आर.जी. अग्रवाल
70 वर्ष चेयरमैन, धानुका एग्रीटेक
क्योंकि उन्होंने धानुका को बनाया एग्रीकैमिकल इंडस्ट्री का भरोसेमंद ब्रांड. 1968 में श्रीराम कॉलेज से बी.कॉम करने के बाद तय किया कि पुश्तैनी धंधा नहीं करेंगे.
तिलक नगर में खाद और कीटनाशक की दुकान खोलकर की शुरुआत. आज एग्रोकैमिकल क्षेत्र में कंपनी की 7 फीसदी की हिस्सेदारी है. कंपनी का मौजूदा सालाना राजस्व 9,627 करोड़ रुपए है
क्योंकि कृषि क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय है. बीते 40 साल से लगातार एग्रोकैमिकल इंडस्ट्री और किसानों के जीवन की बेहतरी के लिए प्रयासरत.
कृषि की नई तकनीकों को जमीन तक पहुंचाने और कीटनाशक के उचित उपयोग के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स और धानुका डॉक्टर्स का नेटवर्क तैयार किया, जिससे किसानों को समृद्ध बनाया जा सके
क्योंकि क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं और मौजूदा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर हैं.
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शुभम शंखधर