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भारत की प्रमुख लॉ फ़र्म लक्ष्मीकुमारन एंड श्रीधरन (एलकेएस) ने ऑनलाइन गेमिंग पर लगने वाले जीएसटी पर जारी की गई मंत्रिमंडल के सुझावों को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है. यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब केंद्रीय वित्तीय मंत्री ने दक्षिण कोरिया में एक इवेंट के दौरान कहा है कि जीएसटी काउंसिल ऑनलाइन गेमिंग पर टैक्स लगाने को लेकर विचार कर रहा है और टैक्स पर तस्वीर साफ़ होते ही, इस सेक्टर में ज़्यादा निवेश आने की उम्मीद है.
आपको बता दें कि जीएसटी काउंसिल ने ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर पर जीएसटी लगाने के अहम फैसले के लिए एक मंत्रिमंडल का गठन किया था. जून 2022 में, मंत्रिमंडल ने इस सेक्टर पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाने का सुझाव रखा था. यह टैक्स किसी भी ऑनलाइन गेम की कुल कॉन्टेस्ट राशि पर लगाए जाने का सुझाव था. फरवरी 2023 में, ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की गाइडलाइन और इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961 में फाइनेंस ऐक्ट, 2023 के ज़रिए संशोधन किया गया, जिससे इस सेक्टर की क्षमताओं की पहचान हो पाई. हाल ही में, Gameskraft में कर्नाटक हाइकोर्ट के फैसले ने ऑनलाइन गेम ऑफ़ स्किल की कानूनी मान्यता को बनाए रखा है.
रिपोर्ट में मौजूद विश्लेषण के मुताबिक, ऑनलाइन गेमिंग पर मंत्रिमंडल की पहली रिपोर्ट, कोर्ट के सभी फैसलों और आईटी नियमों के तहत मंज़ूरी पाने वाले ऑनलाइन गेम की कानूनी मान्यता से मेल नहीं खाती.
रिपोर्ट में कानूनी स्थिति और टैक्स को लेकर पिछले 6 महीने में हुए कई अहम बदलावों के बारे में बताया गया है. इन बदलावों में आईटी नियमों और ऑनलाइन गेमिंग में जीत पर लगने वाले टीडीएस में फेरबदल शामिल हैं. साथ ही, इस रिपोर्ट में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाज़ी, जुए, और लॉटरी के बीच की कानूनी दर्जे के बारे में बताया गया है. ऑनलाइन स्किल गेमिंग को देश की अलग-अलग अदालतों ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत कारोबार करने की अनुमति दी है. वहीं, सट्टेबाज़ी, जुए, लॉटरी को अलग व्यावसायिक गतिविधियों के दायरे में रखा गया है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर गौर किया जाना चाहिए और इसे कुल राशि के बजाय, Gross Gaming Revenue (जीजीआर) पर लगाया जाना चाहिए. रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह दुनिया के बाकी विकसित देशों में जीजीआर पर 15 से 20 प्रतिशत टैक्स की अधिकतम सीमा होती है, जिसकी वजह से टैक्स रेवेन्यू भी बढ़ता है.
आइए, नज़र डालते हैं रिपोर्ट में दिए गए कुछ अहम सुझावों पर:
● मंत्रिमंडल की पहली रिपोर्ट की नए कानून और मौजूदा स्थिति के हिसाब से समीक्षा होनी चाहिए, ताकि इसके कानूनी और व्यावहारिक पहलू सामने आ सकें.
●ऑनलाइन गेम्स ऑफ़ स्किल पर टैक्स में किसी भी तरह के बदलाव का फैसला 1950 से मौजूद कानून के हिसाब से होना चाहिए, जिसमें इन गेम्स को लॉटरी, सट्टेबाज़ी, जुए से अलग करके गेम्स ऑफ़ स्किल के तौर पर पहचान दी गई है.
● आईटी ऐक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत, ‘मान्यता प्राप्त ऑनलाइन रियल मनी गेम’ का सर्टिफिकेशन, ऑनलाइन गेमिंग को स्पष्ट और दूसरों से अलग कानूनी पहचान देगा. आईटी नियमों के तहत मान्यता पाने वाले ऑनलाइन रियल मनी गेम्स पर Gross Gaming Revenue (जीजीआर) के तहत ही टैक्स लगाया जाएगा.
● प्लैटफॉर्म फीस (जीजीआर) या जीएसटी के तहत कुल राशि पर जीएसटी लागू करने के लिए, यह तथ्यों के आधार पर तय होना चाहिए कि ऑनलाइम गेमिंग फॉर्मैट 'गेम ऑफ स्किल' है या 'गेम ऑफ चांस' है. इन दोनों में यह अंतर, भारत सरकार से अधिकार पाने वाली सेल्फ रेगुलेटरी बॉडी को तय करना चाहिए.
इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए, एल. बद्री नारायण, एक्ज़िक्यूटिव पार्टनर, एलकेएस ने कहा, 'रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की गेमिंग मार्केट का आकार वित्तीय वर्ष 2022 में करीब 2.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर था. यह वित्तीय वर्ष 2027 तक 8.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. हालांकि, यह तब ही मुमकिन है जब इस सेक्टर पर व्यावहारिक रूप से तय किया गया टैक्स लागू हो. जीएसटी काउंसिल को तथ्यों के आधार पर कानूनी स्थिति, इंडस्ट्री की उम्मीदों पर गौर करना चाहिए. साथ ही, टैक्स का फैसला लेते समय कुल गेमिंग राशि पर 28 प्रतिशत जीएसटी न लागू करते हुए, दुनियाभर में अपनाए जाने वाले मानदंडों को लागू करना चाहिए'.
हमार देश का लक्ष्य साल 2030 तक 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का है. यह एक मौका है जब भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने वाले ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए एक पारदर्शी और व्यावहारिक टैक्स नीति लानी चाहिए, जो दुनियाभर में अपनाए जाने वाले मानदंडों के हिसाब से हो. इससे इस सेक्टर पर कानूनी तौर पर लगने वाले टैक्स की गणना करना आसान होगा और इस इंडस्ट्री को आगे बढ़ते रहना का मौका भी मिलेगा.
लक्ष्मीकुमारन और श्रीधरन लॉ फ़र्म के बारे में जानकारी-
लक्ष्मीकुमारन और श्रीधरन (एलकेएस) एक भारत लॉ फर्म है, जो कॉरपोरेट, विवादों को सुलझाने, टैक्स, और बौद्धिक संपत्ति के मामलों में काम करते हैं. यह फर्म, देशभर में अपने 14 कार्यालयों ने, मुकदमों और व्यावसायिक कानूनी मामलों, भारत और विदेशों में अपने क्लाइंट को सलाह देते और उनका प्रतिनिधित्व करते हैं. फर्म ने अलग-अलग फॉरम से 30 हज़ार मुकदमे संभाले हैं जिनमें सुप्रीम कोर्ट में 2 हज़ार मुकदमे शामिल हैं.
पिछले 37 सालों में, फर्म ने 15,500 क्लाइंट के साथ काम किया है, जिनमें स्टार्ट-अप, छोटे और मध्यम उद्योग से लेकर भारतीय कॉरपोरेट कंपनियां और मल्टीनैशनल कंपनियां शामिल हैं.