बिहार के चर्चित मधुबनी की राधिका अपहरण मामले में अभी तक कोई अहम सुराग हाथ नहीं लगा है. आईपीएस अवधेश सरोज मामले का सुपरविजन कर रहे हैं लेकिन नतीजा अभी तक कुछ नहीं निकला है. मामला लगभग तीन महीने पुराना है. राधिका के पिता अपनी दोनों बेटियों को लेकर गंगा नहाने गए थे. यहां से उनकी खुशियों पर मानों ग्रहण लग गया. क्योंकि वे गए तो दो बेटियों और पत्नी के साथ, लेकिन लौटे एक बेटी और पत्नी के साथ. एक हादसे ने उनकी जिंदगी में भूचाल ला दिया.
(रिपोर्ट: अभिषेक कुमार झा)
इस मामले में आईपीएस अवधेश सरोज ने बताया कि हमने कुछ फॉरेंसिक जांच करवाई है, जिससे यह पता चले की यह अपहरण की घटना है या डूबने की. जैसे ही जांच रिपोर्ट आती है हम क्लियर हो जाएंगे और अपनी जांच को हम पूरा कर लेंगे. उन्होंने बताया की उनके पिता के द्वारा बताए गए व्यक्ति से पूछताछ से कहीं भी यह नहीं पता चल रहा है कि अपहरण किया गया है. हम लगातार इस केस को फॉलो कर रहे हैं.
दरअसल, राधिका के पिता शरबन कुमार सिंह दिल्ली में फैब्रिकेशन का बिजनेस करते थे. कोरोना काल में काम ठप हो गया. शरबन कुमार सिंह दो बेटियां और पत्नी सहित वापस घर लौट आए. छोटी बेटी का नाम युक्ति सिंह है जो तीन साल की है. बड़ी बेटी राधिका कुमारी 11 साल की है. 13 जुलाई को वह परिवार के साथ गंगा नहाने गए थे. जब वे गंगा स्नान कर रहे थे उसी दौरान शरबन कुमार सिंह के भाई का 14 साल का बेटा पानी में डूबने लगा और परिवार के सभी सदस्य बच्चे को बचाने का प्रयास करने लगे.
जब बच्चे को होश आया तो शरबन कुमार सिंह ने अपने दोनों बेटियों की तालाश शुरू कर दी. बड़ी बेटी राधिका कुमारी कही नजर नहीं आई. जिसके बाद उन्होंने आशंका जाहिर की, कि बेटी डूब तो नहीं गई है. राहत दल ने बच्ची की तालाश शुरू की लेकिन 3 दिन तक लगातार तलाश करने के बाबजूद कुछ नहीं मिला.
शरबन कुमार सिंह अपनी बेटी की तालाश कर रहे थे. इसी दौरान 20 अगस्त को कॉल आया जो साइलेंट था. इसके बाद शरबन ने व्हाट्सअप कॉल किया तो दूसरी ओर से उठाया गया. शरबन का दावा है कि कॉल करने वाले ने उनकी बेटी राधिका कुमारी से बात कराई. उन्होंने कहा कि कॉल के दौरान राधिका ने कहा पापा-पापा मुझे बचा लो, अंकल मुझे छोड़ दो और फिर कॉल को डिस्कनेक्ट कर दिया गया.
शरबन ने इस बात की जानकारी पुलिस को दी. जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और कॉल करने वाले रोहतास जिले के दावत थाना क्षेत्र के डेढ़गांव निवासी धनंजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन आरोप है कि राजनीतिक दबाव में आकर उस युवक को तीन दिन के बाद ही छोड़ दिया गया.
शरबन ने मामले का संज्ञान तत्कालीन डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे को दिया. जिन्होंने एक बार फिर मामले के सुपरविजन की जिम्मेदारी बदलते हुए आईपीएस अवधेश सरोज को दी है. अवधेश सरोज मामले को दर्ज करते हुए सुपरविजन कर रहे हैं लेकिन नतीजा अभी तक कुछ नहीं निकला है.