सोशल मीडिया पर अखबार में छपी एक खबर का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए ये कहा जा रहा है कि बिहार के किशनगंज में हाल ही में एक महिला का बलात्कार किया गया. खबर के मुताबिक, इस घटना में पिता को बंधक बनाकर गांव के ही छह युवकों ने महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया. इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए कुछ लोग इस तरफ इशारा कर रहे हैं कि मामले में आरोपी मुस्लिम हैं, जबकि पीड़िता हिन्दू है.
एक्स और फेसबुक पर इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए लोग 6 मुस्लिम आरोपियों के नाम लिख रहे हैं. साथ ही, बिहार के किशनगंज में हिंदुओं के अल्पसंख्यक होने की बात लिखते हुए विपक्षी पार्टियों के नेताओं और कुछ पत्रकारों पर भी निशाना साध रहे हैं.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये मामला 2019 का है, जिसमें आरोपियों को सजा मिल चुकी है. साथ ही, इस मामले में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है. इसमें पीड़िता और आरोपी- दोनों पक्ष मुस्लिम समुदाय से ही थे.
कैसे पता चली सच्चाई?
हमने देखा कि वायरल खबर के स्क्रीनशॉट में इस घटना को किशनगंज के दिघलबैंक प्रखंड क्षेत्र के कोढोवाड़ी थाना क्षेत्र के एक गांव का बताया गया है. इस जानकारी की मदद से कीवर्ड सर्च करने पर हमें इस घटना से जुड़ी न्यूज रिपोर्ट्स मिल गईं. मगर दिलचस्प बात ये है कि ये रिपोर्ट्स हाल-फिलहाल की नहीं, बल्कि 2019 की थीं.
आजतक की खबर के अनुसार, ये घटना 2019 में 4-5 फरवरी की दरम्यानी रात को घटी थी. खबरों में 19 वर्षीय पीड़िता के पिता के हवाले से बताया गया है कि देर रात को किसी ने पानी मांगने के बहाने से उनका दरवाजा खटखटाया. लेकिन जब पिता ने दरवाजा खोला तो गांव के ही 6 आदमियों ने उन्हें बंधक बना लिया. आरोपी, पिता-पुत्री को घर से करीब आधा किलोमीटर दूर ले गए और पिता के सामने ही पीड़िता के साथ गैंगरेप किया था.
पीड़िता ने 7 फरवरी को कोढोवाड़ी पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज करवाया था. खबरों के अनुसार, इस मामले के आरोपी फैज आलम (21 वर्ष), अब्दुल मन्नान (27 वर्ष), कालू (27 वर्ष), मो. कासिम (35 वर्ष), मो. तकसीर (24 वर्ष) व अंसार (35 वर्ष) थे. किशनगंज पुलिस ने भी एक्स पर इस मामले को पुराना बताया है.
साफ है, ये मामला 6 साल पुराना है. हमने इस घटना के बारे में किशनगंज जिले के दिघलबैंक थाने में संपर्क किया. थाना प्रभारी एसआई सुमेश कुमार ने हमें बताया कि मामले में सभी आरोपियों को सजा हो गई थी और वे अभी जेल में हैं. इसके साथ ही सुमेश ने बताया कि इसमें पीड़िता और आरोपी दोनों ही मुस्लिम समुदाय से थे.
साफ है, 6 साल पुराने गैंगरेप के मामले को अभी का बताकर सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है.