
बिहार पुलिस में पुलिस अधीक्षक (मध निषेध) राकेश कुमार सिन्हा की तरफ से 6 जनवरी को लिखे गए एक पत्र के कारण नीतीश कुमार सरकार की फजीहत हो गई है. 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी राकेश कुमार सिन्हा ने 6 जनवरी को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक (रेलवे) से कहा था कि वह मध निषेध विभाग के अधिकारियों की चल और अचल संपत्ति की जांच करें.
राकेश कुमार सिन्हा ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि बिहार में शराबबंदी के बावजूद भी मद्य निषेध विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और पुलिस के शराब माफिया के साथ साठगांठ करके अवैध तरीके से शराब खरीद फरोख्त का धंधा चला रहे हैं.
राकेश कुमार सिन्हा ने पत्र में लिखा, “बिहार के सभी थाना क्षेत्र में चोरी-छिपे उत्पाद विभाग में कार्यरत निरीक्षक, अवर निरीक्षक एवं आरक्षी को बढ़ावा देकर लोग शराब खरीद बिक्री का धंधा कर रहे हैं और इस कार्य में स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल होने के वजह से प्रशासन बिहार सरकार द्वारा प्रतिबंधित शराब खरीद बिक्री पर कानून का खुले रूप से मजाक उड़ा रहे हैं”.
उन्होंने आगे लिखा, “बिहार के उत्पाद विभाग में कार्यरत निरीक्षक, अवर निरीक्षक और आरक्षी के रिश्तेदारों की चल-अचल संपत्तियों का जांच कराई जाए तो इन लोगों द्वारा गुमनाम कितनी संपत्ति अर्जित की गई है, इससे सरकारी महकमे में हलचल मच जाएगी”
लेकिन राकेश कुमार सिन्हा को यह पत्र लिखना महंगा पड़ गया. नीतीश कुमार सरकार ने उनके इस पत्र पर संज्ञान लेने के बजाय उनका तबादला 19 जनवरी को स्पेशल ब्रांच में कर दिया. राकेश कुमार सिन्हा के तबादले को लेकर इसी दिन एक अधिसूचना जारी की गई थी.19 जनवरी को ही पुलिस विभाग ने उनके द्वारा जारी किए गए पत्र को भी निरस्त कर दिया. विभाग ने उस डीएसपी को भी शो कॉज नोटिस जारी किया जिसने इस पत्र को ड्राफ्ट और जारी किया था.
इस मामले को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि बिहार में शराबबंदी का सच दिखाने वाले एसपी का तबादला करवा देना नीतीश कुमार का असली चेहरा दिखलाता है.