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नक्सलियों के सबसे बड़े दुश्मन, Combat ऑपरेशन में महारत... जानिए कौन होते हैं DRG जवान जो बीजापुर में हुए शहीद

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के आईईडी विस्फोट में डीआरजी यूनिट के 8 जवान शहीद हो गए. डीआरजी, एक विशेष पुलिस बल है जिसे माओवादियों से निपटने के लिए बनाया गया था. इस यूनिट में स्थानीय युवाओं के साथ पूर्व नक्सलियों को शामिल किया जाता है. 2008 में स्थापित, डीआरजी लगातार नक्सल विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाती है.

बीजापुर में नक्सली हमला (प्रतिकात्मक तस्वीर - PTI) बीजापुर में नक्सली हमला (प्रतिकात्मक तस्वीर - PTI)
सुमी राजाप्पन
  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:29 PM IST

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के आईईडी ब्लास्ट में राज्य पुलिस की एक यूनिट के 8 जवान शहीद हो गए. ये जवान डीआरजी या डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड का हिस्सा थे, जिन्हें एंटी-नक्सल ऑपरेशन से लौटने के दौरान निशाना बनाया गया. इस टीम का गठन ही खासतौर पर नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन करने के लिए किया गया था. सालों पहले जब छत्तीसगढ़ सरकार को लगा कि सुरक्षा बल माओवादियों का सफाया करने के लिए काफी नहीं हैं, तो डीआरजी के रूप में राज्य पुलिस में एक नई यूनिट बनाई गई थी.

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छत्तीसगढ़ की तत्कालीन सरकार ने तय किया कि नक्सलियों के बीच से ही एक फोर्स बनाई जाए. यानी इसमें ऐसे लोग शामिल किए जाएं जो नक्सलियों को करीब से जानते हों, क्योंकि ऐसे लोग ही उनके नेटवर्क को तोड़ सकते हैं. उन दिनों नक्सलियों का नेटवर्क हर गली-मोहल्ले में था. कहीं भी कुछ भी हो, नक्सलियों को तुरंत इसकी खबर मिल जाती थी.

DRG के शहीद जवानों के नाम - कोरसा बुधराम, सोमडू वेंटिल, दुम्मा मड़काम, बमन सोढ़ी, हरीश कोर्राम, पण्डरू पोयम, सुदर्शन वेटी, सुभरनाथ यादव.

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2008 में किया गया था डीआरजी का गठन

नक्सली बड़े-बड़े हमले और नरसंहार करके भाग जाते थे. उन्हें पकड़ना मुश्किल होता था. इसलिए सरकार ने डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) का गठन किया. सबसे पहले इसका गठन नारायणपुर में 2008 में हुआ था. इसके बाद साल 2008 में और जवानों की भर्ती की गई. आखिरी भर्ती 2013 में सुकमा दंतेवाड़ा और बीजापुर में हुई थी.

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बता दे की डीआरजी फोर्स में स्थानीय युवाओं की भर्ती की जाती है. ये युवा स्थानीय भाषा और भौगोलिक स्थिति से परिचित होते हैं. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को भी डीआरजी में भर्ती किया जाता है, ताकि, वे अपने पुराने साथियों की रणनीति जान सकें. फिलहाल डीआरजी में करीब 2 हजार जवान हैं. ये लगातार जंगलों में माओवादियों की तलाश करते रहते हैं. जब भी मुठभेड़ होती है, डीआरजी सबसे आगे खड़ी रहती है.

एंटी-नक्सल ऑपरेशन से लौट रहे थे डीआरजी जवान

बीजापुर में ताजा हमले को लेकर बस्तर रेंज के आईजी पी सुंदरराज ने बताया, "पिछले 3 दिनों से नारायणपुर जिले, दंतेवाड़ा और बीजापुर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान चल रहा था. इस अभियान के दौरान हमने 5 नक्सलियों के शव बरामद किए थे और एक जवान शहीद हो गया था...जब टीम वापस लौट रही थी, तो बीजापुर के अंबेली इलाके में नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट किया. इस हमले में दंतेवाड़ा डीआरजी के 8 जवान और एक ड्राइवर शहीद हो गए..."

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एक अधिकारी ने बताया कि यह नक्सलियों द्वारा सुरक्षा कर्मियों पर पिछले दो वर्षों में सबसे बड़ा हमला है. इससे पहले 26 अप्रैल, 2023 को, दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों ने सुरक्षा कर्मियों को ले जा रहे काफिले में एक वाहन को विस्फोट कर उड़ा दिया था, जिसमें दस पुलिस कर्मी और एक नागरिक चालक की मौत हो गई थी.

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