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'सीमांचल के लिए मोदी और नीतीश सरकार ने कुछ नहीं किया', ओवैसी ने लगाए गंभीर आरोप

बिहार में सीमांचल को लेकर सियासत तेज होती जा रही है. सभी राजनीतिक पार्टियों की नजर सीमांचल पर है. यहां अमित शाह ने रैली की. अब असदुद्दीन ओवैसी शनिवार को दो दिन के लिए इस क्षेत्र के दौरे पर पहुंच गए. यहां विकास न होने पर उन्होंने मोदी और नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला.

असदुद्दीन ओवैसी दो दिन के लिए सीमांचल दौरे पर पहुंचे असदुद्दीन ओवैसी दो दिन के लिए सीमांचल दौरे पर पहुंचे
aajtak.in
  • पूर्णिया,
  • 18 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 3:21 PM IST

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी शनिवार को बिहार के अमौर में कहा, हम सीमांचल का मुद्दा उठाते रहे हैं. यह हर मामले में सबसे पिछड़ा क्षेत्र है. यहां रासेली पुल का निर्माण अधर में लटका हुआ है. यहां एयरपोर्ट की जरूरत है. यहां रेलवे लाइनों की जरूरत है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि न मोदी सरकार और ना ही राज्य सरकार ने इस क्षेत्र के लिए कुछ किया. उन्होंने कहा कि सीमांचल की दुर्दशा है कि यहां से चुने हुए लोग सत्ता में आने के बाद विकास से समझौता कर लेते हैं. अगर हर तीन किमी. पर गंगा नदी पर पुल बन सकते हैं तो यहां क्यों नहीं? ओवैसी सीमांचल के दो दिवसीय दौरे पर हैं. वह शनिवार को अमौर विधानसभा क्षेत्र के रसेली घाट पहुंचे.

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एमआईएमआईएम चीफ ने कहा कि सभी पार्टियों ने तकनीकी रूप से सीमांचल को संकट में डालने के लिए मजबूर किया है. हम सीमांचल के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. हम कोई एनजीओ नहीं हैं. हम आगामी चुनाव लड़ेंगे और जनता जवाब देगी. उन्होंने कहा कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद अडानी स्टॉक क्रैश हो गया तो फिर इस मामले में जांच बैठाने में सरकार को समस्या क्या है? उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को राज्य के बाहर कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और यहां सरकार के पास आंकड़े तक नहीं हैं.

सीमांचल के साथ नहीं हुआ न्याय

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ओवैसी ने बायसी में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने 22 साल तक बीजेपी का साथ दिया और आज उन्हें बीजेपी का बी टीम कहा जा रहा है.  उन्होंने कहा कि सीमांचल के चार विधायकों को लालू के बेटे ने खरीद लिया लेकिन सीमांचल के साथ न्यास नहीं हुआ. 

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2020 में ओवैसी की पार्टी को सीमांचल इलाके की सीटों पर जीत मिली थी. ऐसे में ओवैसी का बिहार में सारा सियासी दारोमदार मुस्लिम बहुल सीमांचल पर ही टिका है, जिसे बचाए रखने के लिए उतर रहे हैं. हालांकि बिहार में सियासी बदलाव के वक्त AIMIM के पांच में से चार विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे.

यह है सीमांचल का सियासी समीकरण 

सीमांचल क्षेत्र में 4 लोकसभा और 24 विधानसभा सीटें आती हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू को दो सीटों पर जीत हासिल की थी और बीजेपी ने एक सीट पर कब्जा किया था जबकि एक सीट कांग्रेस के पास गई थी. 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सीमांचल की आठ, कांग्रेस ने पांच और जेडीयू ने चार सीटें जीती थीं. आरजेडी और भाकपा माले को एक-एक सीट मिली थीं. एआईएमआईएम ने पांच सीटें जीती थीं, जिनमें से चार पिछले साल आरजेडी में शामिल हो गए हैं. ऐसे में आरजेडी के पांच और ओवैसी की पार्टी के एक विधायक सीमांचल में है. 

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