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पूर्वी बिहार और झारखंड के हार्डकोर नक्सली सूरज मुर्मू ने किया सरेंडर, कहा- अब पढ़ना है

मुंगेर में पूर्वी बिहार और झारखंड के हार्ड कोर नक्सली सूरज मुर्मू ने पुलिस के सामने अपने हथियार के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. नक्सली ने कहा कि उसे अब ज्यादा अच्छा लग रहा है और अब वो ना सिर्फ अपने परिवार के साथ रहेगा बल्कि आगे की पढ़ाई भी करेगा जिसमें प्रशासन से उसे सहयोग का आश्वासन मिला है.

हार्डकोर नक्सली ने किया सरेंडर हार्डकोर नक्सली ने किया सरेंडर
गोविंद कुमार
  • मुंगेर,
  • 23 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 5:36 PM IST

पूर्वी बिहार और झारखंड के हार्डकोर नक्सली सूरज मुर्मू ने मुंगेर में एसएलआर और 28 कारतूस के साथ प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इस दौरान आयुक्त, डीआईजी, डीएम और एसपी भी मौजूद रहे. 

हार्डकोर नक्सली 9 कांडों का वांछित अभियुक्त था जिसकी खोज में पुलिस लगी हुई थी. सूरज मुर्मू चार सालों से जंगलों में अपना जीवन गुजार रहा था और इस दौरान उसकी अपने परिवार से भी मुलाकात नहीं हो पाई थी. इसके बाद उसने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया.  मुंगेर जिला प्रशासन ने उसके फैसले का स्वागत करते हुए पढ़ाई से लेकर तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ देने का वादा किया है.

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मुंगेर जिला पुलिस और एसएसबी 16 वाहिनी के द्वारा नक्सलियों को नक्सलवाद छोड़कर मुख्य धारा में लाने के कार्यक्रम के तहत पूर्वी बिहार और झारखंड के हार्ड कोर नक्सली सूरज सूरज मुर्मू ने यह आत्मसमर्पण किया.

अधिकारियों ने भी फूलों की माला पहना कर उसे इस काम के लिए सम्मनित किया. नक्सली सूरज मुर्मू  नौ नक्सली कांडों में शामिल था जिसमें दोहरे हत्या कांड से लेकर लेवी के लिए किडनैपिंग तक के मामले हैं. काफी दिनों से जिला पुलिस को उसकी तलाश थी.

हार्ड कोर नक्सली के आत्मसमर्पण करने के बाद मुंगेर के आयुक्त संजय कुमार सिंह ने कहा की आज जो नक्सली सूरज मुर्मू ने नक्सलवाद को छोड़ मुख्य धारा में जुड़ने के लिए हथियार और कारतूस के साथ समर्पण किया है, यह एक अच्छी पहल है, पुर्नवास योजना के तहत उन्हें अब कई सरकारी योजना का लाभ दिया जाएगा ताकि आने वाला दिनों में वो अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण ढंग से जीवन गुजार सकें. 

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वहीं डीआईजी संजय कुमार ने कहा, मुंगेर में भीम बांध के जंगल को नक्सलियों का सेफ जोन माना जाता था. अब सरकार और जिला प्रशासन के पहल पर भीम बांध फॉरेस्ट एरिया के अंदर और बाहर तीन-तीन पुलिस कैंप बन जाने से नक्सलियों की कमर ही टूट गई. इसके बाद अब नक्सलियों के पास दो ही विकल्प बचा या तो वे सरेंडर करें या फिर एनकाउंटर के लिए तैयार रहें.

वहीं आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली सूरज मुर्मू ने बताया की जब वो  22 साल का था और जंगल में लकड़ी काटने जाता था तो उसी समय नक्सलियों के द्वारा उसे ले जाया गया और उसके बाद वो नक्सली बन गया. उसे हथियार चलाने कि ट्रेनिंग भी दी गई. उसने कहा कि जंगल के जीवन और शहरी जीवन में काफी फर्क है.

नक्सली ने कहा- अब पढ़ाई करना है

मुर्मू ने बताया कि जब से नक्सली बना था तब से अपने घर नहीं गया था. अब उसने आत्मसमर्पण कर दिया है तो काफी अच्छा लग रहा है. साथ ही उसने कहा की अन्य नक्सलियों से भी वो कहना चाहते हैं कि वो मुख्यधारा से जुड़ें और अपने जीवन को बेहतर ढंग से बिताएं.

सूरज मुर्मू ने बताया कि वो आठवीं कक्षा तक पढ़ा हुआ है और अब मुख्य धारा में जुड़ने के बाद डीएम साहब ने आगे पढ़ाई कराने का आश्वासन दिया है. 

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