सोशल मीडिया पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के जरिये मतदान करती एक महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वोट देते वक्त महिला की एक उंगली बीजेपी वाले बटन के सामने तो दूसरी उंगली बसपा वाले बटन के सामने रखी दिख रही है. उसके वोट देते ही पास में रखी वीवीपैट मशीन में कमल का निशान फ्लैश होता है जिससे पता लगता है कि उसका वोट बीजेपी को गया है. इस वीडियो के साथ कहा जा रहा है कि बिहार में चल रहे विधानसभा चुनावों में जिन ईवीएम मशीनों से वोटिंग हो रही है, उनसे छेड़छाड़ की गई है जिसके चलते मतदाता चाहे जिस भी पार्टी के सामने वाला बटन दबाएं, उनका वोट बीजेपी को ही जा रहा है.
इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है. इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो 2019 में हुए लोकसभा चुनावों का है. वर्तमान में चल रहे बिहार विधानसभा चुनाव से इसका कोई लेना-देना नहीं है. साथ ही, बारीकी से देखने पर पता चलता है कि वायरल वीडियो में महिला बीजेपी के ही निशान वाला बटन दबा रही है.
वीडियो के साथ कैप्शन लिखा है, “पहले ही चरण की वोटिंग में खेल सुरु हो गया है, वोट डालो हाथी पे जाता कमल पे”.
फेसबुक पर यह दावा काफी वायरल है. बिहार की लोक गायिका नेहा सिंह राठौर के फर्जी अकाउंट और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के एक पैरोडी अकाउंट से भी ये दावा किया गया है.
खबर लिखे जाने तक यह दावा करने वाले एक फेसबुक पोस्ट पर तकरीबन 1400 लोग रीएक्शन दे चुके थे. पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, “ये तो होना ही है... ईवीएम माता के सिवा कोई चारा नहीं भाजपा के लिए...”
दावे की पड़ताल
हमने पाया कि वायरल वीडियो मौजूदा बिहार विधानसभा चुनाव का नहीं बल्कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव का है. हमने इनविड टूल की मदद से वीडियो के कीफ्रेम्स को निकाल कर इंटरनेट पर सर्च करने पर पाया कि ये वीडियो 25 अक्टूबर 2019 को ‘इंडियन नेशनल कांग्रेस टीम अमेठी’ नाम के फेसबुक पेज पर शेयर किया गया था.
हमने वीडियो में नजर आ रही ईवीएम मशीन पर लिखे ‘राम प्रसाद चौरसिया’ और ‘पंकज दुबे’ जैसे कुछ नामों को ‘कीवर्ड सर्च’ के जरिये खोजा, तो पता चला कि ये उत्तर प्रदेश के बस्ती लोकसभा सीट (61 नंबर) के प्रत्याशियों के नाम हैं. elections.in वेबसाइट पर हमें बस्ती लोकसभा सीट के 2019 लोकसभा चुनावों के नतीजों का सूचीवार ब्यौरा भी मिल गया. इस सूची में जो नाम हैं, वही वायरल वीडियो में दिख रही ईवीएम मशीन पर भी लिखे नजर आ रहे हैं.
एक और सबूत है जिससे ये पता चलता है कि ये वीडियो बिहार विधानसभा चुनाव का नहीं हो सकता. 28 अक्टूबर को इन चुनावों का पहला चरण संपन्न हुआ था, जिसमें कोविड-19 से जुड़े दिशा-निर्देशों के तहत मतदाताओं ने मास्क लगाकर और प्लास्टिक के दस्ताने पहन कर ईवीएम का बटन दबाया था. वायरल वीडियो में ईवीएम का बटन दबाती हुई महिला के हाथों में दस्ताने नहीं दिख रहे हैं.
वीडियो को गौर से देखने पर पता चलता है कि महिला बीजेपी के निशान वाला बटन ही दबा रही है. उसके बटन दबाने के तुरंत बाद बीजेपी वाले बटन के सामने लाल रंग की लाइट जलती है और वीवीपैट पर कमल का निशान फ्लैश होता है. पड़ताल से यह साफ है कि वायरल वीडियो का मौजूदा बिहार विधानसभा चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है.