
छत्तीसगढ़ के बालोदाबाजार-भाटापारा जिले के खपरडीह गांव में एक सरकारी स्कूल के 18 छात्र बुधवार को अस्वस्थ महसूस करने के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए. स्थानीय लोगों ने इसके लिए पास के सीमेंट प्लांट से होने वाले जहरीली गैस, धुएं और प्रदूषण को जिम्मेदार ठहराया है.
क्या है मामला?
सरकारी उच्चतर माध्यमिक कन्या विद्यालय की छात्राओं ने चक्कर आने और घबराहट की शिकायत की. इसके बाद उन्हें सुहेला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. छह छात्राओं को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया. कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया कि सभी छात्राओं की स्थिति फिलहाल स्थिर है.
सीमेंट प्लांट पर सवाल
पास के श्री सीमेंट प्लांट के वैकल्पिक ईंधन संसाधन (AFR) केंद्र पर प्रदूषण की शिकायतें मिली थीं. अधिकारियों ने जांच के बाद एएफआर केंद्र को बंद कर दिया. इस केंद्र में ईंधन उत्पादन के लिए रसायनों का उपयोग किया जाता था. माना जा रहा है कि वहां से उठने वाली गंध के कारण बच्चों की तबीयत खराब हुई.
क्या है स्थानीय लोगों का आरोप?
गांव वालों का कहना है कि स्कूल के पास मौजूद दो सीमेंट प्लांट से निकलने वाला धुआं, रसायन और प्रदूषण बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इसे गैस रिसाव का मामला बताया.
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण बोर्ड और औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है. कलेक्टर ने बताया कि प्राथमिक जांच में प्लांट द्वारा प्रदूषण नियंत्रण मानकों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं.
पूर्व सीएम ने लगाए आरोप
भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर कहा, 'खपरडीह स्कूल में तीन दिनों से बच्चे बीमार हो रहे हैं. प्रशासन को पहले ही जागना चाहिए था.' उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रशासन से बच्चों की मदद करने की अपील की. इस घटना ने क्षेत्र में पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच के बाद ही साफ होगा कि असली कारण क्या था.