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यूरिया चाहिए तो आधार कार्ड लाइए, दर-दर भटकने को मजबूर 5 लाख किसान

मानसून के पहले अचानक आधार कार्ड की अनिवार्यता किये जाने से उन्हें सरकारी दुकानों से ना तो यूरिया मिलेगा और ना ही जी-कोटेड यूरिया खाद मिलेगी. इससे अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि कई किसान समय पर अपनी फसल की बुआई नहीं कर पाएंगे. फिलहाल किसान अपना खेत खलियान छोड़ आधार कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. 

सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं किसान
सुनील नामदेव
  • रायपुर,
  • 30 मई 2018,
  • अपडेटेड 1:30 AM IST

आधार कार्ड को भले ही सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य ना माना हो. लेकिन छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है. राज्य के कृषि विभाग की दलील है कि किसानों की भलाई के लिए यह कदम उठाया गया है, क्योंकि इससे यूरिया की कालाबाजारी में प्रभावी रोक लग सकेगी.

दूसरी ओर किसान, सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. उनकी दलील है कि मानसून के पहले अचानक आधार कार्ड की अनिवार्यता किये जाने से उन्हें सरकारी दुकानों से ना तो यूरिया मिलेगा और ना ही जी-कोटेड यूरिया खाद मिलेगी. इससे अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि कई किसान समय पर अपनी फसल की बुआई नहीं कर पाएंगे. फिलहाल किसान अपना खेत खलियान छोड़ आधार कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं.  

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छत्तीसगढ़ के महासमुंद के तहसील ऑफिस में आधार कार्ड बनवाने के लिए किसान चक्कर लगा रहे है. उन्हीं में से एक रामबरन के मुताबिक वो पिछले दो दिनों से अपना मूल निवास और जन्म प्रमाण पत्र लेकर पहचान पत्र के साथ यहां आ रहे हैं, ताकि उसका आधार कार्ड बन सके. लेकिन सरकारी अफसर यह कहकर चलता कर रहे हैं कि इसके लिए उन्हें अपने इलाके के ब्लॉक ऑफिस जाना होगा.

रामबरन के मुताबिक इसके पहले उन्होंने गावं के ब्लॉक ऑफिस में पहुंच कर आधार कार्ड बनाने की गुहार लगाई थी. लेकिन वहां के कर्मियों ने उनका आधार कार्ड बनाने से यह कहकर इंकार कर दिया कि उनके पास कोई सुविधा नहीं है. लिहाजा उन्हें इसके लिए जिला मुख्यालय जाना होगा. रामबरन इसके लिए कलेक्टर दफ्तर भी गए और यहां की तहसील ऑफिस में भी, लेकिन आधार कार्ड नहीं बन सका. अब उन्हें एक नई जगह चॉइस सेंटर भेजा गया है और कहा गया है कि वहीं पर उनका आधार कार्ड बनेगा.

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रामबरन काफी चिंतित है क्योंकि मानसून जल्द दस्तक देने वाला है और उन्हें बुआई के लिए यूरिया और खाद्य का इंतजाम करना है, जो कि आधार कार्ड के बिना मिल पाना मुमकिन नहीं है.

राज्य के 27 जिलों में विभिन्न सहकारी समितियों में पंजीकृत किसानो की संख्या 80 लाख के लगभग है. जबकि गैर पंजीकृत किसानों की संख्या 8 लाख से ज्यादा है. ऐसे में अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि पांच लाख से ज्यादा अभी भी ऐसे किसान है जिनके पास अपना आधार कार्ड नहीं है. ये किसान मुसीबत में घिरते नजर आ रहे हैं. आधार कार्ड बनाने को लेकर उनके गांव में कोई बंदोबस्त भी नहीं है. ऐसे किसानों को जिला मुख्यालय या ब्लॉक मुख्यालय का रुख करना पड़ता है.

राज्य के कृषि विभाग ने अचानक फरमान जारी किया है कि अब किसानों को बगैर आधार कार्ड के यूरिया मुहैया नहीं होगा. सरकारी दुकानों से उन्हें रिआयती दरों पर मुहैया होने वाली खाद भी तब उपलब्ध होगी जब वे वहां अपना आधार कार्ड जमा कराएंगे. किसानों के लिए आधार कार्ड उस समय अनिवार्य किया गया है,,

मानसून से पहले मुसीबत

राज्य में मानसून के दस्तक देने में मात्र दो हफ्ते से भी कम का समय शेष बचा है. लिहाजा किसान पशोपेश में हैं. आखिर वो अचानक कहां से अपना आधार कार्ड लायें. हालांकि आधार कार्ड के अनिवार्य किये जाने के बाद किसान अपना खेत खलियान छोड़ सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं.

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कई जिलों में रोजाना सैकड़ों की तादाद में किसान कभी कलेक्टर के दफ्तर के तो कभी तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों में दस्तक दे रहे हैं. लेकिन यहां आधार कार्ड नहीं बनाये जाने की जानकारी देकर उन्हें चलता कर दिया जा रहा है. चॉइस सेंटर कहां है, इसकी भी पुख्ता जानकारी उन्हें नहीं दी जा रही है. आमतौर पर चॉइस सेंटर शहरी इलाकों, जिला और ब्लॉक मुख्यालयों में ही है. गांव कस्बो में उनका नामो निशान तक नहीं है.

राज्य के कृषि विभाग ने पुरानी व्यवस्था में बदलाव कर आधार कार्ड अनिवार्य किये जाने को लेकर अपनी दलील भी दी है. उसके मुताबिक यूरिआ खाद किसानों के लिए ही बनाई जाती है. लिहाजा उसका उपयोग केवल किसान ही कर सके. इसके लिए आधार कार्ड अनिवार्य किया गया है.

कृषि विभाग के मुताबिक मानसून आते ही यूरिया की कालाबाजारी शुरू हो जाती है. कई इलाकों में बिचौलिए और मुनाफाखोर यूरिया का स्टॉक कर लेते हैं और किसानों को जरूरत पड़ने पर मुंह मांगी कीमत पर बेचते हैं. आधार कार्ड के अनिवार्य किये जाने से अब यूरिया बिचौलियों के हाथ नहीं लगेगी.

कालाबाजारी पर रोक के लिए कदम

राज्य के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मुताबिक 99 फीसदी किसानों के पास उनका आधार कार्ड है. वो बताते हैं कि ज्यादतार किसान सोसायटी में रजिस्टर्ड हैं और ऋण भी लेते है इसलिए उनका आधार कार्ड बना हुआ है. उनके मुताबिक मात्र एक फीसदी ही ऐसे किसान है जिनका आधार कार्ड नहीं है. उन्होंने दावा किया कि इस नई व्यवस्था से यूरिया की कालाबाजारी रुकेगी.  

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छत्तीसगढ़ में किसानो के लिए सिर्फ आधार कार्ड ही नहीं अनिवार्य किया गया है बल्कि जब वे दुकानों और डीलरों के पास यूरिया और खाद लेने जाएंगे तो वहां उन्हें POS मशीन में अपना अंगूठा लगना होगा. थम्ब इम्प्रेशन के बाद किसानों की आधार संख्या की पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जायेगी. कृषि विभाग ने गांव में वर्षों से खाद बेच रहे दुकानदारों और डीलरों पर भी शिकंजा कसा है.

अब ऐसे दुकानदारों और डीलरों को खेती किसानी और खाद की उपयोगिता की डिप्लोमा परीक्षा पास करनी होगी. हर तरह की खाद के बारे में पूरा अध्ययन करने के बाद ऐसे दुकानदारों और डीलरों को लाइसेसं मिलेगा, ताकि वे अपने इलाकों में यूरिया और दूसरी खाद बेच सकें.  

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