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बिहार में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार का गठन होने जा रहा है. नीतीश सोमवार को सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन इस बार बीजेपी कोटे से डिप्टी सीएम सुशील मोदी के बजाय तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को बनाया जा सकता है. तारकिशोर को बीजेपी विधायक दल का नेता और रेणु देवी को उपनेता चुना गया है, राजनाथ सिंह ने इन दोनों नाम का ऐलान किया है. ऐसे में आइए जानते हैं कौन है तारकिशोर और रेणु देवी, जिन्हें बीजेपी अहम पद की जिम्मेदारी देकर नीतीश का डिप्टी बनाने जा रही है?
तारकिशोर प्रसाद
बिहार के सीमांचल इलाके से आने वाले तारकिशोर प्रसाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. कटिहार सीट से चौथी बार विधायक चुने गए हैं. वो सुशील मोदी के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं और वैश्य समुदाय से आते हैं. 64 साल के तारकिशोर ने अपना राजनीतिक जीवन अखिल विद्यार्थी परिषद से शुरू किया और संघ से भी जुड़े रहे हैं. हालांकि, वो 12वीं तक ही शिक्षा ग्रहण कर सके हैं, लेकिन पार्टी के तेज तर्रार नेताओं में गिने जाते हैं.
तारकिशोर प्रसाद पहली बार अक्टूबर 2005 के चुनाव में विधायक चुने गए, जिसके बाद उन्होंने पलटकर नहीं देखा. उन्होंने इस बार आरजेडी के डॉ राम प्रकाश महतो को 12 हजार वोटों से हराकर कटिहार सीट से लगातार चौथी बार चुनाव में जीत दर्ज की है. 2015 में लालू और नीतीश की मजबूत जोड़ी भी तारकिशोर प्रसाद के दुर्ग को भेद नहीं सकी थी. इस बार बीजेपी ने सीमांचल के इलाके में अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसके चलते पार्टी उन्हें विधायक दल का नेता बनाकर अहम जिम्मेदारी सौंपने जा रही है.
विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद तारकिशोर प्रसाद ने आजतक से खास बातचीत में कहा कि पार्टी की तरफ से जो जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे निभाएंगे. वह बाल्यकाल से सभी जिम्मेदारियों को निभाते आए हैं. उन्होंने कहा कि एबीवीपी के साथ काम करने के दौरान भी मिली जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है. रोजगार और अन्य चुनौतियों के सवाल पर उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में हम सब काम करेंगे और उनके अनुभव का इस्तेमाल करेंगे.
रेणु देवी
दुर्गावाहनी से राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाली बीजेपी विधायक रेणु देवी ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद तक रहीं. अतिपिछड़ा समुदाय की नोनिया जाति से आने वाली रेणु देवी का जन्म 1 नवंबर 1959 को हुआ और बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गईं. साल 1981 में रेणु देवी का सामाजिक जीवन में पदार्पण हुआ. चंपारण और उत्तर बिहार को कार्यक्षेत्र बनाकर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हक की लड़ाई शुरू किया और साल 1988 में बीजेपी की दुर्गावाहिनी की जिला संयोजक बनीं.
साल 1989 में बीजेपी महिला मोर्चा की चंपारण क्षेत्र की अध्यक्ष चुनी गईं. रेणु देवी को 1990 में तिरहुत प्रमंडल में महिला मोर्चा का प्रभारी बनाया गया और 1991 में प्रदेश महिला मोर्चा की महामंत्री बनीं. वे 1992 में जम्मू कश्मीर तिरंगा यात्रा में शामिल हुईं और 1993 में बीजेपी बिहार प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष चुनी गई.1996 में फिर महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनी और 2014 में बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली.
साल 1995 के चुनाव में पहली बार नौतन विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया, लेकिन जीत नहीं सकीं. साल 2000 में बेतिया विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी ने टिकट दिया और करीब दस हजार मतों से जीतकर पहली बार विधायक चुनी गईं. इसके बाद 2005 में फरवरी और अक्टूबर चुनाव में फिर बेतिया से जीतकर विधानसभा पहुंची.
2007 में बिहार सरकार में कला एवं संस्कृति मंत्री बनीं और 2010 चुनाव में बेतिया से जीत हासिल की, लेकिन 2015 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के हाथों मात खा गईं. हालांकि, 2020 में एक बार फिर बेतिया सीट से ही जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचीं तो पार्टी ने उन्हें विधायक दल का उपनेता चुना है और डिप्टी सीएम की रेस में भी वो शामिल हैं.