
टूलकिट केस में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं के खिलाफ अपनी शिकायत के नौ दिन बाद, कांग्रेस गुरुवार को जांच से पीछे हट गई और दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच को अवैध और कानून का उल्लंघन करार दिया. कांग्रेस ने इस जांच से खुद को हटा लिया है, और केस वापस ले लिया है. कांग्रेस नेता राजीव गौड़ा और रोहन गुप्ता ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिखी और सभी दस्तावेजों को छत्तीसगढ़ ट्रांसफर करने को कहा, जहां बीजेपी नेता रमन सिंह और संबित पात्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज है.
बीजेपी नेताओं पर आरोप है कि इन लोगों ने गलत और मनगढ़ंत ढंग से टूलकिट तैयार किया और लोगों ने सर्कुलेट किया है.
राजीव गौड़ा और रोहन गुप्ता ने यह दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है कि एक ही मैटर के लिए दो-अलग जगहों पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के मुताबिक, 'एक ही केस में दो एफआईआर नहीं दर्ज होनी चाहिए. अगर जरूरी सूचनाएं मिल गईं हों तो किसी भी तरह की नई जांच भी शुरू नहीं होनी चाहिए.'
पत्र में यह भी लिखा है, 'हमारी शिकायत पर FIR दर्ज करने में दिल्ली पुलिस फेल हो गई है. हमने छत्तीसगढ़ में शिकायत दर्ज की थी, वहीं हम केस जारी रखेंगे. दिल्ली पुलिस अब कानून और सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का उल्लंघन कर रही है.' रोहन गुप्ता ने कहा कि दिल्ली पुलिस को बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों को बचाने के लिए झूठ और गलत सूचनाएं नहीं फैलानी चाहिए.
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रोहन गुप्ता ने कहा, 'हमने केस वापस ले लिया है और अपनी शिकायत ट्रांसफर करने को कहा है,जो शिकायत हमने 18 मई को दर्ज कराई थी. दिल्ली पुलिस ने काम नहीं किया. केस की जांच गलत है, ठीक बीजेपी की टूलकिट की तरह.'
बीजेपी नेताओं को हुई बचाने की साजिश!
कांग्रेस ने अपने पत्र में लिखा है कि 18 मई को शिकायत के बावजूद, जिसमें संज्ञेय अपराध स्पष्ट रूप से जाहिर किए गए थे, दिल्ली पुलिस पर दबाव और केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर काम करने की वजह से शिकायत तक दर्ज नहीं की गई थी. यह सिर्फ इसलिए हुआ जिससे बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों को अपराध से बचाया जा सके. उन्होंने यह कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने पहले ही एफआईआर इसी केस में 19 मई को दर्ज कर ली है. यह केस अब दिल्ली पुलिस के क्षेत्राधिकार से बाहर है.
पत्र में लिखा गया है कि दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही कथित शुरुआती जांच कुछ और नहीं, बल्कि राज्य मशीनरी और संसाधनों का दुरुपयोग है. यह काम बीजेपी और मोदी सरकार के दबाव में किया जा रहा है, क्योंकि उक्त प्रारंभिक जांच में कुछ भी नहीं हो सकता है. कांग्रेस के दो नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस आरोपी बीजेपी नेताओं के कहने पर और केंद्रीय गृह मंत्रालय के दबाव में काम कर रही है और अवैध रूप से गलत सूचना दे रही है. पुलिस तीसरे पक्ष और मीडिया को भी गुमराह कर रही है.
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