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बाबा रामदेव के खिलाफ अवमानना का मामला क्यों बन गया? जानिए क्या है पतंजलि के विज्ञापन से जुड़ा पूरा विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि मामले में सुनवाई करते हुए योग गुरु बाबा रामदेव को दो हफ्तों के भीतर अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है. ये मामला पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापनों से जुड़ा हुआ है. पहले भी कोर्ट ने बाबा रामदेव को अदालत आने को कहा था, लेकिन न तो वे हाजिर हुए, न ही विज्ञापन बंद हुए थे.

योग गुरु बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट ने अदालत में आने कहा है. (Photo- India Today) योग गुरु बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट ने अदालत में आने कहा है. (Photo- India Today)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 12:09 PM IST

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को अदालत में दो हफ्तों के भीतर आने का आदेश दिया है. इससे पहले 27 फरवरी को कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के विज्ञापनों पर रोक लगा दी थी. ये विज्ञापन ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, आर्थराइटिस, अस्थमा और मोटापे जैसी बीमारियों से जुड़े हुए थे. आरोप है कि एड इस तरह के थे, जो मॉडर्न दवाओं को रोककर पतंजलि का इलाज लेने के लिए उकसाते थे. 

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क्या है पूरा मामला

भ्रामक विज्ञापनों को लेकर पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक याचिका जारी की थी, जिसपर एससी सुनवाई कर रही है. अगस्त 2022 में दायर याचिका में एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि पतंजलि ने कोविड के दौरान न केवल वैक्सिनेशन पर निगेटिव बातें कीं, बल्कि मॉडर्न दवाओं के खिलाफ भी मुहिम चलाई.

इस तरह के कई विज्ञापन बने, जो देखने वालों को भ्रमित कर दें. खासकर अपनी दवाओं से कुछ बीमारियों के इलाज का दावा किया. इसी दौरान पतंजलि ने दावा किया था कि उसके प्रोडक्ट्स से कोरोना नहीं होगा, और हो भी तो जल्द ही ठीक हो जाएगा. ये ऐसा क्लेम था, जिसे लेकर डॉक्टर्स काफी नाराज हुए थे.

 

क्या कहा कोर्ट ने

इस तरह के भ्रामक विज्ञापनों और दावों के पीछे कोई आधार न देखते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अगस्त 2022 में कोर्ट में केस कर दिया. मामले की सुनवाई के दौरान नवंबर 2023 में अंतरिम फैसला लेते हुए अदालत ने कंपनी से कहा था कि वो भ्रामक विज्ञापन देना या छापना बंद कर दे. यह भी कहा गया कि वे बाकी दवाओं के असरदार होने या मेडिकल सिस्टम पर भी हल्के-फुल्के बयान देना रोक दें ताकि लोग अपनी जरूरत के मुताबिक इलाज तय कर सकें, न कि किसी के असर में आकर. 

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आदेश का हुआ उल्लंघन

21 नवंबर को ये आदेश आया, लेकिन पतंजलि के विज्ञापनों पर रोक नहीं लगी. यहां तक कि आदेश के एक दिन बाद ही योग गुरु बाबा रामदेव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें डायबिटीज और अस्थमा को ठीक करने का दावा किया गया था. इसके बाद दिसंबर 2023 में कंपनी का एक और विज्ञापन आया, जिसमें बाबा रामदेव और बालकृष्णा की तस्वीरें भी छपी हुई थीं. 

इसे लेकर 27 फरवरी को जज हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने न केवल पतंजलि को फटकार लगाई. बल्कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने पर जवाब देने को कहा था. अब ताजा सुनवाई में  बाबा रामदेव और बालकृष्ण दोनों को अदालत आने और जवाब देने को कहा है, ये वॉर्निंग देते हुए कि हाजिर न होने पर नतीजे भुगतने होंगे. साथ ही साथ कोर्ट ने यह भी जोड़ दिया कि क्यों न अदालत को नजरअंदाज करने पर उनपर कोर्ट की अवमानना का केस चलाया जाए. 

केंद्र पर भी जताई नाराजगी

एससी ने आयुष मंत्रालय पर भी गुस्सा दिखाया कि उसने ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट के तहत पतंजलि के ऐसे विज्ञापनों पर रोक क्यों नहीं लगाई. मंत्रालय की तरफ से जवाब दिया गया कि वो ऐसे विज्ञापनों पर नजर रख रही है. 

क्या है अंतरिम फैसला 

ये स्थाई फैसले से पहले लिया जाता है, जो इस तरह से होता है कि फौरी राहत दे सके. जैसे पतंजलि मामले में विज्ञापनों पर रोक लगाने को कहा गया था जिसमें आयुर्वेदिक दवाओं से किसी बीमारी के इलाज के दावे हों. अंतिम आदेश तब जारी होगा, जब मामले की सुनवाई पूरी हो जाए. इससे पहले बेंच के एक जज अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ये भी कह चुके हैं कि विज्ञापन चलते रहे तो एक-एक ऐसे भ्रामक एड पर एक करोड़ का जुर्माना लग सकता है. हालांकि ये फैसला नहीं है. 

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