
जनता दल यू के मोदी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने का असर बिहार की राजनीति पर पड़ रहा है. महागठबंधन से अलग होकर जिस तरीके से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरजेडी और कांग्रेस के हाथों सत्ता छीन ली थी, उस पर उन्हें खुशी मनाने का मौका मिल गया है.
नीतीश कुमार ने जब बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई तो माना गया कि नीतीश कुमार का वही रुतबा अभी कायम है, जो 4 साल पहले बीजेपी से अलग होने के समय था. हालांकि इस मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार ने उनके विरोधियों के बीच इस भ्रम को तोड़ दिया. जनता दल यू का मानना है कि इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है और आने वाले दिनों में विरोधियों को फिर मुंह की खानी पड़ सकती है. वहीं, विपक्षियों का मानना है कि इसका बिहार की राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा.
इसका ताजा उदाहरण कांग्रेस है. अभी तक कांग्रेस विधायक दल में टूट होना तय माना जा रहा था. इसी खतरे को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बिहार के कांग्रेस के नेताओं को बुलाकर समझाया-बुझाया और चेतावनी भी दी. इसके बावजूद कांग्रेस के विधायकों पर इसका खास असर नहीं दिखा. क्योंकि उन्हें जनता दल यू में अपना भविष्य सुरक्षित दिखाई देता रहा है, जबकि आरजेडी के साथ खड़े होने का मतलब वो जानते हैं.
केन्द्रीय मंत्रिमंडल के इस विस्तार में जनता दल यू को खास तरजीह नहीं देने के बाद कांग्रेस के विधायक टेंशन में हैं. जो कदम अपने आप आगे बढ़ रहे थे, वो फिलहाल ठिठक गए हैं. खबरों के मुताबिक कांग्रेस के 14 विधायक जनता दल यू में शामिल होने वाले थे. दो तिहाई के लिए 18 विधायकों की जरूरत है. कांग्रेस के कुल 27 विधायक हैं.
मीडिया की खबरों के मुताबिक जनता दल यू के दो मंत्रियों के केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की चर्चा थी, जबकि इस तरह का कोई प्रस्ताव भी नहीं था. दूसरी तरफ बिहार के जो दो सांसद अश्वनी चौबे और आरके सिंह मंत्री बने उनके बारे में कोई चर्चा ही नहीं थी. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी अपने घटक दलों को मजबूत न करके अपने दल को मजबूत करने में लगी है. कांग्रेस विधायकों की चिन्ता का कारण यही है.