
आम आदमी पार्टी (AAP) ने बीजेपी शासित दिल्ली नगर निगम (MCD) पर एक बार फिर ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देकर सवाल खड़े किए हैं. AAP का आरोप है कि पहाड़ से कूड़ा हटाने वाली मशीन को 8.5 करोड़ में खरीदने की बजाय किराये पर लिया. इसके चलते किराये के तौर करीब 180 करोड़ का बिल बना. हालांकि, जवाब में दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता ने भी 'आप' नेता को तथ्यों की जांच करने की सलाह दी है.
क्या है मामला
दरअसल, 'आप' के एमसीडी प्रभारी दुर्गेश पाठक ने ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए बीजेपी पर बड़े आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि "एमसीडी ने कूड़े के पहाड़ों को हटाने के लिए 50 मशीनें 5 साल के लिए किराये पर लीं. एक मशीन का किराया 6 लाख रुपये महीना है, इस तरह 50 मशीनों का 5 साल का किराया 180 करोड़ रुपये हुआ. जबकि एमसीडी 50 मशीनें 8.5 करोड़ रुपये में खरीद सकती थी. लेकिन जो काम 8.5 करोड़ रुपये में हो सकता है, बीजेपी भ्रष्टाचार करने के लिए उसी काम को 180 करोड़ में करा रही है."
'आप' नेता का आरोप
'आप' नेता दुर्गेश पाठक ने भलस्वा लैंडफिल साइट से संबंधित एक ऑडिट रिपोर्ट का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि जिस एक मशीन के लिए बीजेपी एक महीने के लिए 6 लाख रुपये किराया दे रही है, बाजार में उस मशीन की कुल कीमत ही मात्र 17 लाख रुपये है. पाठक ने कहा कि यदि बीजेपी शासित नगर निगम इन 50 मशीनों को बाजार से खरीदती है, तो कुल 8.5 करोड रुपये में 50 मशीनें खरीदी जा सकती हैं."
पाठक ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि "बीजेपी मात्र 8.5 करोड रुपये की कीमत वाली मशीनों को किराये पर लेकर 180 करोड रुपये का खर्चा कर रही है. जो काम मात्र 8.5 करोड़ रुपये में हो सकता था, बीजेपी उस काम को करने के लिए जबरदस्ती180 करोड रुपये बर्बाद कर रही है"
बीजेपी का पलटवार
वहीं, इस मसले पर दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने 'आप' के आरोप पर एक बयान जारी किया. इसमें उन्होंने कहा कि, "यह अत्यंत दुखद है कि आम आदमी पार्टी ने नव वर्ष की शुरुआत लैंडफिल साईट पर प्रयुक्त ट्रोमल मशीनों पर झूठ बोल कर की है. दुर्गेश पाठक ने जो कहा है कि नगर निगमों ने ट्रोमल मशीनों के लेकर पांच वर्ष का कांट्रैक्ट किया है और ट्रोमल मशीन की कीमत 17 लाख है, वो झूठ है."
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दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता के मुताबिक, "पूर्वी निगम आदि के ट्रोमल मशीन कॉन्ट्रैक्ट वार्षिक हैं, इसलिए उनकी 5 साल की लागत का मूल्यांकन बेमानी है. बाजार से सत्यापित किया जा सकता है कि ट्रोमल मशीन की कीमत लगभग 52 लाख होती है. नगर निगमों ने उन्हे प्रयोग खर्च एवं रखरखाव लागत के साथ 6 लाख रूपये प्रति माह के किराये पर लिया है."
'आप' और बीजेपी में तकरार
बीजेपी नेता ने आम आदमी पार्टी को तथ्यों की जांच की सलाह देते हुए कहा कि, "हर मशीन पर 3 ड्राइवर और 3 ऑपरेटर, तीन शिफ्ट में काम करते हैं. तेल खर्च आता है और लैंडफिल साइट पर दैनिक टूट-फूट भी बहुत अधिक होती है, जिसका अनुमानित खर्च 5 लाख रूपये प्रतिमाह प्रति ट्रोमल आता है. इसे सप्लायर कम्पनी चुकाती है. साथ ही वह साल में 365 दिन मशीन उपलब्ध कराती है."
बता दें कि दिल्ली में नगर निगम चुनाव में लंबा वक्त है, लेकिन दोनों ही दलों के बीच खींचतान का सिलसिला काफ़ी तेज़ हो गया है. पिछले दिनों आम आदमी पार्टी ने बीजेपी शासित नगर निगम पर 2500 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप लगाया था, तो वहीं बीजेपी मेयर दिल्ली सरकार से 13 हजार करोड़ रुपये बकाये की मांग करते नज़र आये थे.
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