
बिहार के रोहतास जिले में इस साल कुछ अलग ही घटनाएं हो रही हैं. फरवरी महीने में रोहतास जिले से 1871 में बनी धूप घड़ी का शंकु चोरी हो गया था और कुछ दिन पहले ही चोर जिले का एक पुल ही काट कर ले गए. चोर जिले में जल संसाधन विभाग के कर्मचारी बनकर आए और सबके सामने पुल को काटकर अपने साथ गाड़ी में भरकर ले गए.
रोहतास जिले में हुए इस घटनाक्रम के बाद राज्य की सत्तासीन नीतीश सरकार एक्शन में आ गई है. नीतीश सरकार ने फैसला लिया है कि वह प्रदेश के तमाम खाली पड़े लोहे के पुलों को स्क्रैप में बेच देगी.
सीएम ने जल संसाधन विभाग ने सभी संभागों के मुख्य अभियंताओं को अप्रयुक्त पुलों का आकलन करने को कहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी चोरी को रोकने में मदद मिल सके.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रोहतास में हुए पुल चोरी कांड के बाद बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने कहा, इस मामले में दो इंजीनियरों को ड्यूटी में लापरवाही बरतने के लिए निलंबित कर दिया है और मुख्य अधीक्षण इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद सरकार सभी जिलों से ऐसे पुलों की पहचान करने में जुट गई जहां पर इस तरह के लोहे के पुल हैं और वर्तमान में उसका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है.
संजय झा ने कहा कि सरकार इस तरह के पुलों को बेचकर कुछ राजस्व अर्जित करना चाहती है. साथ ही इस तरह की घटनाओं से बचना चाहती है.
क्या है रोहतास पुल मामला?
बता दें कि कुछ दिनों पहले रोहतास जिले में नकली अधिकारी बनकर आए चोरों ने तीन दिन में 60 फीट लंबे और 500 टन वजनी लोहे का पुल ही गायब कर दिया था. खास बात यह थी कि चोरों ने सिंचाई विभाग के कर्मचारियों से ही पुल कटवाया और गाड़ियों में भरकर उसका लोहा चुरा ले गए. घटना की जानकारी अधिकारियों और प्रशासन को अखबार और न्यूज साइट की खबरों से मिली, इसके बाद एक्शन लिया गया और 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया.