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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसके तहत राज्य में दुकानें और व्यापारिक संस्थान 24 घंटे खुले रह सकेंगे. इस पहल का उद्देश्य राज्य के छोटे और मध्यम व्यापारियों को लाभ पहुंचाना है और प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देना है.
यह फैसला कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन द्वारा घोषित किया गया, जिन्होंने कहा, "महिलाओं को भी रात में काम करने की अनुमति दी जाएगी. हालांकि, शराब की दुकानों के लिए यह कानून लागू नहीं होगा. उनका समय वही रहेगा." इस फैसले के लागू होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य का आर्थिक विकास तेज होगा. व्यापारी और कर्मचारी दोनों इसका स्वागत कर रहे हैं.
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छोटे व्यवसाय वालों का बढ़ेगा व्यापार
छोटे व्यवसाय के मालिक इसे अपनी बिक्री बढ़ाने और अपने संचालन का विस्तार करने का एक अवसर मान रहे हैं. एक रेस्तरां मालिक विद्या दुबे ने इस पहल का स्वागत तो किया है लेकिन उनके मन में कुछ शंकाएं भी हैं. वह कहती हैं, "यह सही दिशा में कदम है लेकिन क्या यह कानून केवल कागजों पर ही रहेगा? देर रात की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है."
'रोजगार के अवसर पैदा होंगे, व्यापार बढ़ेंगे'
दूसरी ओर, व्यापारिक संगठनों के अध्यक्ष अमर परवानी का कहना है कि यह कदम प्रदेश को एक नए व्यापारिक युग में ले जाएगा. इस निर्णय से नए उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और व्यापारिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.
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हालांकि, यह फैसला केवल शहरों के म्युनिसिपल क्षेत्रों पर लागू होगा और केवल उन दुकानों और संस्थानों पर लागू होगा जिनमें दस या अधिक कर्मचारी होंगे. नए नियम के तहत पंजीकरण शुल्क कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तय किया गया है, जो अब 1,000 रुपये से 10,000 रुपये तक होगा.
महिलाओं की सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा!
पीछे, सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा और रात में महिलाओं के लिए काम करने की अनुमति देने के विचार पर सवाल उठा है. अडिति काले, जो इंटीरियर डिज़ाइनिंग कंपनी में काम करती हैं कहती हैं, "रात में यात्रा करना अभी भी असुरक्षित है. क्या नया नियम महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा? यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि महिलाओं को बिना किसी डर के बाहर जाने की अनुमति हो."