
लिम्फोमा कैंसर से पीड़ित 48 साल की मरीज को एक साल पहले ही अपनी बीमारी का पता चला था. उसके पूरे शरीर में गिल्टियां (मांस की गांठें) बन रही थीं. गले-पेट सहित शरीर के दूसरे हिस्सों में ये गांठें बढ़ गई थीं. सफदरजंग अस्पताल के कैंसर विभाग में उसकी चिकित्सा चल रही थी, लेकिन कन्वेंशनल ट्रीटमेंट उस पर असर नहीं कर रहा था. फिर ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने इस थेरेपी को उस पर आजमाया और ये थेरेपी सफल साबित हुई.
कैंसर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कौशल कालरा ने बताया कि सफदरजंग अस्पताल में पहली CAR-T थेरेपी एक ऐसे मरीज को दी गई, जिसे रिफ्रैक्टरी नॉन-हॉजकिन लिंफोमा नामक ब्लड कैंसर था, जिस पर कन्वेंशनल ट्रीटमेंट यानी पारंपरिक उपचार असर नहीं कर रहे थे. डॉ. कालरा ने बताया कि मरीज पर थेरेपी का असर सफल रहा, जो मरीज और मेडिकल टीम दोनों के लिए उत्साहजनक रिजल्ट है.
पहले सिर्फ दो सेंट्रल हॉस्पिटल में हो रही थी ये थेरेपी
इस उपलब्धि के साथ, सफ़दरजंग अस्पताल भारत में पहला ऐसा केंद्रीय सरकारी अस्पताल बन गया है, जो CAR-T सेल थेरेपी प्रदान करता है, जो एक अत्यधिक विशिष्ट और परिष्कृत उपचार विकल्प है. अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप बंसल ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह देश भर में रोगियों को उन्नत चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए हमारा कमिटमेंट दिखाता है. नॉर्थ इंडिया में अभी तक केवल दो अन्य सरकारी संस्थानों पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स नई दिल्ली ने सीएआर-टी सेल थेरेपी की है, जिससे सफदरजंग अस्पताल इम्यूनोथेरेपी के बढ़ते क्षेत्र में एक मजबूत कड़ी बन गया है. यह उपलब्धि न केवल सफदरजंग अस्पताल की एक अग्रणी स्वास्थ्य सेवा संस्थान के रूप में प्रतिष्ठा बढ़ाती है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में रोगियों के लिए इस लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट तक पहुंच भी बढ़ाती है.
बता दें कि VMMC और सफदरजंग अस्पताल ने प्रो. संदीप बंसल (चिकित्सा अधीक्षक) के नेतृत्व में अपनी पहली टी-सेल (सीएआर-टी) थेरेपी (Chimeric Antigen Receptor T-cell (CAR-T))सफलतापूर्वक की है, जो कुछ प्रकार के लिम्फोमा और रक्त कैंसर के लिए एक नया उपचार है. ये खाास उपलब्धि विभागाध्यक्ष डॉ. कौशल कालरा के लीडरशिप में मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की टीम ने हासिल की है.
क्या है ये थेरेपी
CAR-T सेल थेरेपी एक उन्नत इम्यूनोथेरेपी है जो कैंसर से लड़ने के लिए रोगी की इम्यून सेल्स, विशेष रूप से टी-सेल की शक्ति का इस्तेमाल करती है. डॉ कालरा इसे आसान शब्दों में समझाते हैं कि किसी पेशेंट की इम्यून सेल को निकालकर उसे जेनेटकली मोडीफाइड करके कैंसर के खिलाफ लड़ने में ट्रेंड किया जाता है. फिर इसको जेनेटिकली मोडिफाइड करके मिलियंस की संख्या में बनाकर पेशेंट के अंदर डाला जाता है. जैसे इस रोगी के ब्लड से हमने टी-सेल निकाले, फिर जेनेटकली मोडिफाइ करने के लिए इसे लैब में भेजा. लैब ने इन विट्रो विधि से इन सेल्स को ट्रेंड करके इन्हें लाखों की संख्या में बना दिया.
अब ये सेल मरीज के शरीर में पहुंचाने से पहले मरीज को काफी दवाएं देकर उसके कैंसर को खत्म करने की कोशिश की गई थी. इस थेरेपी के बाद मरीज में सकारात्मक लक्षण दिखे. इससे कैंसर को मारने में मदद मिली. लेकिन इसे अब आगे कैंसर से पूरी तरह मुक्त होने में वक्त लग सकता है. बता दें कि इस थेरेपी से ठीक होने के बाद मरीज ने अपने इलाज में जुटी टीम को धन्यवाद दिया. बता दें कि यह सक्सेसफुल केस सही मायने में कैंसर की दिशा में आधुनिक चिकित्सा को लेकर चल रहे अस्पताल के प्रयासों में एक मील का पत्थर साबित हुआ है.