केंद्र सरकार ने 25 फरवरी को सोशल मीडिया, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल कंटेंट को रेग्युलेट करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए. इसी बीच, सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि नए दिशानिर्देशों के अनुसार, तीन महीनों के भीतर सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स को किसी सरकारी आईडी के साथ वेरीफाई यानी सत्यापित कराना होगा.
दिल्ली हाईकोर्ट के वकील प्रशांत पटेल उमराव ने भी सोशल मीडिया पर ऐसा ही दावा किया है. उमराव में 25 फरवरी को अपने वेरीफाइड ट्विटर हैंडल से लिखा है, “सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स को तीन महीने के अंदर मोबाइल फोन के जरिये सरकारी आईडी के साथ वेरीफाई कराना होगा. स्वागतयोग्य कदम. इंटरनेट अब ज्यादा सुरक्षित और जिम्मेदार होगा. यूजर्स के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सरकार ने इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड रूल्स 2021 जारी कर दिया है. #ottguidelines”
इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि ये दावा भ्रामक है. भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों के लिए अपना सोशल मीडिया अकाउंट वेरीफाई कराना अनिवार्य नहीं है. सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स से सिर्फ ये कहा है कि जो यूजर्स अपने अकाउंट स्वेच्छा से वेरीफाई कराना चाहते हैं, उनके लिए उपयुक्त तंत्र मुहैया कराया जाना चाहिए.
ऐसी ही कुछ पोस्ट के आर्काइव यहां, यहां और यहां देखे जा सकते हैं.
AFWA की पड़ताल
हमें ऐसी कोई विश्वसनीय खबर या कोई सरकारी आदेश नहीं मिला, जिसमें भारत में सोशल मीडिया अकाउंट्स का वेरीफिकेशन अनिवार्य करने का जिक्र हो.
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नई डिजिटल मीडिया आचार संहिता की घोषणा की.
भारत के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर रविशंकर प्रसाद का एक वीडियो शेयर किया था जिसमें वे सोशल मीडिया अकाउंट्स के वेरीफिकेशन के बारे में बता रहे हैं. वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा गया है, "जो यूजर्स अपने अकाउंट को स्वेच्छा से वेरीफाई कराना चाहते हैं, उन्हें अपने इसके लिए एक उपयुक्त तंत्र मुहैया कराया जाएगा और उन्हें वेरीफिकेशन का निशान भी प्रदर्शित करने की भी सुविधा दी जाएगी: केंद्रीय मंत्री".
प्रसाद को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में अपनी मर्जी से वेरीफिकेशन का तंत्र होना चाहिए.
हमने डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड को लेकर सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज को भी खंगाला. इसमें भी स्वैच्छिक सत्यापन तंत्र (Voluntary User Verification Mechanism) की बात कही गई है. सरकार के मुताबिक, अकाउंट वेरीफाई कराना अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक होगा.
प्रेस रिलीज में स्पष्ट लिखा है, “जो यूजर्स अपने खातों को स्वेच्छा से वेरीफाई कराना चाहते हैं, उन्हें अपने अकाउंट को वेरीफाई कराने के लिए एक उपयुक्त तंत्र प्रदान किया जाएगा और वेरीफिकेशन को एक निशान के साथ प्रदर्शित करने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी.”
प्रेस रिलीज ये भी कहती है कि नए "नियम राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होंगे" और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इनके प्रकाशन के तीन महीने बाद तक लागू करना होगा.
इसके अलावा, न्यूज18 के साथ एक इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वेरीफिकेशन का स्वैच्छिक तंत्र सरकार द्वारा नहीं, बल्कि सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स द्वारा स्थापित किया जा सकता है.
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के फैक्ट चेक विभाग ने भी स्पष्ट किया है सोशल मीडिया अकाउंट्स का वेरीफिकेशन अनिवार्य नहीं है और वायरल हो रहा दावा भ्रामक है.