सरेआम आग में झुलसती महिला का एक विचलित कर देने वाला वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी वायरल है. वीडियो में एक पुलिसकर्मी समेत कुछ लोग आग बुझाने की कोशिश करते हुए दिखाई दे रहे हैं.
इस घटना को हाल ही का बताते हुए कहा जा रहा है कि लखनऊ में बीजेपी कार्यालय के बाहर इंसाफ की मांग कर रही इस महिला ने आत्मदाह कर लिया. वीडियो के जरिए यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
फेसबुक और एक्स पर ये वीडियो शेयर करते हुए लोग लिख रहे हैं, "लखनऊ में भाजपा कार्यालय के बाहर एक और महिला ने आत्मदाह का प्रयास किया. प्रदेश में महिलाओं की क्या स्थिति है ये बात अब किसी से छिपी नहीं है. इंसाफ की मांग को लेकर ये लखनऊ विधानसभा के सामने किसी महिला द्वारा आत्मदाह की ये दूसरी घटना है. उत्तर प्रदेश में महिलाओं-बेटियों का बुरा हाल है. रोजाना गैंगरेप हत्या छेड़छाड़ जैसी घटनाएं घट रही हैं. बेटियां न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं. कानून उनका रक्षक बनकर नहीं उल्टे उनके खिलाफ खड़े होकर उनका विरोध करता नजर आ रहा है. नहीं चाहिए भाजपा सरकार”
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि लखनऊ में ये घटना हाल-फिलहाल में नहीं, बल्कि साल 2020 में हुई थी.
कैसे पता की सच्चाई?
कीवर्ड सर्च की मदद से हमें पता चला कि सोशल मीडिया पर इस वीडियो को कई लोगों ने अक्टूबर 2020 में शेयर किया था. इन पोस्ट्स में भी यही बताया गया है कि आत्मदाह की ये घटना लखनऊ में बीजेपी कार्यालय के बाहर हुई थी. इतनी बात तो यहीं साफ हो गई कि ये मामला करीब पांच साल पुराना है.
इसके बाद हमें इस वीडियो से जुड़ी कई न्यूज रिपोर्ट्स मिलीं. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक ये घटना लखनऊ में विधानसभा के पास बीजेपी दफ्तर के सामने हुई थी. आत्मदाह करने वाली महिला का शरीर 90 प्रतिशत तक झुलस गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी. खबर में महिला का नाम अंजलि तिवारी बताया गया है. पीड़िता यूपी के महाराजगंज जिले की रहने वाली थी.
दरअसल, अंजलि की शादी महाराजगंज जिले के अखिलेश तिवारी के साथ हुई थी. लेकिन, पति-पत्नी की आपस में बनती नहीं थी जिस वजह से अंजलि अलग रहने लगी. इसके बाद अंजलि ने आसिफ रजा नाम के एक शख्स से निकाह कर लिया. बाद में अंजलि ने धर्म परिवर्तन कर अपना नाम आयशा रख लिया था.
लेकिन, निकाह के कुछ दिन बाद आसिफ सऊदी अरब भाग गया. आसिफ के जाने के बाद उसके घरवालों ने अंजलि को घर में रखने से मना कर दिया. ऐसा होने पर अंजलि, आसिफ के घर के सामने धरने पर बैठ गई. इसके बाद महाराजगंज पुलिस अंजलि को महिला थाने ले गई. लेकिन, मामले का कोई हल नहीं निकल पाया.
इसके बाद इंसाफ की मांग लेकर पीड़िता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ गई थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. निराश होकर, 13 अक्टूबर, 2020 को अंजलि ने लखनऊ में विधानसभा भवन के पास ही आत्मदाह कर लिया.
तब, पुलिस ने महिला को आत्मदाह के लिए उकसाने के आरोप में पूर्व राज्यपाल सुखदेव प्रसाद के बेटे आलोक को गिरफ्तार किया था. साथ ही, मामले में महाराजगंज महिला पुलिस पर भी लापारवाही के आरोप लगे थे कि उन्होंने पीड़िता का केस दर्ज नहीं किया और मामले को नजरअंदाज किया.
साफ है, लखनऊ में लगभग पांच साल पहले हुई घटना के वीडियो को हाल-फिलहाल का बताते हुए सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.