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फैक्ट चेक: किडनैपिंग की असली घटना का नहीं है ये वीडियो, इसमें दिख रहे लोग सिर्फ एक्टिंग कर रहे थे

सोशल मीडिया पर किडनैपिंग का एक कथित वीडियो वायरल हो गया है. वीडियो किसी कार में बैठ कर बनाया गया है. इसमें एक छोटी बच्ची स्कूल यूनिफार्म पहने सड़क किनारे एक बेंच पर बैठी दिख रही है.

आजतक फैक्ट चेक

दावा
ये एक असली घटना का वीडियो है जिसमें दो लोगों ने एक स्कूली बच्ची का अपहरण करने की कोशिश की.
सच्चाई
ये कोई असली घटना नहीं है. इसमें दिख रहे सभी लोग एक्टिंग कर रहे थे.
फैक्ट चेक ब्यूरो
  • नई दिल्ली,
  • 26 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST

आजकल जगह-जगह बच्चों के किडनैप होने की अफवाहें तेजी से फैल रहीं हैं. असम, गुजरात और गोरखपुर के बाद अब औरंगाबाद में भी लोगों ने एक निर्दोष आदमी को किडनैपर समझ कर उसकी पिटाई कर दी.   

इसी बीच सोशल मीडिया पर किडनैपिंग का एक कथित वीडियो वायरल हो गया है. वीडियो किसी कार में बैठ कर बनाया गया है. इसमें एक छोटी बच्ची स्कूल यूनिफार्म पहने सड़क किनारे एक बेंच पर बैठी दिख रही है. 

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एक बाइकसवार उसे लगातार घूर रहा है. कुछ ही पलों बाद वहीं खड़ा एक दूसरा आदमी बच्ची के चेहरे को अपने हाथ से दबाता है और उसे उठा कर बाइक  की पिछली सीट पर  बैठा देता है. इसके बाद दोनों आदमी बच्ची को लेकर वहां से निकल जाते हैं. 

बाइक के पीछे खड़ी कार में बैठे कुछ लोग ये सब देखकर कमेंट्री कर रहे हैं. एक व्यक्ति कहता है, "इसके ऊपर पहले ही डाउट था. क्या कर रहा है ये? इसके साथ मिला हुआ है ये तो".  

काफी सारे लोग इसे असली घटना का वीडियो बता रहे हैं. 

ट्विटर पर ये वीडियो शेयर करते हुए एक शख्स ने लिखा, "मैं पूरा वीडियो पोस्ट नहीं कर पा रहीं हूं. वे लोग उस लड़की का अपहरण करके उसे 20 हजार रूपए में बेचने जा रहे थे. तभी इन लोगों ने उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया."

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इस ट्वीट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.  

इंडिया टुडे की फैक्ट चेक टीम ने पाया कि ये वीडियो किसी असली घटना का नहीं बल्कि स्क्रिप्टेड है. इसमें दिख रहे लोग सिर्फ एक्टिंग कर रहे हैं.   

कैसे पता लगाई सच्चाई?  

वीडियो के  कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें इसका एक लंबा वर्जन मिला जो यूट्यूब पर 6 सितंबर, 2022 को अपलोड किया गया था. 

असली वीडियो में किडनैपिंग की रिकॉर्डिंग कर रहे दोनों कार सवार अपहरण करने वालों को पकड़कर उन्हें पीटते हैं. किडनैपर बताते हैं कि वो बच्ची को बेचने के लिए ले जा रहे थे.   

असली वीडियो में पूरी घटना की कैमरे पर रिकॉर्डिंग कर रहे दोनों लोगों का चेहरा दिखाई पड़ता है. इनमें से एक शख्स, दूसरे को नवीन नाम से पुकारता है. इससे ये बात समझ में आती है कि नवीन नाम का ये शख्स वीडियो बनाने वालों में से एक है.  


इस जानकारी की मदद से थोड़ी और खोजबीन करने पर हमें एक और वीडियो मिला जो 'नवीन जांगड़ा' नाम के व्यक्ति ने फेसबुक पर  शेयर किया था. ये वीडियो भी वायरल वीडियो की तरह कार में बैठ कर बनाया गया है. इसमें एक दूसरी बच्ची का अपहरण होते हुए दिखाया गया है. दोनों ही वीडियोज की कहानी और उन्हें फिल्माने का तरीका तकरीबन एक-सा है. 

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नवीन जांगड़ा के यूट्यूब चैनल पर हमें एक ऐसा वीडियो मिला जिसमें नवीन ने वही कपड़े पहन रखे हैं जो वायरल वीडियो में पहने हैं. 

इससे ये बात सा‍बित हो जाती है कि वायरल हो रहा वीडियो भी नवीन जांगड़ा की टीम ने ही बनाया है. 

इस यूट्यूब वीडियो की शुरुआत में एक 'डिस्क्लेमर' देखा जा सकता है. इसमें साफ-साफ लिखा गया है कि ये वीडियो केवल मनोरंजन के लिए बनाया गया है. ये किसी असली घटना को नहीं दिखाता. 


इससे पहले भी कई बार स्क्रिप्टेड वीडियोज को सच्ची घटना बता कर शेयर किया जा चुका है. तब भी हमने उनकी सच्चाई बताई थी.

ये रिपोर्ट छपने के बाद नवीन जांगड़ा ने ‘आजतक’ को बताया कि ये एक स्क्रिप्टेड वीडियो है जो उनकी टीम ने मनोरंजन और जागरूकता फैलाने के मकसद से बनाया था. 


(रिपोर्ट: संजना सक्सेना)

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