिन देश में रहते लोगों के लिए वो जरूरत से ज्यादा महंगा है. 

इमरजेंसी के चलते दुकानें, स्कूल और ट्रांसपोर्ट जब-तब बंद होते रहते हैं. यूएन का कहना है कि वहां की लगभग 90 फीसदी आबादी गरीबी में जी रही है. युद्ध का सेंटर राका और दमिश्क रहे. ऐसे में हवाई हमलों की वजह से एक तिहाई स्कूलों की इमारतें तोड़ी जा चुकीं. अब बच्चे तो हैं, लेकिन सरकार के पास न तो इंफ्रा के लिए पैसे हैं, न ही पेरेंट्स के पास बच्चों को पढ़ाने की हिम्मत. 

राजधानी में न तो नौकरियां हैं, न ही सरकारी पुर्नवास के पक्के इंतजाम. सांकेतिक फोटो (Reuters)

हर साल सर्दियों में स्थिति और बिगड़ जाती है. लोगों के पास घरों को गर्म रखने के लिए बिजली या तेल कुछ भी नहीं जुट पाता. 

सीरियन आब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार दमिश्क आखिरी ठिकाना था, जिसे इस्लामिक स्टेट ने छोड़ा. इसके बाद इस जगह के हाल वही हो गए, जो लंबी बीमारी के बाद शरीर का होता है. यहां अब भी वो विदेशी बाकी हैं, जो इस्लामिक स्टेट का हिस्सा बनने के लिए अपने देशों से भागकर आए थे. दमिश्क को उनकी भी जिम्मेदारी निभानी है. साथ ही भारी संख्या में शिविरों में रिफ्यूजी रह रहे हैं. वे स्थानीय लोगों पर, और स्थानीय लोग उनपर भरोसा नहीं करते. ऐसे में दमिश्क समेत पूरा का पूरा टाइम बम पर बैठा हुआ है. कभी भी तनाव और बढ़ सकता है.

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