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फैक्ट चेक: कई साल पुरानी हैं बत्तखों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये तस्वीरें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर मोर को दाना चुगाते हुए अपना एक वीडियो शेयर किया. इसके बाद बहुत सारे लोग उनकी आलोचना करने लगे कि एक ऐसे दौर में जब लोग महामारी से मर रहे हैं, तब देश के प्रधानमंत्री प्रकृति प्रेम का प्रदर्शन कर रहे हैं.

आजतक फैक्ट चेक

दावा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महामारी और आर्थिक मंदी के दौर में बत्तखों के साथ फोटो खिंचवा रहे हैं.
सच्चाई
बत्तखों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये तस्वीरें काफी पुरानी हैं और 2012-13 से ही इंटरनेट पर मौजूद हैं.
ज्योति द्विवेदी
  • नई दिल्ली,
  • 27 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर मोर को दाना चुगाते हुए अपना एक वीडियो शेयर किया. इसके बाद बहुत सारे लोग उनकी आलोचना करने लगे कि एक ऐसे दौर में जब लोग महामारी से मर रहे हैं, तब देश के प्रधानमंत्री प्रकृति प्रेम का प्रदर्शन कर रहे हैं.

इस वीडियो पर बहस चल ही रही थी कि अचानक कुछ और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी बत्तखों के साथ नजर आ रहे हैं. ऐसी ही एक तस्वीर इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शेयर करते हुए लिखा, “दुनिया पैनडेमिक और आर्थिक मंदी से जूझ रही है और पैनडेमिक से तीसरे सबसे अधिक प्रभावित देश का प्रधानमंत्री अपने लोगों की मदद करने की जगह पीआर वीडियो बना रहा है!”

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इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

‘​जिंगल क्वीन’ के नाम से मशहूर भारतीय गायिका कैरेलिसा मॉन्टेरो ने भी प्रधानमंत्री मोदी की एक फोटो ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, “दो किताबें और अखबार पढ़ने के साथ-साथ लैपटॉप पर काम करते हुए फोटो खिंचाने की यह प्रतिभा कमाल की है! वह भी पैनडेमिक के दौर में...”

इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि प्रधानमंत्री की ये दोनों तस्वीरें कई साल पुरानी हैं और इनका वर्तमान महामारी के दौर से कोई लेना-देना नहीं है.

कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से जो फोटो शेयर की गई है, उस पर यह भी लिखा है कि पैनडेमिक और आर्थिक बदहाली से निपटने की मोदी सरकार की गलत नीतियों के चलते राज्यों को 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा.

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खबर लिखे जाने तक इस पोस्ट को तकरीबन 700 लोग रीट्वीट कर चुके थे. वहीं, कैरेलिसा के पोस्ट को करीब 4300 लोग रीट्वीट कर चुके थे.

दावे की पड़ताल

हमने पाया कि इन दोनों ही पोस्ट्स में कमेंट करने वाले कई लोग इन तस्वीरें के पुराने होने की बात कह रहे हैं. हमने रिवर्स सर्च की मदद से दोनों तस्वीरों की हकीकत पता की.

कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से शेयर तस्वीर की सच्चाई

हमने पाया कि ये तस्वीर साल 2012 में ‘संडे गार्डियन’ अखबार के एडिटोरियल डायरेक्टर एम डी नालापट के ब्लॉग में इस्तेमाल की गई ​थीं. उस वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. इसका सीधा मतलब है कि यह तस्वीर कम से कम आठ साल पुरानी है.

कैरेलिसा ने जो तस्वीर शेयर की है, उससे मिलती-जुलती तस्वीर हमें रेडिफ वेबसाइट पर 2013 में छपे एक लेख में मिली.

इन दोनों तस्वीरों की तुलना करने से साफ पता लगता है कि इनमें लोकेशन, मोदीजी के कपड़े, लैपटॉप, ओबामा ​की तस्वीर वाली किताब, कप जैसी कई चीजें मिलती-जुलती हैं.

एम डी नालापट के ब्लॉग के लेख में भी हमें एक ऐसी तस्वीर मिली, जिसमें नरेंद्र मोदी ओबामा की तस्वीर वाली ठीक वैसी ही किताब पढ़ रहे हैं, जो वायरल पोस्ट में दिख रही है. इससे यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि ये दोनों ही तस्वीरें इंटरनेट पर कई साल पहले से ही मौजूद हैं.  

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