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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को शराबबंदी को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. इसमें पिछले 2.5 सालों में देशी और विदेशी शराब की बरामदगी, वाहनों की जब्ती, शराब के धंधे में लिप्त लोगों की गिरफ्तारी, गिरफ्तार अभियुक्तों की प्रोफाइल, आपूर्तिकर्ता गिरोह, भंडारणकर्ता गिरोह, प्राप्तकर्ता गिरोह और वितरणकर्ता गिरोह पर समीक्षा की गई.
इसके अलावा अनुसंधान में प्रगति, सीमावर्ती जिलों एवं राज्यों पर स्थित चेक पोस्ट की स्थिति, शराब के आगत स्त्रोत, शराब विनष्टीकरण की मात्रा, गड़बड़ करने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों पर कार्रवाई सहित शराबबंदी से जुड़े अन्य कई मसलों पर भी विस्तृत समीक्षा की गई.
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में नीतीश कुमार ने कहा कि अधिकारियों को अब तक थाने या अन्य जगहों पर जो देशी और विदेशी शराब बरामद कर रखी गई है. उसे हर हाल में 30 सितंबर तक नष्ट करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. नीतीश ने निर्देश दिया कि शराब बरामद होने के 15 दिनों के अंदर उसे नष्ट करने की प्रक्रिया पूर्ण करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
बैठक के दौरान नीतीश ने कहा कि शराबबंदी के पूर्व जितने लोग शराब के धंधे में थे. उन पर निगरानी रखी जाए कि शराबबंदी लागू होने के बाद वो अब क्या कर रहे हैं? मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि शराबबंदी के कानून को लागू करने में अगर पुलिस गड़बड़ करती है तो SP तुरंत गड़बड़ करने वाले थानेदारों पर तत्काल कार्रवाई करें.
उन्होंने कहा कि शराबबंदी को लागू करने में गड़बड़ करने वाले पुलिस के खिलाफ प्रमाण मिलते हैं तो ऐसे लोगों को सरकारी सेवा में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि शराबबंदी को लेकर पुलिस महानिदेशक, गृह सचिव, आर्थिक अपराध इकाई नियमित रूप से मीटिंग करें. ताकि शराबबंदी से जुड़े अगर कोई मामला सामने आता है तो उसका निपटारा किया जा सके.
नीतीश ने इस बात को लेकर भी चिंता जताई कि वैशाली, छपरा और पटना जिले में नदी के माध्यम से शराब का आवागमन हो रहा है. उन्होंने निर्देश दिया कि इन जिलों के पुलिस अधीक्षक आपस में बैठक कर इस पर प्रतिबंध लगाएं.