Advertisement

'दीन बचाओ देश बचाओ' रैली पर नीतीश सरकार ने खर्च किए 40 लाख

पटना के गांधी मैदान में लाखों मुसलमान एकजुट हुए थे. मुस्लिम उलेमाओं ने सांप्रदायिकता के नाम पर जमकर पीएम नरेंद्र मोदी को कोसा और मुसलमानों की समस्या के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया था. नीतीश सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए 40 लाख रुपये आवंटित किए थे.

दीन बचाओ देश बचाओ कार्यक्रम दीन बचाओ देश बचाओ कार्यक्रम
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST

बिहार के मुसलमानों के सबसे बड़े संगठन इमारत ए शरिया ने पिछले दिनों 'दीन बचाओ देश बचाओ' कार्यक्रम किया था. पटना के गांधी मैदान में लाखों मुसलमान एकजुट हुए थे. मुस्लिम उलेमाओं ने सांप्रदायिकता के नाम पर जमकर पीएम नरेंद्र मोदी को कोसा और मुसलमानों की समस्या के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया था. नीतीश सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए 40 लाख रुपये आवंटित किए थे.

Advertisement

बिहार के पटना के गांधी मैदान में रविवार को 'दीन बचाओ देश बचाओ' कार्यक्रम के लिए नीतीश सरकार द्वारा आवंटित किए गए राशि का पत्र आजतक के पास है. इस पत्र में बिहार सरकार के अवर सचिव राधा नंदन प्रसाद ने 40 लाख रुपये आवंटित किए थे. ये धन पटना के जिला अधिकारी को दिए गए थे. इस पैसे का खर्च 'दीन बचाओ देश बचाओ' रैली में आने वाले लोगों की भीड़ प्रबंधन, विधि व्यवस्था और सुविधाओं के लिए आवंटित किया गया.

'दीन बचाओ देश बचाओ' कार्यक्रम का अयोजन इमारत ए शरिया ने किया था. राज्य के मुसलमानों द्वारा शुरू से जेडीयू द्वारा आयोजित कराने का इल्जाम लगाया जाता रहा है. ये बात तब और पुख्ता हो गई जब कार्यक्रम के मंच से बीजेपी को जहां कोसा गया वहीं जेडीयू की तारीफ की गई. कार्यक्रम के लिए नीतीश कुमार की ओर से सहयोग दिए जाने का शुक्रिया अदा किया गया. इतना ही नहीं इस बात पर तब मुहर लग गई जब कार्यक्रम का तंबू भी नहीं उखड़ा था कि 'दीन बचाओ देश बचाओ' के कन्वेनर खालिद अनवर को नीतीश कुमार ने एमएलसी के तोहफे से नवाज दिया.

Advertisement

गौरतलब है कि इमारत ए शरिया और जेडीयू के रिश्ते जगजाहिर हैं. जेडीयू के नीतीश कुमार का आरजेडी से नाता तोड़कर बीजेपी संग दोबारा जाना बिहार के मुसलमानों को हजम नहीं हो रहा है. इसी के चलते मुसलमान आरजेडी के साथ जाता दिख रहा था. इसी के चलते जेडीयू नेताओं के लिए परेशानी का सबब बनी हुई थी. इसी मद्देनजर जेडीयू ने दीन बचाओ देश बचाओ कार्यक्रम का ताना बुना. इसी के चलते जेडीयू से जुड़े लोग कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए दिन रात एक किए हुए थे. जेडीयू नेताओं ने रैली के लिए जगह-जगह होर्डिंग और पोस्टर भी लगाए थे, जिसके तहत मुसलमानों से लाखों की तादाद में गांधी मैदान में पहुंचने की अपील की गई थी.

रैली के पीछे जेडीयू के होने की उस समय हकीकत साबित हुई जब कार्यक्रम के बाद ही नीतीश कुमार ने दीन बचाओ देश बचाओ के कन्वेनर खालिद अनवर को एमएलसी बनाने की घोषणा कर दी. एमएलसी बनाए जाने की बात आते ही बिहार के मुसलमानों की नाराजगी सामने आने लगी. राज्य में कई जिलों में मौलाना वली रहमानी सहित कार्यक्रम से जुड़े हुए लोगों के खिलाफ मुसलमानों ने सौदेबाजी का इल्जाम लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया.

इमारत ए शरिया के अध्यक्ष अनीसुर रहमान कासमी का एक वीडियो भी सामने आया है. इसके तहत कासमी साफ तौर पर कहते दिख रहे हैं कि इस कार्यक्रम का मकसद ही राजनीतिक था.

Advertisement

हालांकि कार्यक्रम का उद्देश्य हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द और भाईचारे के खिलाफ खड़ी ताकतों के खिलाफ लोगों को सचेत करना था. पर उलेमा अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने से बाज नहीं आए. इसीलिए बिहार का मुसलमान अपने आपको 'दीन बचाओ देश बचाओ' के कार्यक्रम में ठगा हुआ महसूस कर रहा है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement