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क्या ईवीएम बैटरी से छेड़छाड़ हो सकती है? पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने दिया जवाब

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का कहना है कि ईवीएम की बैटरी आजतक खराब नहीं हुई है और न ही ईवीएम की बैटरी से छेड़छाड़ की जा सकती है. बैटरी पर्सेंटेज में अंतर की एक बड़ी वजह मॉक पोल होता है. ⁠कई बार मॉक पोल कम लोगों के साथ होता है, कई बार ज्यादा लोगों के साथ मॉक पोल किया जाता है तो स्वाभाविक है बैटरी परसेंटेज अलग-अलग होगा. 

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त OP रावत. (फाइल फोटो) पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त OP रावत. (फाइल फोटो)
रवीश पाल सिंह
  • भोपाल,
  • 09 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 7:41 PM IST

हरियाणा विधानसभा चुनाव के चौंकाने वाले नतीजों के बाद EVM की विश्वसनीयता फिर से सवालों के घेरे में है. कांग्रेस ने ईवीएस की बैटरी से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है और कहा कि जहां ईवीएम में बैटरी ज्यादा थी, वहां बीजेपी जीती है. और जहां ईवीएम में बैटरी 60-70% थी वहां कांग्रेस जीती है. कांग्रेस के इन्हीं आरोपों पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का कहना है कि ईवीएम की बैटरी आजतक खराब नहीं हुई है और न ही ईवीएम की बैटरी से छेड़छाड़ की जा सकती है.
 
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने आजतक से बातचीत में कहा कि ईवीएम बैटरी से छेड़छाड़ हो ही नहीं सकती. ⁠बैटरी पर्सेंटेज में अंतर की एक बड़ी वजह मॉक पोल होता है. ⁠कई बार मॉक पोल कम लोगों के साथ होता है, कई बार ज्यादा लोगों के साथ मॉक पोल किया जाता है तो स्वाभाविक है बैटरी पर्सेंटेज अलग-अलग होगा. 

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'नहीं बदली जाती EVM की बैटरी'

उन्होंने कहा कि ⁠ईवीएम की बैटरी आजतक खराब नहीं हुई. अगर वोटिंग के दौरान भी कोई गड़बड़ होती है तो ईवीएम ही बदल देते हैं, लेकिन आजतक कभी बैटरी नहीं बदली गई. ⁠ईवीएम को जब खोला जाता है या बंद किया जाता है, स्ट्रांग रूम भेजा जाता है तो उसकी ना केवल वीडियो रिकॉर्डिंग होती है, बल्कि उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों के साइन भी लिए जाते हैं ताकि कोई उंगली न उठा सके.

'हमने बुलाया तो कोई नहीं आया'

पूर्व चुनाव आयुक्त के अनुसार, हमने तो साल 2017 में सभी राजनीतिक दलों को बुलाया था और कहा कि वह अपने एक्सपर्ट्स से ईवीएम की जांच करा लें, लेकिन तब कोई आया ही नहीं था. ⁠ईवीएम पर बार-बार तोहमत लगती है. ⁠बैटरी के अलावा ईवीएम को किसी बिजली की तार से इसलिए नहीं चलाया जा सकता, क्योंकि फिर आरोप लगेगा कि ये केबल बीजेपी वालों की है या कांग्रेस वालों की.

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क्या है कांग्रेस का आरोप

दरअसल, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को ईवीएम पर आरोपी लगाते हुए कहा कि जहां ईवीएम में 99% बैटरी थी, वहां बीजेपी जीती है. जहां 70% से कम बैटरी थी, वहां कांग्रेस जीती है. ये अगर साजिश नहीं है तो क्या है? 12 से 14 सीटों पर ऐसी शिकायतें मिली हैं.

ईसी ने दी सफाई

ईवीएम की एल्कलाइन बैटरी को लेकर चुनाव आयोग के तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इसका आंकड़ों से कोई लेना देना नहीं है. चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक ईवीएम के कंट्रोल यूनिट में एल्कलाइन बैटरी का उपयोग होता है. कंट्रोल यूनिट में नई बैटरी ईवीएम की कमीशनिंग के दिन उम्मीदवारों की उपस्थिति में डालकर सील की जाती है. ईवीएम में 7.5 वोल्ट की एल्कलाइन बैटरी लगती है, अमूमन पूरी चार्ज बैटरी 7.58 से 7.4 वोल्ट के बीच 99% तक चार्ज बताती है. इस्तेमाल के दौरान जब वो 5.4 पर पहुंचती है, तो 10% दिखाती है. उसी समय मशीन बताती है कि बैटरी बदलने की जरूरत है.

BJP ने जीतीं 48 सीटें

बता दें कि बीजेपी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए 48 सीटें जीतकर तीसरी बार प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने जा रही है. कांग्रेस ने 37 सीटें जीती हैं तो इलेनो ने 2 सीटें जीतीं हैं. वहीं, साढ़े चार साल तक सत्ता में बीजेपी की साझेदार रही जेजेपी का सूपड़ा साफ हो गया है. 

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