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अमेरिका-यूरोप में एक घंटा पीछे हो जाएगा समय! साल में दो बार क्यों बदलता है वक्त

अमेरिका और यूरोप के कई देशों में समय को एक घंटा पीछे कर दिया जाएगा. अमेरिका में 5 नवंबर की रात 2 बजे ऐसा होगा. इन देशों में साल में दो बार घड़ी की सुइयों को एक घंटा आगे-पीछे किया जाता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है? समझिए...

अमेरिका समेत कई देशों में घड़ी की सुइयां एक घंटा पीछे होने वाली हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर) अमेरिका समेत कई देशों में घड़ी की सुइयां एक घंटा पीछे होने वाली हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 3:42 PM IST

दुनिया के कई देशों में घड़ी की सुइयां एक घंटा पीछे होने वाली हैं. यानी, समय एक घंटा पीछे हो जाएगा. ऐसा अमेरिका, कनाडा, क्यूबा समेत यूरोप के कई देशों में होगा. 

इन देशों में पांच नवंबर को घड़ियां एक घंटा पीछे हो जाएंगी. ऐसा डेलाइट सेविंग टाइम के लिए किया जाएगा. इन देशों में साल में दो बार घड़ी की सुइयों को आगे-पीछे किया जाता है. 

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ये डेलाइट सेविंग टाइम क्या है?

डेलाइट सेविंग टाइम को सबसे पहली बार बेंजामिन फ्रेंकलिन ने साल 1784 में इंट्रोड्यूस किया था. हालांकि, इसका मौजूदा कॉन्सेप्ट न्यूजीलैंड के कीटविज्ञानी जॉर्ज हडसन ने दिया था. 

जॉर्ज हडसन ने 1895 में समय को दो घंटे आगे-पीछे करने का प्रस्ताव रखा था. इसका मकसद था कि वो गर्मियों के दिनों में कुछ समय धूप में भी बिता सकें.

पहले विश्व युद्ध के दौरान भी डेलाइट सेविंग टाइम का कॉन्सेप्ट अपनाया गया था. ऐसा इसलिए ताकि लोग बाहर ज्यादा से ज्यादा समय रहें और इससे एनर्जी की बचत हो.

शुरुआत में डेलाइट सेविंग सिर्फ गर्मियों के दिनों में ही होती थी. लेकिन बाद में इसे सर्दियों के दिनों में भी किया जाने लगा. गर्मी के दिनों में समय एक घंटा बढ़ा दिया जाता है और गर्मियों में एक घंटा पीछे कर दिया जाता है. 

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कब सेट किया जाता है टाइम?

डेलाइट सेविंग टाइम एक प्रथा है, जिसमें गर्मियों के महीनों में घड़ी की सुइयां एक घंटा आगे बढ़ा दी जाती है, ताकि शाम के समय ज्यादा लंबे समय तक दिन का उजाला रहे.

अमेरिका में डेलाइट सेविंग टाइम 5 नवंबर की रात 2 बजे खत्म हो रहा है. उस वक्त घड़ी को एक घंटा पीछे कर दिया जाएगा. यूके और बाकी यूरोपीय देशों में ये 29 अक्टूबर को खत्म हो चुका है.

अमेरिका में डेलाइट सेविंग टाइम हमेशा मार्च के दूसरे रविवार से शुरू होता है और नवंबर के पहले रविवार को खत्म होता है. वहीं, यूके और यूरोपीय देशों में मार्च के आखिरी रविवार से अक्टूबर के आखिरी रविवार तक रहता है.

इसे ऐसे समझिए कि मार्च में घड़ी की सुइयों को एक घंटा आगे बढ़ा दिया जाता है और अक्टूबर-नवंबर में एक घंटा पीछे कर दिया जाता है.

इसे लेकर कई विवाद भी!

अमेरिका में 1966 में कानून लाया गया था. इसके बाद ही साल में दो बार घड़ी को एक घंटा आगे-पीछे किया जाता है. 

ऐसा करने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इससे किसानों को फायदा होगा. हालांकि, किसान खुद इसका विरोध करते हैं, क्योंकि इससे उनका शेड्यूल बिगड़ जाता है.

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अमेरिका के कई सारे राज्यों में भी डेलाइट सेविंग टाइम का पालन नहीं किया जाता है. जापान ने 2020 के ओलंपिक के समय ऐसा करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन विरोध के कारण इसे लागू नहीं किया गया.

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