केंद्र सरकार ने 2 अप्रैल को लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल 2024 पेश कर दिया. जहां सरकार का कहना है कि वो वक्फ संशोधन विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में सुधार करने के मकसद से लाई है, वहीं समाजवादी पार्टी सहित तमाम विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं.
इसी बीच सोशल मीडिया पर पुलिस लाठीचार्ज का एक वीडियो वायरल होने लगा है. वीडियो के साथ तंज करते हुए दावा किया जा रहा है कि वक्फ बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने पर सपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीट दिया.
वीडियो में किसी इमारत के बाहर समाजवादी पार्टी के पोस्टर-बैनर लगे दिख रहे हैं. इमारत के बाहर सपा कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा है. इसी बीच, कुछ पुलिसकर्मी, सपा की लाल टोपी पहने एक आदमी को लाठी मारते दिखते हैं. आखिर में पिटने वाले आदमी के सिर से खून बहता दिखता है और वो बदहवास हो जाता है.
वीडियो को वक्फ संशोधन बिल के विरोध से जोड़कर कई यूजर्स फेसबुक और एक्स पर शेयर कर चुके हैं. वायरल पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो 2020 का है और किसान आंदोलन के समय का है.
कैसे पता की सच्चाई?
वीडियो को रिवर्स सर्च करने पर हमें पता चला इसे दिसंबर 2020 में कई लोगों ने शेयर किया था. यूजर्स ने लिखा था कि वीडियो में जिस आदमी पर पुलिस लाठी चलाती दिख रही है वो सपा नेता यामीन खान हैं. लोगों ने लिखा था कि पुलिस ने किसान आंदोलन में शामिल यामीन खान को लाठी मार कर उनका सिर फोड़ दिया. घटना सपा प्रदेश कार्यलय के बाहर की बताई गई है.
उस समय की कुछ न्यूज रिपोर्ट्स में भी इस वीडियो को शेयर कर शख्स का नाम यामीन खान बताया गया था.
साथ ही 7 दिसंबर, 2020 को यूपी में पत्रकार पंकज झा ने वायरल वीडियो जैसा ही एक दूसरा वीडियो शेयर किया था जिसमें पुलिस किसी अन्य आदमी पर लाठी चलाती दिख रही है. पंकज ने लिखा था कि लखनऊ में समाजवादी पार्टी के ऑफिस के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं पर यूपी पुलिस ने लाठीचार्ज किया. आगे उन्होंने लिखा है कि ये सब तब हुआ जब अखिलेश यादव कन्नौज से ट्रैक्टर यात्रा शुरू करना चाहते थे.
हमें इस विरोध प्रदर्शन और पुलिस लाठीचार्ज की खबरें भी मिलीं. दरअसल 7 दिसंबर, 2020 को सपा प्रमुख अखिलेश यादव किसान यात्रा निकालने के लिए कन्नौज जाने वाले थे. इसके लिए लखनऊ में कार्यकर्ता उनके घर जा रहे थे. इसी दौरान जब पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की तो उनकी झड़प हो गई. पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया. अखिलेश को भी कन्नौज जाने से रोका गया था. इसके चलते लखनऊ में काफी बवाल हुआ था. बाद में उन्होंने लखनऊ में ही कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर धरना दिया था. कुछ खबरों में ये भी बताया गया है कि अखिलेश यादव को हिरासत में भी लिया गया था. उस समय तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन चल रहा था.
कुल मिलाकर इस बात की पुष्टि हो जाती वीडियो चार साल से ज्यादा पुराना है. इसका वक्फ संशोधन बिल 2024 से कोई संबंध नहीं है.