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फैक्ट चेक: गोद में बच्चा लिए शख्स पर कानपुर पुलिस के लाठीचार्ज का ये वीडियो लोकसभा चुनाव का नहीं, ढाई साल  पुराना है

लोकसभा चुनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें गोद में बच्चा लिए एक आदमी पर पुलिस लाठियां भांजती दिख रही है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस वीडियो को लेकर आजतक की टीम ने फैक्ट चेक किया है.

आजतक फैक्ट चेक

दावा
कानपुर में लोकसभा चुनाव के बीच गोद में बच्चा पकड़े एक शख्स पर पुलिसकर्मियों ने लठियां चला दीं. 
सच्चाई
पुलिस लाठीचार्ज का ये वीडियो न तो हालिया है, और न ही इसका लोकसभा चुनाव से कोई लेना-देना है. ये वीडियो साल 2021 में कानपुर देहात के एक अस्पताल के बाहर प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिस एक्शन का है. 
संजना सक्सेना
  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2024,
  • अपडेटेड 6:57 PM IST

लोकसभा चुनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें गोद में बच्चा लिए एक आदमी पर पुलिस लाठियां भांजती दिख रही है. वीडियो को यूपी के कानपुर में हुई हाल फिलहाल की घटना का बताया जा रहा है. 

वीडियो में किसी इमारत के सामने गोद में बच्चा लिए एक शख्स पर पुलिस लाठियां बरसा रही है. ये आदमी बार-बार बोल रहा है कि बच्चे को चोट लग जाएगी, लेकिन पुलिसकर्मी उसकी एक नहीं सुन रहे. रोते-बिलखते इस बच्चे को पुलिस वाले छीनने की भी कोशिश करते हैं. लेकिन ये शख्स जैसे-तैसे बच्चे के साथ वहां से भाग निकलता है. 

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बता दें कि लोकसभा चुनाव में चौथे चरण के लिए 13 मई को वोटिंग हुई थी, जिसमें कानपुर समेत उत्तर प्रदेश की 13 सीटों पर मतदान हुआ. ऐसे में सामने आए पुलिस बर्बरता के इस वीडियो को लेकर लोग प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं और कार्रवाई  की मांग कर रहे हैं.

वीडियो को फेसबुक पर शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “#कानपुर: साहेब बच्चे को लग जाएगी, बच्चे को लग जाएगी साहब. पुलिस की मार खाता ये व्यक्ति चीखता रहा लेकिन खाकी के नशे में चूर इन पुलिस वालों ने एक ना सुनी. अगर बच्चे को कुछ हों जाता तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता. #loksabhachunav2024”. 

इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि पुलिस लाठीचार्ज का ये वीडियो न तो हालिया है, और न ही इसका लोकसभा चुनाव से कोई लेना-देना है. ये साल 2021 में कानपुर के एक अस्पताल के बाहर प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिस एक्शन का पुराना वीडियो है. 

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कैसे पता लगाई सच्चाई?

वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी के एक ट्वीट में मिला. यहां इसे 9 दिसंबर 2021 को शेयर किया गया था. इतना तो यहीं साफ हो जाता है कि ये एक पुराना वीडियो है.

इसके जवाब में हमें कानपुर देहात पुलिस का एक ट्वीट मिला, जिसमें इस घटना के बारे में जानकारी दी गई है. ये घटना 9 दिसंबर 2021 को कानपुर देहात के अकबरपुर इलाके में हुई थी. 

पुलिस के मुताबिक, अकबरपुर क्षेत्र के जिला अस्पताल में काम करने वाले चौथी श्रेणी के कर्मचारी रजनीश शुक्ला ने 100-150 लोगों के साथ अस्पताल में अराजकता फैलाई थी. इन लोगों ने अस्पताल का ओपीडी बंद कर, मरीजों और अस्पताल वालों के साथ अभद्रता की थी. इसकी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बल प्रयोग करते हुए उपद्रवियों पर एक्शन लिया.

उस वक्त कानपुर देहात के पुलिस अधीक्षक केशव कुमार चौधरी ने इस घटना के संबंध में 10 दिसंबर 2021 को एक वीडियो जारी किया था. मामले में पुलिस की असंवेदनशीलता को देखते हुए थाना अध्यक्ष विनोद कुमार मिश्रा को निलंबित किया गया था.

हमें इस घटना के बारे में छपी साल 2019 की कई न्यूज रिपोर्ट्स मिलीं. इनके मुताबिक, वीडियो में जिस शख्स पर पुलिस लाठियां बरसा रही है, वो पुनीत शुक्ला है. पुनीत अपने भाई रजनीश शुक्ला के साथ अस्पताल में धरना दे रहा था. 

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दरअसल, अकबरपुर जिला अस्पताल के परिसर में बनाए जा रहे सरकारी मेडिकल कॉलेज के खिलाफ अस्पताल के स्टाफ के कुछ लोग प्रदर्शन कर रहे थे. उनका कहना था कि निमार्ण से उड़ रही मिट्टी उनके अस्पताल में आ रही है जिससे परेशानी हो रही है.  इसके खिलाफ प्रदर्शन करते हुए स्टाफ ने अस्पताल का ओपीडी ठप कर दिया था. 

पुलिस के अनुसार, सूचना मिलने पर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की पर वो नहीं माने. इस दौरान किसी कर्मचारी ने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी का अंगूठा दांतों से काट लिया और पुलिस को कमरे में बंद करने की कोशिश की. इसके चलते पुलिस ने इन लोगों पर लाठीचार्ज किया. 

मामले में 10 दिसंबर 2021 को वार्ड बॉय रजनीश शुक्ला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. साथ ही, वीडियो में लठियां बरसाते दिखे पुलिसकर्मी विनोद कुमार मिश्रा को भी निलंबित कर दिया गया था.

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