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Bihar: अवैध संबंधों में बाधा बन रही थी 4 माह की बेटी, झाड़ियों में फेंक प्रेमी देवर संग फरार हुई महिला

सुपौल में एक कलयुगी मां ने अपनी चार माह की बेटी को नहर के पास झाड़ियों में फेंक दिया. गांव वालों ने बच्ची की पहचान गांव के ही धीरेंद्र सादा की बेटी के तौर पर की. ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि धीरेंद्र सादा अन्य राज्य में मजदूरी करता है और उनकी पत्नी सुनीता देवी का प्रेम प्रसंग उसके देवर सुभाष सादा के साथ चल रहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो) (प्रतीकात्मक फोटो)
राम चन्द्र मेहता
  • सुपौल ,
  • 22 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 6:04 PM IST

बिहार के सुपौल में एक कलयुगी मां ने अपनी चार माह की बेटी को नहर के पास झाड़ियों में फेंक दिया और प्रेमी देवर संग फरार हो गई. बच्ची को लावारिस पड़ा देख मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई और पुलिस को इसकी सूचना दी गई. रतनपुर थाना अध्यक्ष कृष्ण कुमार सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे. इस दौरान बच्ची के मिलने की जानकारी चाइल्ड लाइन सुपौल को भी दी गई. चाइल्ड लाइन सुपौल की टीम ने समदा पहुंचकर बच्ची को अपने कस्टडी में लिया. 

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यह मामला रतनपुरा थाना क्षेत्र के भगवानपुर पंचायत समदा वार्ड 12 का है. बताया जा रहा है कि एक महिला खेत में काम कर रही थी. इस दौरान उसे बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी. महिला ने देखा कि मासूम बच्ची झाड़ियों में पड़ी रो रही है. तुरंत ही उसने गांव वालों को इस घटना के बारे में बताया गया. ग्रामीणों ने बच्ची की पहचान गांव के ही धीरेंद्र सादा की बेटी के तौर पर की. 

मां झाड़ियों में मासूम बच्ची को फेंककर हुई फरार

ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि धीरेंद्र सादा अन्य राज्य में मजदूरी करता है और उनकी पत्नी सुनीता देवी का प्रेम प्रसंग उसके देवर सुभाष सादा के साथ चल रहा है. देवर के प्रेम में उसने अपनी  4 महीने की मासूम बच्ची को नहर के पास झाड़ियों फेंक दिया. ग्रामीण वीणा देवी ने बताया बच्ची बरसात के पानी में पूरी तरह भीग गई थी. उसके शरीर पर चींटी और कीड़े-मकोड़े चल रहे थे. बच्ची को उठाकर गांव लाया गया. उसकी साफ सफाई के बाद बच्ची को दूध पिलाया गया.   

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मासूम बच्ची को बाल कल्याण समिति में भेजा गया 

बाल कल्याण समिति सुपौल के कार्यपालक सहायक संतोष कुमार ने कहा कि बच्ची को मेडिकल जांच के बाद बाल कल्याण समिति में भेज दिया गया है. संस्था में शून्य से 6 साल तक के बच्चों का देखभाल की जाती है. अखबारों में विज्ञापन निकाला जाएगा. कोई दावा करेगा तो जांच के बाद उसे सौंप दिया जाएगा. अगर 90 दिनों तक दावा नहीं किया जाता है तो बच्ची को कानूनी तौर पर स्वतंत्र किया जाएगा. जो ऑनलाइन आवेदन करेगा, उन्हें बच्ची को गोद में दे दिया जाएगा. 

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