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बिहार में मध्यावधि चुनाव वाले तेजस्वी यादव के बयान के क्या हैं सियासी मायने

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से सोमवार को मध्यावधि चुनाव की तैयारी में जुटने का आह्वान करते हुए कहा कि जोड़तोड़ से बनी नीतीश सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेगी और 2021 में कभी भी चुनाव हो सकते हैं, जिसके लिए हमें तैयार रहना होगा. इतना ही नहीं तेजस्वी मकर संक्रांति के बाद बिहार में धन्यवाद यात्रा पर निकलने का ऐलान किया है. तेजस्वी के बयान के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार में जल्द ही टूट जाएगा बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन? 

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव
aajtak.in
  • नई दिल्ली ,
  • 23 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 5:30 PM IST
  • क्या बिहार में टूट जाएगा जेडीयू-बीजेपी गठबंधन
  • चिराग के बाद तेजस्वी ने दिए मध्यावधि चुनाव के संकेत
  • नीतीश कैबिनेट के विस्तार पर टिकी है विपक्ष की नजर

बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार के बने महज डेढ़ महीने हुए हैं और अभी से ही मध्यावधि चुनाव की चर्चा तेज हो गई है. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से सोमवार को मध्यावधि चुनाव की तैयारी में जुटने का आह्वान करते हुए कहा कि जोड़तोड़ से बनी नीतीश सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेगी और 2021 में कभी भी चुनाव हो सकते हैं, जिसके लिए हमें तैयार रहना होगा. इतना ही नहीं तेजस्वी मकर संक्रांति के बाद बिहार में धन्यवाद यात्रा पर निकलने का ऐलान किया है. तेजस्वी के बयान के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार में जल्द ही टूट जाएगा बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन? 

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हालांकि, जेडीयू और बीजेपी से लेकर जीतनराम मांझी तक ने तेजस्वी यादव के द्वारा दिए गए मध्यावधि चुनाव के बयान पर हमला बोला है. बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष संजय जायसवाल ने भी तेजस्‍वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी दिन में सपने देखते हैं, इसलिए इस तरह का बयान दे रहे हैं. तेजस्वी यादव मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं. वहीं, जेडीयू ने कहा ऐसे ही तेजस्वी पांच साल तक सपने ही देखते रहे. 

एनडीए के सहयोगी हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने तेजस्वी यादव के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि चुनाव होने की भविष्यवाणी से मैं पूरी तरह सहमत हूं, पर वह उपचुनाव होगा, ना का विधानसभा चुनाव. आरजेडी और कांग्रेस के कई विधायक हमारे साथ हैं. इन सभी के हमारे साथ आने पर तो उपचुनाव होंगे ही. मांझी ने कहा है कि 14 जनवरी तक इंतजार करें और फिर देखिएगा कि किन-किन सीटों पर उप चुनाव होंगे.

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बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार जिस तरह के नतीजे आए हैं, उसमें एनडीए को बहुमत से महज दो सीटें ही ज्यादा मिली हैं. बिहार के एनडीए गठबंधन में इस बार चार पार्टियां हैं, जिनमें बीजेपी और जेडीयू के अलावा मुकेश सहनी की वीआईपी और जीतनराम मांझी की HAM शामिल है. यही नहीं जेडीयू पहली बार बीजेपी से कम सीटें जीतकर आई है. वहीं, तेजस्वी के अगुवाई वाले महागठबंधन के पास कुल 110 विधायक हैं जबकि AIMIM के पांच और बाकी दलों से तीन एमएलए जीतकर आए हैं. ऐसे में कुछ विधायक इधर से उधर हुए तो बिहार का समीकरण ही बदल सकता. यही वजह है कि तेजस्वी यादव ही नहीं बल्कि चिराग पासवान भी आगामी चुनाव के लिए अभी से ही कमर कस रहे हैं.

दरअसल, नीतीश सरकार के डेढ़ महीने के बाद भी कैबिनेट का विस्तार नहीं हुआ है. नीतीश के साथ कुल 9 मंत्रियों ने शपथ ली थी, जिनमें एक ने इस्तीफा दे दिया है. माना जा रहा है कि अगले साल 14 जनवरी को खरमास खत्म होने के बाद ही नीतीश अपनी कैबिनेट का विस्तार करेंगे. ऐसे में तेजस्वी यादव यह मानकर चल रहे हैं कि नीतीश कैबिनेट विस्तार में जिन नेताओं को जगह नहीं मिलेगी, वो बागी रुख अपना सकते हैं. 

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हालांकि, एनडीए गठबंधन में बीजेपी की सबसे ज्यादा सीटें होने के चलते उन्हें नीतीश सरकार में सबसे ज्यादा मंत्री पद मिलने की उम्मीद है, लेकिन अभी तक कैबिनेट में किस दल की कितनी भागीदारी होगी, यह तय नहीं है. माना जा रहा है कि चार विधायकों की संख्या पर एक मंत्री मिल सकता है. ऐसे में विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 243 है, जिनमें से 15 प्रतिशत सदस्यों को मंत्री बनाने का प्रावधान है. यानी मुख्यमंत्री के अलावा 35 सदस्य कैबिनेट में रह सकते हैं.

एनडीए विधायकों की संख्या 125 है. अगर चार विधायक पर एक मंत्री बनने का फार्मूला लागू होता है तो 74 विधायकों वाली बीजेपी से 18-20 और 43 विधायकों वाली जेडीयू से 12-13 मंत्री बन सकते हैं. चार-चार विधायकों वाले दो दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और विकासशील इंसान पार्टी के एक-एक विधायक मंत्री बन चुके हैं. कैबिनेट विस्तार में सबसे बड़ी बाधा अभी तक फॉर्मूला तय नहीं होने के चलते ही है.

तेजस्वी यादव यह मानकर चल रहे हैं कि नीतीश कैबिनेट के विस्तार में जिन नेताओं को जगह नहीं मिलेगी वो बागी रुख अपनाकर उनके खेमे में आ सकते हैं. यही वजह है कि तेजस्वी यादव से लेकर चिराग पासवान तक मध्यावधि चुनाव की भविष्यवाणी कर रहे हैं. हालांकि, तेजस्वी इससे पहले भी कई बार कह चुके हैं कि नीतीश के नेतृत्व वाली सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी. 

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