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बिहार: कोरोना की वजह से मानसिक तनाव, 6 माह के भीतर भागलपुर में 45 लोगों ने की खुदकुशी

आश्चर्य की बात यह कि इसमें अधिकतर डिप्रेशन के शिकार थे, जबकि आर्थिक तंगी के कारण डिप्रेशन में जाने और आत्महत्या करने वालों की फेहरिस्त भी सबसे लंबी है. हालांकि इसमें कुछ लोगों ने पारिवारिक कलह के कारण भी आत्महत्या की है.

कोरोना की वजह से मानसिक तनाव (तस्वीर: सांकेतिक) कोरोना की वजह से मानसिक तनाव (तस्वीर: सांकेतिक)
aajtak.in
  • भागलपुर,
  • 01 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST
  • भागलपुर से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए
  • 25 मार्च से 30 सितंबर तक 45 लोगों ने की आत्महत्या
  • आर्थिक तंगी के कारण कई लोग अवसाद में जी रहे हैं

कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन के दौरान बिहार के भागलपुर जिले से कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. भागलपुर में  25 मार्च से 30 सितंबर तक यानी लॉकडाउन से लेकर अनलॉक तक की बात करें तो तकरीबन 45 लोगों ने आत्महत्या कर ली है. 

दरअसल, आत्महत्या करने वालों में अधिकतर युवा शामिल हैं. इन सब के बीच आश्चर्य की बात यह है कि इसमें अधिकतर डिप्रेशन के शिकार थे, जबकि आर्थिक तंगी के कारण डिप्रेशन में जाने और आत्महत्या करने वालों की फेहरिस्त भी लंबी है. हालांकि इसमें कुछ लोगों ने पारिवारिक कलह के कारण भी आत्महत्या की है. 

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जिले में लगातार बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं से आम लोगों के साथ ही जिला प्रशासन बेचैन है. इस संदर्भ में जेएलएनएमसीएच में कार्यरत डॉ कुमार सौरभ ने बताया कि आर्थिक तंगी और मानसिक रूप से तनाव होने के कारण लोग अवसाद में जी रहे हैं. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण कई लोगों को नौकरी और व्यापार में नुकसान हुआ है.

उन्होंने कहा कि छात्रों की पढ़ाई भी इस दौरान बाधित हुई और अचानक परीक्षा आयोजित होने लगी जिससे लोग डिप्रेशन में हैं. उन्होंने कहा कि डिप्रेशन में गए लोगों को सकरातमक माहौल मिलना भी अतिआवश्यक है.

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में पीजी मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो सच्चिदानंद चौधरी ने जिले में हो लगातार हो रही आत्महत्या की घटनाओं पर बताया कि आम लोग जहां आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या कर रहे हैं, वहीं छात्रों की आत्महत्या का एक कारण ऑनलाइन पढ़ाई भी है.

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उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण कई लोगों की पढ़ाई बंद हो गई थी, लेकिन एकाएक परीक्षा होने से कई छात्र तनाव में होंगे. जबकि ऑनलाइन पढ़ाई भी समान्य छात्रों से संभव नहीं हो पाती है. लेकिन दवाब होने से छात्र आत्महत्या का रास्ता चुनते हैं, जो सर्वथा गलत है.

(रिपोर्ट: राजीव सिद्धार्थ)

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