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Monkeypox के मरीजों को कैसे हैंडल करते हैं डॉक्टर, किन बीमारियों की दवाइयां आती हैं काम?

फिलहाल, मंकीपॉक्स वायरस के ट्रीटमेंट से संबंधित किसी भी तरह की कोई जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन कुछ ऐसी दवाइयां हैं जिन्हें एमपॉक्स के मरीजों को भी दी जा रही हैं. इन दवाइयों का इस्तेमाल स्मॉल पॉक्स में भी किया जाता है. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से.

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aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 27 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 2:33 PM IST

मंकीपॉक्स वायरस को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. दुनियाभर के अधिकतर देशों में मंकीपॉक्स वायरस के मामले सामने आए हैं. भारत में भी इस वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया है. मंकी पॉक्स वायरस हवा से फैलने वाली बीमारी नहीं है. यह बीमारी किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से, स्किन टू स्किन संपर्क, संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध, उसके कपड़ों को छूना और बिस्तर इस्तेमाल करने से फैलती है.

फिलहाल मंकीपॉक्स वायरस का कोई ट्रीटमेंट सामने नहीं आया है. हालांकि, कई ऐसी एंटीवायरल दवाइयां हैं जिनका इस्तेमाल स्मॉल पॉक्स जैसी बीमारियों से बचाव के लिए किया जाता है और यह दवाइयां एमपॉक्स वायरस के मरीजों को भी दी जा रही हैं. इन एंटीवायरल दवाओं में शामिल हैं- टेकोविरीमैट या ST-246, ब्रिन्सिडोफोविर और सिडोफोविर.

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इसके अलावा, इंट्रावेनस वैक्सीनिया इम्यून ग्लोब्युलिन (VIGIV), जिसे स्मॉल पॉक्स का ट्रीटमेंट करने के लिए लाइसेंस प्राप्त है, एमपॉक्स और अन्य पॉक्स वायरस के इलाज के लिए उपयोग के लिए अधिकृत किया जा सकता है.

एमपॉक्स वायरस के इलाज के लिए NIAID ने  टेकोविरीमैट  दवा के 2 क्लिनिकल ट्रायल किए. सितंबर 2022 में, NIAID ने ACTG (Advancing Clinical Therapeutics Globally for HIV/AIDS and Other Infections ) के साथ मिलकर अमेरिका में टेकोविरीमैट  वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल किया. इस ट्रायल में एमपॉक्स वायरस से संक्रमित 500 से ज्यादा वयस्कों और बच्चों को शामिल किया गया.  इस ट्रायल में शामिल सभी संक्रमित लोगों को टेकोविरीमैट दी गई. वहीं दूसरे प्रतिभागियों को प्लेसिबो पिल्स दी गई. अब रिसर्चर्स डाटा इकट्ठा कर रहे हैं कि क्या टेकोविरिमेट खाने वाले प्रतिभागी प्लेसबो लेने वाले प्रतिभागियों की तुलना में ज्यादा तेजी से ठीक हो जाते हैं या नहीं.

टेकोविरीमैट- साल 2018 में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने स्मॉल पॉक्स(छोटी चेचक) के ट्रीटमेंट के लिए टेकोविरीमैट को मंजूरी दी थी. इस दवा को ओरली और इंजेक्शन दोनों ही तरीकों से लिया जा सकता है.

ब्रिन्सिडोफोविर- NIAID ने चेचक के ट्रीटमेंट के लिए ब्रिन्सिडोफोविर को भी सपोर्ट किया था. वयस्कों और बच्चों में चेचक के इलाज के लिए इस दवा को भी अप्रूवल दिया गया था.

क्या हैं MPOX वायरस के लक्षण

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शुरुआती लक्षणों में बुखार, तेज सिरदर्द, साइनस की सूजन, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द और ताकत की कमी का एहसास होगा. बुखार आने के एक हफ्ते के अंदर शरीर पर छाले और लाल धब्बे दिखाई देने लगते हैं. ज्यादातर छाले चेहरे और हाथों पर पाए जाते हैं. इसके अलावा ये हथेलियों, जननांगों और आंखों पर भी पाए जाते हैं.

खुद को कैसे बचाएं इस वायरस से

इस वायरस से बचने के लिए जरूरी है कि आप एन95 मास्क पहनें, भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें. और किसी भी चीज को छूने के बाद अपने हाथों को सैनिटाइजर से साफ करें. 

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