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छत्तीसगढ़ में विधवा महिलाएं क्यों मुंडवा रही हैं सिर, क्या है विरोध की वजह?

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मृतक शिक्षकों की पत्नियां (विधवा) अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रही हैं. इन विधवा महिलाओं को सड़क पर जीवन व्यतीत करते हुए 135 दिन हो गए हैं. महिलाओं का कहना है कि पति के निधन के बाद घर के खर्चे के लिए पैसे नहीं हैं. माली हालत खराब है. ऐसे में जीवन-यापन के लिए अनुकंपा नियुक्ति की जाए.

रायपुर में सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए विधवाओं ने सिर मुंडवाए हैं. रायपुर में सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए विधवाओं ने सिर मुंडवाए हैं.
सुमी राजाप्पन
  • रायपुर,
  • 03 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 9:03 PM IST

छत्तीसगढ़ में विधानसभा सत्र का तीसरा दिन हंगामेदार रहा. विपक्षी दल भाजपा ने राज्यभर में हो रहे कई विरोध प्रदर्शनों को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को घेरा और निशाना साधा. राज्य में दिवंगत शिक्षक अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर रायपुर में 135 दिन से आंदोलन करने वालीं विधवा महिलाओं के मसले को बीजेपी ने विधानसभा में उठाया और चर्चा की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया. हालांकि, कांग्रेस ने चर्चा से इंकार कर दिया है.

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बता दें कि राज्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सफाईकर्मी समेत 5 लाख से ज्यादा कर्मचारी अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. ये विरोध-प्रदर्शन 20 अक्टूबर 2022 से चल रहा है. लेकिन, सदन में पहली बार गूंजा है. भाजपा ने इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करने के लिए स्थगन प्रस्ताव पारित किया. विधानसभा में इस मुद्दे को बीजेपी विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया. 

सरकार की सहानुभूति कहां गई?

अग्रवाल ने आजतक से बातचीत में कहा- यह शर्मनाक है कि सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा करने से इनकार कर दिया. उनकी सहानुभूति कहां है? क्या उन्हें इन विधवाओं का दर्द महसूस नहीं होता है? वे पत्थर से बने हैं? 

'अब सिर मुंडवा रही हैं विधवा महिलाएं'

बीजेपी ने कहा कि सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने आंखें मूंद ली हैं. प्रदर्शनकारी अपना विरोध जताने के लिए अनोखे तरीके को अपनाने के लिए मजबूर हुए हैं. लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए विधवाओं ने अब अपने सिर मुंडवाना शुरू कर दिया है. किसी भी सरकारी प्रतिनिधि ने अभी तक उन तक पहुंचने का प्रयास नहीं किया है. 

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'हम जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे'

एक प्रदर्शनकारी शांति साहू ने कहा- मैंने 2015 में अपने पति को खो दिया. बाद में मैंने अपने बेटे, ससुर और सभी को खो दिया. सीएम ने चुनाव से पहले कई वादे किए थे लेकिन हम क्षमता के आधार पर नियुक्तियां मांग रहे हैं. हमारी वित्तीय हालत भी मजबूत नहीं है, जिसके कारण हम अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ऐसा जीवन जीना एक चुनौती बन गया है. यह चौंकाने वाला है कि रेड रोज पर प्रियंका गांधी का स्वागत कैसे किया जा सकता है. बहरहाल, छत्तीसगढ़ की बेटियां कीड़ा-मकोड़ा जीवन जी रही हैं.

'बजट में मांगें नहीं पूरी हुई तो...'

आंखों में आंसू लिए शांति ने राज्य सरकार को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर आने वाले बजट में हमारी मांगों को अनसुना किया गया तो मैं और मेरे साथी प्रदर्शनकारी अपनी जान दे देंगे.

'विधवा पत्नियों को नौकरी देने का प्रावधान नहीं'

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने इस मसले को लेकर पिछली सरकार को दोषी ठहराया और कहा कि इन महिलाओं के पति संविदा शिक्षक थे और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार इन महिलाओं को नौकरी देने का कोई प्रावधान नहीं है.

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