
पेरिस ओलंपिक से भारत के लिए बहुत बुरी खबर आई. फाइनल मुकाबले से कुछ घंटों पहले भारतीय रेसलर विनेश फोगाट को डिसक्वालिफाई कर दिया गया. इसका मतलब हुआ कि विनेश फोगाट ओलंपिक से बाहर हो गई हैं. इसके साथ ही 'गोल्ड' जीतने का सपना भी टूट गया. इतना ही नहीं, अगर मैच होता और उसमें विनेश फोगाट हार जातीं, तब भी 'सिल्वर' तो मिलता ही.
विनेश फोगाट महिलाओं के 50 किलो कैटेगरी में फ्री स्टाइल में चुनौती पेश कर रही थीं. बुधवार को विनेश फोगाट ने ओलंपिक में एक के बाद एक तीन मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाई थी. सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने क्यूबा की गुजमान लोपेज को हराया था.
अब विनेश के डिसक्वालिफाई होने के बाद फाइनल में गुजमान लोपेज खेलेंगी. फाइनल मुकाबला गुजमान लोपेज और अमेरिकी रेसलर सारा एन हिल्डरब्रांट के बीच होगा.
फिलहाल, विनेश के डिसक्वालिफिकेशन के खिलाफ अपील करने की तैयारी चल रही है. क्योंकि अब यही आखिरी रास्ता बचा है. अपील इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसी की बदौलत केन्या की खिलाड़ी का डिसक्वालिफिकेशन रद्द हो पाया.
क्या है पूरा मामला?
पांच अगस्त को ओलंपिक में महिलाओं की 5000 मीटर की रेस हुई थी. इस रेस में केन्या की ही रेसर्स ने गोल्ड और सिल्वर जीता था. गोल्ड पर बीट्राइस चेबेट और सिल्वर पर फेथ किपयेगॉन ने कब्जा किया था. जबकि, नीदरलैंड्स की सिफान हसन ने ब्रॉन्ज जीता था. 5000 मीटर की ये रेस बीट्राइस चेबेट ने 14 मिनट 28.56 सेकंड में जीती थी.
हालांकि, इस मुकाबले के बाद फेथ किपयेगॉन को डिसक्वालिफाई कर दिया गया था. ओलंपिक कमेटी ने बताया था कि वीडियो फुटेज से पता चलता है कि रेस के दौरान किपयेगॉन ने इथियोपिया की गुडाफ सेगे को टक्कर मारी थी.
दावा किया गया था कि जब दो लैप बाकी थी, तब गुडाफ सेगे ने बढ़त बना ली थी. तभी पीछे से आ रहीं किपयेगॉन उनसे टकरा गईं और आगे निकल गईं. आखिरकार पहले नंबर पर बीट्राइस चेबेट और दूसरे पर किपयेगॉन रहीं. रेस खत्म होने के बाद दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और खुशी मनाई. लेकिन कुछ देर बाद ही किपयेगॉन को डिसक्वालिफाई कर दिया गया.
खुशी, गम और फिर खुशी
रेस में सिल्वर जीतने पर किपयेगॉन की खुशी थोड़ी ही देर में फीकी पड़ गई, क्योंकि मेडल मिलने से पहले ही उन्हें डिसक्वालिफाई कर दिया गया था.
डिसक्वालिफिकेशन के खिलाफ किपयेगॉन ने अपील की. डिसक्वालिफिकेशन पर बीट्राइस चेबेट ने बताया कि इथियोपिया की गुडाफ सेगे, फेथ किपयेगॉन के ट्रैक पर आ गई थीं. इसलिए किपयेगॉन ने सेगे को ये 'धक्का न दें' कहने के लिए हाथ मारा था. इसी दौरान किपयेगॉन का बैलेंस बिगड़ गया और उन्होंने ट्रैक से बाहर निकलने से बचने की कोशिश की.
आखिरकार किपयेगॉन का डिसक्वालिफिकेशन रद्द कर दिया गया. उन्हें सिल्वर मेडल से नवाजा गया.
अब बात विनेश क्यों हुईं डिसक्वालिफाई?
विनेश फोगाट 50 किलो कैटेगरी में कुश्ती करती हैं. गुरुवार सुबह जब उनका वजन लिया गया तो ये कुछ ग्राम ज्यादा पाया गया. कोई भी रेसलर जिस कैटेगरी में खेलता है, उसका वजन उतना या उससे कम होना जरूरी है. अगर एक ग्राम भी वजन ज्यादा होता है तो एथलीट को डिसक्वालिफाई किया जा सकता है.
ओलंपिक के नियमों के मुताबिक, मैच से पहले कुश्ती करने वाले हर पहलवान का वजन चेक होता है. अगर दो दिन बाउट लड़ते हैं तो दोनों दिन मैच से पहले वजन होता है.
कुश्ती की हर कैटेगरी में दो दिन मुकाबले होते हैं. इसलिए जो भी फाइनल में पहुंचते हैं, उनका दो दिन वजन होता है. पहले दिन वेट-इन की प्रक्रिया आधे घंटे तक चलती है. लेकिन दूसरे दिन इसके लिए 15 मिनट ही मिलता है.
क्या विनेश के साथ हो सकता है चमत्कार?
जिस तरह का चमत्कार केन्या की एथलीट फेथ किपयेगॉन के साथ हुआ, क्या उसी तरह का विनेश फोगाट के साथ हो सकता है? फिलहाल इसकी गुंजाइश कम है. किपयेगॉन के मामले में डिसक्वालिफिकेशन कन्फ्यूजन के कारण हुआ था, जबकि विनेश फोगाट को ओवरवेट के कारण डिसक्वालिफाई किया गया है.
हालांकि, भारत इसके खिलाफ अपील कर सकता है. भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष संजय सिंह ने बताया कि फेडरेशन इसका लीगल पक्ष देख रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा से बात कर जानकारी मांगी है. उन्होंने इस मामले में सभी विकल्पों पर विचार करने को कहा है. साथ ही इस मामले को पेरिस ओलंपिक समिति के सामने विरोध दर्ज कराने को भी कहा है.
वहीं, कुश्ती के नियम बनाने वाली संस्था यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) का कहना है कि अब कुछ नहीं किया जा सकता. UWW ने कहा कि नियम तो नियम है, डिसक्वालिफिकेशन पर अब कुछ नहीं किया जा सकता.