Advertisement

चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल के खिलाफ FIR दर्ज, महादेव बेटिंग ऐप मामले में एक्शन

लोकसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं. महादेव ऐप मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है.

पूर्व सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है पूर्व सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है
सुमी राजाप्पन
  • रायपुर,
  • 17 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 4:32 PM IST

लोकसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं. महादेव बेटिंग ऐप मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है. भूपेश बघेल के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, विश्वासघात और जालसाजी से संबंधित विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 11 के तहत एफआईआर दर्ज की है. एफआईआर में भूपेश बघेल के अलावा महादेव बेटिंग ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत 16 अन्य लोगों का नाम शामिल है.

Advertisement

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामला तब से सुर्खियों में आया, जब ईडी ने दावा किया कि उसने एक 'कैश कूरियर' के ईमेल स्टेटमेंट को रिकॉर्ड किया है, जिसमें खुलासा हुआ है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यूएई में स्थित ऐप प्रमोटरों से कथित तौर पर 508 करोड़ रुपये लिए थे. वहीं, महादेव बुक का मालिक अब हिरासत में हैं, उसे मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तार किया गया है.

ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सीएम भूपेश बघेल ने कहा,'यह व्यक्ति दावा कर रहा है कि वह ‘महादेव ऐप’ का मालिक है. आश्चर्य की बात यह है कि महीनों से इस मामले की जांच कर रही एजेंसी ईडी को यह बात अभी तक पता नहीं थी और दो दिन पहले तक ईडी उसे मैनेजर बता रही थी. छत्तीसगढ़ की जनता सब जान-समझ रही है. वह भाजपा और उसकी सहयोगी ईडी को चुनाव में करारा जवाब देगी.

Advertisement

क्या है महादेव बेटिंग ऐप? 

महादेव बेटिंग ऐप ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए बनाया ऐप है. इस पर यूजर्स पोकर, कार्ड गेम्स, चांस गेम्स नाम से लाइव गेम खेलते थे. ऐप के जरिए क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस, फुटबॉल जैसे खेलों और चुनावों में अवैध सट्टेबाजी भी की जाती थी. अवैध सट्टे के नटवर्क के जरिए इस ऐप का जाल तेजी से फैला और सबसे ज्यादा खाते छत्तीसगढ़ में खुले. इस ऐप से धोखाधड़ी के लिए एक पूरा खाका बनाया गया था. दरअसल, महादेव बेटिंग ऐप कई ब्रांच से चलता था. हर ब्रांच को सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल फ्रेंचाइजी के रूप में बेचते थे. यूजर को सिर्फ शुरुआत में फायदा और बाद में नुकसान होता. फायदे का 80% हिस्सा दोनों अपने पास रखते थे. सट्टेबाजी ऐप रैकेट एक ऐसी मशीन की तरह काम करता है, जिसमें एल्गोरिदम यह तय करता है कि ऐप में अपना पैसा लगाने वाले केवल 30% ग्राहक ही जीतें.
 

(रिपोर्ट- नरेश)

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement