क्या कोरोना महामारी की आड़ में मुंबई के कुछ अस्पतालों में मानव अंगों की तस्करी का गोरखधंधा चल रहा है?
सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही सनसनीखेज दावा किया जा रहा है. एक वायरल पोस्ट में कहा जा रहा है कि मुंबई में एक व्यक्ति को जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती करके कोरोना पॉजिटिव बताया गया. बाद में उसकी मौत हो गई तो परिवार वालों को पता चला कि मृत शरीर के कई अंग गायब हैं.
इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि यह दावा गलत है. यह खबर जिस संवाददाता के हवाले से शेयर की जा रही है, उसने खुद स्वीकार किया है कि इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है.
यह दावा फेसबुक से लेकर ट्विटर तक हर जगह छाया हुआ है. एक फेसबुक यूजर ने 20 जुलाई को ये पोस्ट डाली है जिसे खबर लिखे जाने तक तकरीबन 12 हजार लोग शेयर कर चुके हैं.
इस पोस्ट को ट्विटर और फेसबुक अन्य कई यूजर्स ने भी शेयर किया है.
पोस्ट में कहा जा रहा है कि कुछ दिनों पहले मुंबई स्थित गोराई के एक व्यक्ति को हल्का बुखार और सर्दी-खांसी हुई तो वह अपना चेकअप करवाने अस्पताल गया. वहां उसे जबरदस्ती भर्ती कर लिया गया. उसे कोरोना पॉजिटिव बताया गया. फिर अचानक कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई. आनन-फानन में उसके मृत शरीर को जलाने की तैयारी की जाने लगी. जब मृतक के परिवार वालों ने इस पर आपत्ति जताई. तब जाकर उन्हें पता चला कि मृतक के शरीर के कई अंग गायब थे.
पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि डॉक्टर जिन्हें भगवान का रूप माना जाता है, भला ऐसी हरकत कैसे कर सकते हैं. साथ ही, इस मामले की सीबीआई जांच की मांग भी की गई है. पोस्ट के अंत में ‘दिल्ली क्राइम प्रेस’ के पत्रकार ओम शुक्ला का नाम लिखा है.
पोस्ट के साथ कफन में लिपटी लाश की एक दिल दहला देने वाली तस्वीर है, साथ में लाश को जलाने की भी कुछ तस्वीरें हैं.
इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
‘दिल्ली क्राइम प्रेस’ वेबसाइट पर भी यह खबर प्रकाशित की गई है. यहां भी खबर के लेखक के रूप में संवाददाता ओम शुक्ला का नाम लिखा है. वेबसाइट पर प्रकाशित खबर का आर्काइव्ड लिंक यहां देखा जा सकता है.
दावे की पड़ताल
वायरल पोस्ट की कई ऐसी बातें हैं जो संदेह पैदा करती हैं. हमने पाया कि सोशल मीडिया में सभी जगह ‘दिल्ली क्राइम प्रेस’ वेबसाइट की खबर को ही हूबहू शेयर किया गया है. इसमें न तो किसी अस्पताल का नाम है, न ही किसी मरीज का.
यह बात भी हैरान करने वाली है कि इस तरह की कोई खबर मुंबई के किसी अखबार या वेबसाइट में नहीं छपी और दिल्ली की एक वेबसाइट ‘दिल्ली क्राइम प्रेस’ में आ गई. ‘दिल्ली क्राइम प्रेस’ का रजिस्टर्ड ऑफिस दिल्ली के द्वारका में है.
मामले की हकीकत जानने के लिए हमने ‘दिल्ली क्राइम प्रेस’ के संवाददाता ओम शुक्ला से बात की. उन्होंने माना कि यह खबर पूरी तरह से गलत है. उन्होंने बताया कि इस खबर में इस्तेमाल हुई तस्वीरें लखनऊ की हैं. उन्होंने व्हाट्सऐप पर मिली एक जानकारी के आधार पर ही यह खबर अपनी वेबसाइट पर चला दी थी.
वे कहते हैं, “मुझसे गलती यह हुई कि मैंने इस खबर को वेबसाइट पर चलाने से पहले इसकी पुष्टि नहीं की. जब मैंने इसे अपनी वेबसाइट पर चला दिया, तो इस पर अच्छे व्यूज आने लगे. ऐसा पहली और आखिरी बार हुआ है. मैं इस खबर को वेबसाइट से हटा दूंगा.”
हमें ‘नवभारत टाइम्स’ की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें बताया गया है कि हाल ही में उत्तरी मुंबई के गोराई इलाके में मानव अंगों की तस्करी की अफवाह फैली थी. 16 जुलाई को प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, गोराई के मनोरी गांव में अफवाह फैली थी कि जिन लोगों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है, उनकी रिपोर्ट को भी पॉजिटिव बताया जा रहा है. फिर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर जबरन उनका लिवर, किडनी आदि निकाल लिया जा रहा है.
लोग इस अफवाह से इतने आतंकित हो गए थे कि उन्होंने बीएमसी के स्वास्थ्यकर्मियों को ही मानव अंग तस्कर समझ कर उन पर हमला कर दिया था. गोराई पुलिस ने बमुश्किल लोगों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित किया था.
हमने मुंबई पुलिस (नॉर्थ रीजन) के एडिशनल सीपी दिलीप सावंत से इस बारे में बात की. उन्होंने बताया कि गोराई इलाके में कोरोना महामारी के बहाने मानव अंगों की तस्करी से जुड़ा दावा बिल्कुल बेबुनियाद है. गोराई में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है.
कुल मिलाकर यह बात साफ है कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही यह खबर गलत है. महाराष्ट्र के गोराई में कोराना के बहाने मानव अंगों की तस्करी की कोई घटना सामने नहीं आई है.
ये स्टोरी छपने के बाद लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ता वर्षा वर्मा ने ‘दिल्ली क्राइम प्रेस’ वेबसाइट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. वर्षा एक एनजीओ चलाती हैं, जो लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करता है. वायरल पोस्ट में जो तस्वीरें शेयर की जा रही थीं, वे उन्हीं के फेसबुक पेज से ली गई थीं. तस्वीरों में जो लाश दिख रही है, वह एक महिला की थी, जिसकी बीमारी के चलते लखनऊ के एक सरकारी अस्पताल में मौत हो गई थी. चूंकि वह महिला बेसहारा थी, इसलिए वर्षा वर्मा और उनकी संस्था के सहयोगी सदस्यों ने उसका अंतिम संस्कार किया था.