हम जो चीजें खा रहे हैं, वो शुद्ध हैं या नहीं, उनमें मिलावट तो नहीं है, हानिकारक केमिकल्स तो नहीं हैं- इन बातों को लेकर हम हमेशा सतर्क रहते हैं. लेकिन अगर कोई आपसे कहे कि आप जिस गेहूं के आटे की रोटी खा रहे हैं, वो नकली है और उसे प्लास्टिक से बनाया जा रहा है, तो जाहिर है कि आपके पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाएगी.
दरअसल, एक वायरल वीडियो को शेयर करते हुए कुछ लोग यही दावा कर रहे हैं. इसमें एक व्यक्ति प्लास्टिक जैसे पॉलिथीन, बोतलों के मलबे को एक बड़ी-सी मशीन में भरता दिखाई देता है. मशीन से प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े हो जाते हैं. इन छोटे टुकड़ों को एक दूसरी मशीन में डालकर उनमें पानी मिलाया जाता है. इसके बाद इसे कुछ दूसरी मशीनों में डाला जाता है. एक मशीन में डालने पर उसमें से नूडल्स जैसे लंबे-लंबे रेशे निकलते हैं. इन रेशों को छोटे-छोटे दानों में काट लिया जाता है.
एक ट्विटर यूजर ने ये वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, "नकली गेंहू भी बनने लग गये है मार्केट देख लो आंखें खोल कर अब क्या बचा है नकली बनाने को."
इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है. 'आजतक फैक्ट चेक' ने पाया कि ये वीडियो प्लास्टिक की रीसायक्लिंग का है, न कि नकली गेहूं बनाए जाने का.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वायरल वीडियो को ध्यान से देखने पर इसमें एक जगह 'Smartest workers' लिखा दिखता है.
इस जानकारी के आधार पर खोजबीन करने पर हमें ये वीडियो स्मार्टेस्ट वर्कर नाम के एक इंस्टाग्राम पेज पर मिला. यहां साफ-साफ लिखा है कि ये वीडियो प्लास्टिक की रीसायक्लिंग का है. इस पेज पर फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाली अलग-अलग मशीनों के और भी कई वीडियो पोस्ट किए गए हैं.
यूट्यूब पर प्लास्टिक की रीसायक्लिंग के और भी कई वीडियो मौजूद हैं. ये वायरल वीडियो से काफी मिलते-जुलते हैं.
कैसे होती है प्लास्टिक की रीसायक्लिंग?
सबसे पहले गंदी प्लास्टिक को 'डस्ट क्लीनर मशीन' से साफ किया जाता है. इसके बाद इसे 'प्लास्टिक स्क्रैप ग्राइंडर मशीन' में डालकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है. इन टुकड़ों को 'वॉशिंग कन्वेयर' नाम की मशीन में डाला जाता है जो इन्हें साफ करते हुए 'वॉशिंग मशीन' की तरफ खिसका देती है. इसके बाद 'वॉशिंग मशीन' में प्लास्टिक की अच्छी तरह सफाई होती है. गीले प्लास्टिक के टुकड़ों को सुखाने के लिए उन्हें 'फिल्म ड्रायर मशीन' में डाला जाता है. फिर इन सूखे टुकड़ों को 'एग्लोमेरेटर मशीन' में डाला जाता है जहां ये कटकर और बारीक हो जाते हैं. इसके बाद इसे 'प्लास्टिक रीसायक्लिंग मशीन' में डाला जाता है जहां से ये 'हीटिंग बैरेल' में जाता है. 'हीटिंग बैरेल' के दूसरे सिरे से पिघला हुआ प्लास्टिक बाहर आता है. इसे ठंडा करके कटर में डाला जाता है जहां से 'पलास्टिक पैलेट्स' या ग्रैन्यूल्स, यानी प्लास्टिक के छोटे-छोटे दाने बाहर आते हैं. इन पैलेट्स को नए-नए रूप में ढाला जा सकता है. प्लास्टिक की रीसायक्लिंग को आसान भाषा में समझाने वाला एक वीडियो नीचे देखा जा सकता है.
हमने प्लास्टिक रीसायक्लिंग की मशीनें बनाने वाली कंपनी 'एस के इंजीनियरिंग' के प्रवक्ता से बात की. उन्होंने भी हमें यही बताया कि ये वीडियो प्लास्टिक की रीसायक्लिंग का है.
इससे पहले थर्माकॉल की रीसायक्लिंग का वीडियो नकली चीनी की फैक्ट्री बताकर शेयर किया गया था. उस वक्त भी हमने इसकी सच्चाई बताई थी.