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फैक्ट चेक: डेनमार्क में मुसलमानों से नहीं छीना जा रहा है वोटिंग का अधिकार

फ्रांस और तमाम मुस्लिम देशों के बीच मची इस खींचतान के बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि डेनमार्क ने मुसलमानों से वोटिंग का अधिकार छीनने के लिए कानून बना दिया है. जानते हैं क्या है इस दावे की सच्चाई.

आजतक फैक्ट चेक

दावा
डेनमार्क में मुस्लिम समुदाय के वोटिंग देने के अधिकार को खत्म करने वाला कानून पास किया गया.
सच्चाई
डेनमार्क में मुसलमानों से वोटिंग का अधिकार छीनने की बात गलत है. हालांकि, ये सच है कि पिछले साल डेनमार्क में आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों की नागरिकता खत्म करने वाला कानून पास हुआ था.
ज्योति द्विवेदी
  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:30 PM IST

ऑस्ट्रिया और अफगानिस्तान में आतंकी हमलों की घटनाओं के बीच ‘अल कायदा’ संगठन ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को धमकी दी है. मैक्रों ने इ​स्लामिक आतंकवाद को लेकर एक बयान दिया था जिसके बाद दुनिया के कई मुस्लिम देश फ्रांस का विरोध कर रहे हैं.  

फ्रांस और तमाम मुस्लिम देशों के बीच मची इस खींचतान के बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि डेनमार्क ने मुसलमानों से वोटिंग का अधिकार छीनने के लिए कानून बना दिया है.

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सोशल मीडिया में वायरल पोस्ट

इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
 
इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि डेनमार्क में मुसलमानों से वोटिंग का अधिकार छीनने की बात सही नहीं है. लेकिन ये बात सच है कि वहां पर ऐसे लोगों से वोटिंग का अधिकार छीनने का कानून बना है, जिनका संबंध आतंकवादी संगठनों से पाया जाता है.

ट्विटर पर यह दावा काफी वायरल है. फेसबुक पर भी बहुत सारे लोग इसे शेयर कर रहे हैं.

पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, “अब डेनमार्क में अमन चैन बहाल हो जाएगा नो डाउट”. एक अन्य यूजर ने लिखा, “भारत में भी यही होना चाहिए ..... जय श्री राम!”

क्या है सच्चाई

डेनमार्क में वोटिंग का अधिकार छीनने को लेकर हमने वहां के अखबारों और वेबसाइट्स को खंगाला. पता चला कि डेनमार्क में पिछले साल एक ऐसा कानून पास हुआ था जिसमें सीरिया और ईराक जैसे देशों में सक्रिय आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों  की नागरिकता निरस्त करने का प्रावधान है. पहले ऐसा करने के लिए एक कोर्ट ऑर्डर की जरूरत होती थी, लेकिन ये कानून पास होने के बाद ये जरूरत खत्म हो गई. डेनमार्क के अखबार ‘एक्स्ट्रा ब्लाडेट’ ने 24 अक्टूबर 2019 को इस बारे में रिपोर्ट छापी थी. ‘रॉयटर्स’ न्यूज एजेंसी की वेबसाइट में भी इस पर एक खबर छपी थी.

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‘डेनिश पुलिस इंटेलिजेंस सर्विसेज’के आंकड़े बताते हैं कि साल 2012 से लेकर साल 2019 तक तकरीबन 150 लोग डेनमार्क से मध्य पूर्व देशों में आतंकी संगठनों से जुड़ने के लिए गए. रूसी न्यूज एजेंसी ‘स्पु​त्निक’ने इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट छापी थी. रिपोर्ट के अनुसार, आतंकी समूहों से जुड़े जिन लोगों की नागरिकता निरस्त की जाएगी, उन्हें इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए चार हफ्तों की मोहलत दी जाएगी.

डेनमार्क में वोट देने का नियम

डेनमार्क में कोई नागरिक वोट तभी दे सकता है, जब वो कम से कम 18 साल का हो और डेनमार्क, ग्रीनलैंड या फेरो आइलैंड का रहने वाला हो. ये जानकारी thedanishparliament.dk वेबसाइट पर दी गई है. नॉर्डिक देशों (डेनमार्क सहित उत्तरी यूरोप के कुछ अन्य देश) की संस्था नॉर्डिक को-ऑपरेशन ने भी अपनी वेबसाइट में डेनमार्क के वोटिंग से जुड़े नियमों का ब्यौरा दिया है.

मुस्लिम शरणार्थियों के प्रति डेनमार्क का कड़ा रुख

साल 2015 में जहां डेनमार्क ने ईराकी शरणार्थियों के सिर्फ 29 प्रतिशत आवेदन मंजूर किए, वहीं स्वीडेन ने 58 प्रतिशत, नॉर्वे ने 60 प्रतिशत और जर्मनी ने ईराकी शरणार्थियों के 99 प्रतिशत आवेदन स्वीकार किए. यह जानकारी ‘द वॉशिंग्टन पोस्ट’ की एक रिपोर्ट में दी गई है.

यानी यह सच है कि पिछले कुछ सालों में डेनमार्क में मुस्लिम देशों से आने वाले शरणार्थियों के प्रति सख्ती बढ़ी है और बीते साल वहां आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों की नागरिकता निरस्त करने का एक कानून भी बना था. लेकिन वहां मुसलमानों के मतदान का अधिकार खत्म नहीं किया गया है.

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