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'नीतीश के करीब रहने वाले पीते हैं शराब, शराबबंदी कानून को 48 घंटे में वापस ले सरकार..,' बोले प्रशांत किशोर

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा है कि बिहार में नीतीश कुमार के करीबी शराब पीते हैं. उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून को सरकार 48 घंटे में वापस ले. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को एक रेगुलेटेड फ्रेमवर्क में शराब की उपलब्धता करानी चाहिए, न कि जबरन शराबबंदी लागू करना चाहिए.

प्रशांत किशोर ने साधा नीतीश पर निशाना. प्रशांत किशोर ने साधा नीतीश पर निशाना.
सुजीत झा
  • पटना,
  • 15 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 10:52 PM IST

बिहार के सारण जिले में जहरीली शराब पीने से 48 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, इस मसले पर सियासत भी खूब हो रही है. नीतीश कुमार कह चुके हैं कि पियोगे तो भुगतोगे. इस मामले पर भाजपा सरकार पर हमलावर है. उधर, बीजेपी पर शराबबंदी कानून को लेकर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोन ने हमला बोला है.

प्रशांत किशोर ने 48 घंटे के भीतर शराबबंदी कानून को रद्द करने की मांग की है. उन्होंने बिहार सरकार के साथ महागठबंधन नेताओं पर भी हमला बोला. पीके ने नीतीश के अलावा तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश कुमार के करीब रहने वाले लोग ही शराब पीते हैं.

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पीके ने छपरा की घटना पर दुख जताया और शराबबंदी को एक विफल योजना बनाते हुए इसे 48 घंटे के भीतर रद्द करने की मांग की. उन्होंने भाजपा, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव तीनों पर निशाना साधा और सबको शराबबंदी की विफलता के लिए जिम्मेदार ठहराया.

BJP भी पहले शराबबंदी का करती रही समर्थन

पीके ने कहा कि शराबबंदी पर सबसे पहली मुखर आवाज हमने ही उठाई है. बीजेपी के लोग जो आज विधानसभा में हंगामा कर रहे हैं, जेडीयू के साथ 5 वर्ष साथ रहकर शराबबंदी का समर्थन करते रहे.

बीजेपी को घेरते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि अब कोई बीजेपी से सवाल नहीं कर रहा कि जब आप सरकार में थे. आपने शराबबंदी के लिए हटाने के लिए क्या काम किया. प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में जितने भी दल हैं, उन्हें शराबबंदी को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए.

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नीतीश के इर्द-गिर्द रहने वाले अफसर शराब पीते हैं

तेजस्वी यादव को आड़े हाथ लेते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जब आरजेडी और तेजस्वी यादव विपक्ष में थे, तब शराबबंदी पर नीतीश सरकार को घेर रहे थे. अब ये खुद सरकार चला रहे हैं तो इन्हें शराबबंदी सही लग रही है.

पीके ने कहा कि नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द रहने वाले लोग खुद शराब पीते हैं, और फिर नीतीश कुमार के सामने लंबी-लंबी बाते करते हैं. जो भी नीतीश कुमार को जानते हैं, वे सब इस बात से परिचित हैं कि उनके इर्द-गिर्द जो अफसर रहते हैं, वे शराब पीते हैं.

बीच का रास्ता निकालते हुए नियम से शराब उपलब्ध कराए सरकार

प्रशांत किशोर ने कहा कि बड़ी हास्यास्पद बात है कि किसी राज्य का मुख्यमंत्री किसी जिले के डीएम एसपी को बुलाकर कहते हैं कि आप कसम खाइये कि आप शराब का कारोबार करने वाले लोगों को पकड़कर कार्रवाई करेंगे.

पीके ने बिहार सरकार से 48 घंटे के भीतर ये कानून वापस लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि पहले नीतीश कुमार ने पंचायत स्तर तक शराब की दुकान खुलआईं. सरकार को बीच का रास्ता निकालते हुए एक रेगुलेटेड फ्रेमवर्क में शराब की उपलब्धता करानी चाहिए, न कि डंडे के बल पर शराबबंदी लागू करना चाहिए. रेगुलेटेड होना चाहिए, ताकि जो मामले आ रहे हैं, वह थम सकें.

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नशामुक्ति जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत

पीके ने कहा कि सामाजिक स्तर पर सरकार को नशामुक्ति जागरूकता अभियान चलाने का प्रयास करते रहना चाहिए. पीके ने इस दौरान तेजस्वी को कमान सौंपने वाली बात भी हमला बोला. पीके ने कहा कि नीतीश कुमार का राजतंत्र है क्या? जो वह कहेंगे, उनके अनुसार सब हो जाएगा. 

उन्होंने कहा कि 2025 में नहीं, बल्कि नीतीश कुमार को तेजस्वी यादव को अभी कमान सौंप देनी चाहिए, ताकि जनता तीन साल में तेजस्वी यादव द्वारा चलाई गई सरकार का बेहतर ढंग से आंकलन कर सके और जब 2025 के चुनावों में हो तो जनता इस आधार पर वोट करे कि तेजस्वी यादव ने बेहतर काम किया है कि नहीं. प्रशांत किशोर ने कहा कि अभी तेजस्वी यादव जिन विभागों को चला रहे हैं, उनके हालात से सभी रूबरू हैं.

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