Advertisement

बिहार की सत्ता पूरी तरह से राजद के हाथ में इसलिए हो रही जंगलराज की वापसी: प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने मीडिया संवाद कार्यक्रम के दौरान बिहार में बढ़ रहे अपराध से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जब से महागठबंधन बना है, उसके बाद जनता के मन में ये चिंता बनी हुई थी कि बिहार में लॉ एंड आर्डर की स्थिती बिगड़ेगी. प्रशांत किशोर ने जातीय जनगणना के सवाल पर कहा कि जातीय जनगणना प्रशासनिक गतिविधि है, क्योंकि जातीय जनगणना का संवैधानिक आधार नहीं है.

प्रशांत किशोर-फाइल फोटो प्रशांत किशोर-फाइल फोटो
रोहित कुमार सिंह
  • पटना,
  • 17 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 5:59 PM IST

जन सुराज पदयात्रा के 139वें दिन की शुरुआत सिवान के मैरवा प्रखंड अंतर्गत बड़का मांझा पंचायत स्थित पदयात्रा शिवर में सर्वधर्म प्रार्थना से हुई. उसके बाद प्रशांत किशोर ने स्थानीय मीडिया से संवाद किया. मीडिया संवाद के दौरान उन्होंने अपने पदयात्रा का अनुभव साझा किया. आपको बता दें कि जन सुराज पदयात्रा पर निकले प्रशांत किशोर 2 अक्तूबर 2022 से लगातार पदयात्रा के माध्यम से बिहार के गांवों में दौरा कर रहे हैं. उनकी पदयात्रा अबतक 1600 किमी से अधिक की दूरी तय कर चुकी है. 

Advertisement

पश्चिम चंपारण से शुरू हुई पदयात्रा शिवहर, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज होते हुए पिछले 12 दिनों से सिवान जिले में है. सिवान में पदयात्रा अभी 15 से 20 दिन और चलेगी और इस दौरान अलग-अलग गांवों और प्रखंडों से गुजरेगी. पदयात्रा के दौरान प्रशांत किशोर लोगों की समस्यायों को सुनते हैं और उसका संकलन करते हैं. साथ ही वे समाज के सभी सही लोगों को एक मंच पर आकर विकसित बिहार बनाने के लिए एक नई राजनीतिक व्यवस्था बनाने का भी आह्वान करते हैं. 

बिहार की सत्ता पूरी तरह से राजद के हाथ में इसलिए बढ़ रहा अपराध
प्रशांत किशोर ने मीडिया संवाद कार्यक्रम के दौरान बिहार में बढ़ रहे अपराध से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जब से महागठबंधन बना है, उसके बाद जनता के मन में ये चिंता बनी हुई थी कि बिहार में लॉ एंड आर्डर की स्थिती बिगड़ेगी. वो चिंता इसीलिए थी क्योंकि बिहार में RJD के शासनकाल में लोगों ने अपराधियों का जंगलराज देखा है. आज जब RJD फिर से सत्ता में वापस आ गई है और बिहार की सत्ता की पूरी कमान राजद के हाथ में चली गई है. स्वभाविक तौर पर अपराधिक घटनाएं बढ़ेंगे, यह उनकी पार्टी का चरित्र बन है. यह 15 साल बिहार की जनता ने खुद देखा है, जब भी ये लोग सत्ता में आते हैं तो अपराध की घटनाएं बढ़ जाती है और अभी भी वही हो रहा है.

Advertisement

जातीय जनगणना समाज में उन्माद फैलाने की कोशिश
प्रशांत किशोर ने जातीय जनगणना के सवाल पर कहा कि जातीय जनगणना प्रशासनिक गतिविधि है, क्योंकि जातीय जनगणना का संवैधानिक आधार नहीं है. जनगणना केंद्र का विषय है तो राज्यों के पास ये अधिकार नहीं है की वो संवैधानिक आधार पर जनगणना करा सके, इसलिए बिहार सरकार ने जो अधिसूचना जारी की है उसमें इसे गणना (सर्वे) कहा गया है. 

असल मुद्दा ये है कि जो इस गणना को करवा रहे हैं, उनका मकसद पिछड़े वर्गों को लाभ पहुंचना नहीं है, वो तो इसके सहारे राजनीतिक ध्रुवीकरण और समाज को जातीय आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं. दलितों और मुसलमानों की गणना तो आजादी के बाद से लगातार हो रही है, लेकिन उनकी बदहाली किसी से छिपी नहीं है. गणना से कोई लाभ तभी होगा जब इसको आधार बनाकर पिछड़े वर्गों के लिए कोई योजना बने. जो लोग ये सोच रहे हैं कि गणना मात्र से ही उनकी स्थिति सुधर जाएगी तो ये भ्रम फैलाया जा रहा है. जातीय जनगणना के माध्यम से समाज में उन्माद फैलाकर उसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है. 

बिहार की शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त
मीडिया संवाद के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है. बिहार की जनता इस बात को स्वीकार कर चुकी है कि बिहार में विद्यालयों और कॉलेज की भूमिका बस खिचड़ी, डिग्री बांटने की है. बिहार में समतामूलक शिक्षा व्यवस्था बनाने के चक्कर में हर गांव, हर पंचायत में स्कूल खोल दिया गया, लेकिन उसके बाद उसकी गुणवत्ता और उसकी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया गया. 

Advertisement

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के 17 साल के कालखंड में शिक्षा व्यवस्था का ध्वस्त हो जाना उनके शासन का सबसे बड़ा काला अध्याय है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि अगर सड़क आज टूटी हुई है, तो कल एक अच्छी सरकार आ जाएगी तो शायद वह सड़क बन जाए. लेकिन 2 पीढ़ियां जो शिक्षा व्यवस्था से पढ़कर निकल गई, अब अगर अच्छी सरकार भी आ जाएगी, तब भी वह लोग अपने आपको फिर से शिक्षित नहीं कर पाएंगे. 2 पीढ़ियों को पूरे जीवन भर शिक्षित समाज के पीछे ही चलना पड़ेगा, इसलिए यह नीतीश कुमार के शासनकाल का सबसे बड़ा काला अध्याय है.
 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement