पीली धोती और रुद्राक्ष की माला पहने खून से लथपथ एक शख्स की दो तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं. इन्हें शेयर करते हुए कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि ये विंध्यवासिनी मंदिर, मिर्जापुर के पुरोहित अमित पाण्डेय हैं जिन पर हाल ही में कुछ मुसलमानों ने जानलेवा हमला कर दिया.
एक फेसबुक यूजर ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, “इस बक्त एक बड़ी खबर आ रही हे. बहुत ही दुःख की बात है, मिर्ज़ापुर के विंध्याचल मां के दरबार में पूजा करने वाले अमित पांडेय जी को जिहादियो ने जान से मारने की कोशिश कि.”
इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल तस्वीरों के साथ किया जा रहा दावा सरासर झूठ है. ये घटना न तो हाल-फिलहाल की है और न ही तस्वीरों में दिख रहा शख्स किसी मुसलमान के हमला करने से घायल हुआ था. ये पिछले साल घटी एक घटना की तस्वीरें हैं जब विंध्यवासिनी मंदिर, मिर्जापुर के तीर्थ पुरोहित अमित पाण्डेय का कुछ अन्य पुरोहितों से विवाद हो गया था. अमित के भाई सुमित पाण्डेय ने ‘आजतक’ से बातचीत में कहा कि उनके भाई पर मंदिर के ही कुछ अन्य पुरोहितों ने हमला किया था. वहीं, पुलिस और अन्य पुरोहितों ने हमें बताया कि अमित ने खुद ही अपने-आप को घायल कर लिया था.
क्या है सच्चाई
वायरल तस्वीरों को रिवर्स सर्च करने पर हमने पाया कि इन्हें बहुत सारे लोगों ने जुलाई 2020 में शेयर किया था. ऐसे ही एक ट्विटर पोस्ट पर कमेंट करते हुए यूपी पुलिस ने मिर्जापुर पुलिस को टैग करते हुए कमेंट किया था, ‘कृपया संज्ञान में लेकर आवश्यक कार्यवाही करें.’ इससे ये बात साबित हो जाती है कि ये घटना हाल-फिलहाल की नहीं है.
‘इंडिया न्यूज रिपोर्ट’ नाम के एक यूट्यूब चैनल पर हमें 29 जून, 2020 की एक रिपोर्ट मिली जिसमें वायरल तस्वीरों से मिलती-जुलती एक तस्वीर इस्तेमाल की गई है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ये घटना विंध्यवासिनी मंदिर के गर्भ गृह में हुई थी.
अमित पाण्डेय के भाई ने मुस्लिम एंगल को बताया कोरी अफवाह
विंध्यवासिनी मंदिर के तीर्थ पुरोहित अमित पाण्डेय के भाई सुमित पाण्डेय ने इस बात की पुष्टि की है कि तस्वीर में दिख रहे शख्स उनके भाई अमित पाण्डेय ही हैं. उन्होंने हमें बताया कि ये घटना 28 जून 2020 की है. वो कहते हैं, “उस दिन रात के करीब सवा नौ बजे भाई साहब (अमित) पूजा करने जा रहे थे. अचानक मंदिर के ही कुछ पुरोहितों ने उन पर हमला कर दिया. इस मामले को लेकर एफआईआर भी दर्ज करवाई गई थी.” हमलावरों के मुसलमान होने की बात को सुमित ने सिर्फ एक अफवाह बताया.
क्या कहना है पुलिस का
मिर्जापुर एएसपी सिटी संजय कुमार ने भी मुस्लिमों के अमित पाण्डेय पर हमला करने की बात को सरासर झूठ बताया है. ‘आजतक’ से बातचीत में उन्होंने कहा, “अमित पाण्डेय के खिलाफ अलग-अलग मामलों में तकरीबन 18 एफआईआर दर्ज हैं. वो पुलिस पर भी हमला कर चुके हैं. उनकी एक और आदत है- कई बार वो खुद ही अपने-आप को घायल कर लेते हैं. वायरल तस्वीर वाले मामले में भी यही हुआ था. हम लोग उनसे काफी परेशान हो गए थे. फिलहाल उन्हें गुंडा एक्ट के तहत छह महीने के लिए जिला बदर किया गया है.”
क्या बोले मंदिर के दूसरे पुरोहित
हमने विंध्यवासिनी मंदिर के दो पुरोहितों को भी वायरल तस्वीर भेजी. तीर्थ पुरोहित सत्यम द्विवेदी ने हमें बताया कि ये पिछले साल हुई एक घटना की तस्वीरें हैं जब अमित पाण्डेय का मंदिर के ही कुछ अन्य पुरोहितों से विवाद हुआ था. बकौल सत्यम, इस घटना में अमित ने खुद ही अपने-आप को जख्मी कर लिया था.
मंदिर के एक अन्य पुरोहित ने हमें नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ये विवाद इसलिए हुआ था क्योंकि अमित कोविड प्रोटोकॉल तोड़कर पूजा करना चाहते थे. वो कहते हैं, “पिछले साल कोविड प्रोटोकॉल के तहत ये नियम लागू किया गया था कि मंदिर के पुरोहित माता के दर्शन तो कर सकते हैं, पर पूजा नहीं कर सकते. लेकिन, अमित पाण्डेय जी ने पूजा करने की जिद पकड़ ली. शीर्ष पुरोहितों ने उन्हें ऐसा करने से रोका और उनकी पूजा की थाली हटा दी. इस पर उन्होंने खुद ही ब्लेड से अपने-आप को जख्मी कर लिया. इसके बाद उन्होंने थाने जाकर पूजा करने से रोकने वालों के खिलाफ शिकायत की. उनका आरोप था कि पुरोहितों ने उन्हें पीटा है. ये घटना मंदिर के गर्भगृह में हुई थी जहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है.”
कई विवादों से जुड़ चुका है अमित पाण्डेय का नाम
मारपीट और झगड़े की कई घटनाओं में विंध्यवासिनी मंदिर के पुरोहित अमित पाण्डेय का नाम आ चुका है. करीब तीन महीने पहले श्रद्धालुओं को दर्शन कराने को लेकर विंध्यवासिनी मंदिर के दो पंडा गुट आपस में भिड़ गए थे. इस मामले में अमित पाण्डेय को एक दूसरे गुट के लोगों ने काफी पीटा था इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था.
एक अन्य घटना में अपने परिचितों को पहले दर्शन करवाने को लेकर अमित पाण्डेय को पुलिस ने पीटा था. 21 जून 2021 को छपी ‘हिंदुस्तान’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना में अमित को पीटने वाले तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था.
इसी तरह बीते साल अगस्त में अमित पाण्डेय का मंदिर के ही कुछ अन्य पुरोहितों से विवाद हो गया था. बात बढ़़ने पर वहां पुलिस भी आई थी. ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना में अमित पाण्डेय ने कुछ पुलिसवालों पर जलते हुए दीये फेंक दिए थे. बाद में घायल पुलिस वालों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अमित पाण्डेय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी.
यहां ये बात साबित हो जाती है कि विंध्यवासिनी मंदिर, मिर्जापुर के पुरोहित अमित पाण्डेय को मुसलमानों ने नहीं पीटा है. खून से लथपथ उनकी तस्वीर करीब एक साल पुरानी है जब उनका मंदिर के ही अन्य पुरोहितों से विवाद हुआ था.
(सुरेश कुमार सिंह के इनपुट के साथ)